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Abu Dhabi Hindu Temple: अबूधाबी के पहले हिंदू मंदिर के निर्माता की अनसुनी कहानी; कागज पर उकेरे थे मन के भाव

Wed, 20 Mar 2024 06:01 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 20 Mar 2024 06:01 PM IST
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Unheard story of Mahantswami Maharaj builder of Abu Dhabi's first Hindu temple
अबूधाबी मंदिर के निर्माता महंतस्वामी महाराज - फोटो : अमर उजाला

बीते माह बसंत पंचमी के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थरों से निर्मित अबूधाबी के पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया था। इस मंदिर की भव्यता का पता इसी से लगाया जा सकता है कि बीते रविवार को मात्र एक दिन में यहां 65000 दर्शनार्थी पहुंचे। पूरे विश्व में इस मंदिर के उद्घाटन को लेकर कवरेज की गई थी। अभी भी यह मंदिर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है। वहीं, जब इस मंदिर का उद्घाटन समारोह हुआ था तब इसके निर्माता महंतस्वामी महाराज ने कागज पर लिखकर अपनी भावनाएं जाहिर की थीं। 


 
स्वामीजी ने अपनी भावना मिडिया के सामने नहीं बल्कि एकांत में अपने कमरे में कागज के टुकडे पर अपने ह्रदय का भाव कागज पर उकेरा था।  
 

Unheard story of Mahantswami Maharaj builder of Abu Dhabi's first Hindu temple
अबूधाबी में बना पहला हिंदू मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

महंतस्वामी महाराज ने कागज पर लिखे थे अपने मन के भाव
“आज वसंत पंचमी का उत्सव  है। यह हमारे गुरु शास्त्रीजी महाराज की जयंती है। यह अबूधाबी के भव्य और दिव्य मंदिर में मूर्तिप्रतिष्ठा का उत्सव है। मैं आपको हर दिन याद करता हूं और आज भी याद करता हूं। आपकी सेवा भुलाई नहीं जाती। जब मैं प्रतिष्ठा की आरती कर रहा था तो आप सभी को याद कर रहा था। मेरे  मन आप सभी भी प्रमुखस्वामी महाराज द्वारा निर्मित भव्य और दिव्य अक्षरधाम हैं क्योंकि आप अक्षरपुरुषोत्तम के सच्चे भक्त हैं, नियम धर्म का पालन करते हैं और सेवा करते हैं। आपका मन अबूधाबी मंदिर में है और मेरा मन आप में है। आपकी जय हो, आपकी जय हो।”

Unheard story of Mahantswami Maharaj builder of Abu Dhabi's first Hindu temple
अबू धाबी - फोटो : ani
महंतस्वामी महाराज ने की थी भक्तों के हित की कामना
जब पूरी दुनिया इस मंदिर के निर्माता को खोज रही थी, तब स्वामीजी अपने गुरु शास्त्रीजी महाराज और प्रमुखस्वामी महाराज की स्मृति खोज रहे थे। अनेक लोग जब अपनी सेवा को मंदिर से जोड़कर प्रसिद्धि बटोरने का प्रयत्न कर रहे थे तब स्वामीजी अपनी कृति, सेवा को भुलाकर स्वयंसेवकों की सेवा को मंदिर के साथ जोड़कर उसे चिरंतन  स्मृति बना रहे थे। समूचे विश्व का मन जब अबूधाबी में लगा था तब स्वामीजी के मन में केवल भक्तों के हित की कामना थी, उनके जय की कामना थी।  
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Unheard story of Mahantswami Maharaj builder of Abu Dhabi's first Hindu temple
अबूधाबी के पहला हिंदू मंदिर। - फोटो : Twitter
'एकता और सद्भाव को बढ़ावा देता है यह मंदिर'
गौरतलब है कि आम तौर पर मंदिर में या एक तीन या पांच शिखर होते हैं लेकिन अबू धाबी में सात शिखरों का निर्माण किया गया है, जो अमीरात की एकता का प्रतीक है। साथ ही सात मीनारें सात महत्वपूर्ण देवताओं को स्थापित करती हैं।  108 फीट ऊंचा यह मंदिर क्षेत्र में विविध समुदायों के सांस्कृतिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

 
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हिंदू मंदिर अबूधाबी - फोटो : twitter
यूएई के संस्कृति को भी नक्काशी में उकेरा गया
 दृढ़ता, प्रतिबद्धता और धीरज के प्रतीक ऊंट को संयुक्त अरब अमीरात के परिदृश्य से प्रेरणा लेते हुए मंदिर की नक्काशी में उकेरा गया है। मंदिर में रामायण और महाभारत समेत भारत की 15 कहानियों के अलावा माया, एज़्टेक, मिस्र, अरबी, यूरोपीय, चीनी और अफ्रीकी सभ्यताओं की कहानियों को भी दर्शाया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारें भारत के बलुआ पत्थर का इस्तेमाल करके बनाई गई हैं। अन्य उल्लेखनीय वास्तुशिल्प तत्वों में दो घुमट (गुंबद), 12 समरन (गुंबद जैसी संरचनाएं) और 402 स्तंभ शामिल हैं। दो घुमट 'शांति का गुंबद' और 'सद्भाव का गुंबद' हैं।
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