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Vice President Election: अल्वा को समर्थन से टीएमसी का फिर इनकार, जानें विपक्षी उम्मीदवार के पास कितने वोट?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Wed, 03 Aug 2022 12:09 AM IST
सार

टीएमसी का कहना है कि विपक्ष का उम्मीदवार तय करने से पहले एक बार भी कांग्रेस ने टीएमसी से चर्चा नहीं की। ममता बनर्जी को अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए मार्गरेट अल्वा ने आग्रह किया था। जिसे ममता ने इंकार कर दिया। 

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Vice President Election: TMC again refuses to support Margaret Alva
मार्गरेट अल्वा - फोटो : पीटीआई
पांच दिन बाद यानी छह अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की नेतृत्व वाले विपक्ष से मार्गरेट अल्वा प्रत्याशी हैं। आंकड़ों के खेल में अभी जगदीप धनखड़ काफी आगे चल रहे हैं।


भाजपा की धुर विरोधी कही जाने वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने का फैसला लिया है। टीएमसी ने वोटिंग से दूर रहने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। टीएमसी का कहना है कि विपक्ष का उम्मीदवार तय करने से पहले एक बार भी कांग्रेस ने टीएमसी से चर्चा नहीं की। ममता बनर्जी को अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए मार्गरेट अल्वा ने आग्रह किया था। जिसे ममता ने इंकार कर दिया। 



ऐसे में आइए जानते हैं कि एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के सामने मार्गरेट अल्वा को अब तक कितने दलों का समर्थन मिला है? कितना वोट हासिल कर पाएंगी अल्वा? 
 
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ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए अल्वा के आग्रह पर टीएमसी ने क्या कहा? 
विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने ममता बनर्जी से आग्रह किया था कि वो उपराष्ट्रपति वोटिंग से दूर रहने के अपने फैसले पर फिर से विचार करें। मार्गरेट ने कहा था कि टीएमसी विरोधी खेमे की महत्वपूर्ण शक्ति है। उपराष्ट्रपति चुनाव में उसके वोटिंग नहीं करने से भाजपा के ही हाथ मजबूत होंगे। टीएमसी के पास अभी भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का समय है। 

टीएमसी के राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने मार्गरेट अल्वा के आग्रह पर बयान दिया। उन्होंने कहा 'टीएमसी के उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने का फैसला पार्टी के संसदीय दल की बैठक में काफी सोच-विचार करके लिया गया है। हम मार्गरेट अल्वा का सम्मान करते हैं लेकिन इस फैसले पर पुनर्विचार की संभावना नहीं है।' 
 
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मार्गरेट अल्वा। - फोटो : Social Media
अल्वा के पक्ष में कितने दल? 
विपक्ष से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को अब तक कांग्रेस, एनसीपी, वामपंथ, नेशनल कॉन्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आरजेडी का समर्थन मिला है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी समेत कुछ अन्य दलों का भी साथ मिल सकता है। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने भी अल्वा का समर्थन किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत अल्वा की नामांकन प्रक्रिया में भी शामिल हुए थे। हालांकि, शिवसेना के ज्यादातर सदस्य एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के साथ हैं। 
 
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बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ याचिका - फोटो : पीटीआई
जगदीप धनखड़ को किसने-किसने दिया समर्थन? 
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भाजपा की अगुआई वाले एनडीए ने उम्मीदवार बनाया है। धनखड़ को अब तक भाजपा, जेडीयू, अपना दल (सोनेलाल), बीजेडी, एआईएडीएमके, वाईएसआर कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, एनपीपी, एमएनएफ, एनडीपीपी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) जैसे दलों का समर्थन मिला है। 
 
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सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : ANI
इन दलों ने अब तक नहीं खोले पत्ते
राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी के नाम पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), बसपा, शिरोमणि अकाली दल समेत कुछ अन्य पार्टियों ने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि उपराष्ट्रपति चुनाव में ये किसे समर्थन देते हैं।

अब जानिए कितने सदस्य डालेंगे वोट? 
उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य वोट डालते हैं। इनमें मनोनीत सांसद भी शामिल होते हैं। अभी लोकसभा में सदस्यों की संख्या पूरी है। मतलब पूरे 543 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। इनमें 12 नामित सांसद रहते हैं। मौजूदा समय में आठ सीटें खाली हैं। इनमें चार जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण जबकि एक सीट त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री बने माणिक साहा ने छोड़ी है। तीन अन्य नामित सदस्यों की सीट भी खाली है। सरकार उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले नामित सदस्यों के लिए खाली सीटें भर सकती है।  

इस लिहाज से उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राज्यसभा वोटर्स के आंकड़े सामने आते हैं। पहला ये कि मौजूदा स्थिति में चुनाव में 237 राज्यसभा सांसद वोट करेंगे। दूसरा यह कि 240 सदस्य वोट कर सकते हैं। 240 सदस्य तब वोट करेंगे जब नामित सदस्यों के तीन खाली पदों को भर दिया जाए। 

अब ओवरऑल वोटर्स के आंकड़ों पर नजर डालते हैं। अगर राज्यसभा के 240 सदस्य वोट डालते हैं तो ओवरऑल वोटर्स की संख्या 783 हो जाएगी, लेकिन अगर राज्यसभा के 237 वोटर्स होंगे तो ये आंकड़ा घटकर 780 हो जाएगा। 

जीतने के लिए कितने वोट चाहिए? 
अभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की संख्या के हिसाब से वोटर्स की दो संख्या निकलकर सामने आ रही है। पहली परिस्थिति में कुल 783 वोट पड़ सकते हैं। ऐसे में जीत के लिए उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 393 वोट चाहिए होंगे। दूसरी परिस्थिति में अगर 780 वोट पड़ते हैं तो उम्मीदवार को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 391 वोट चाहिए होंगे। 


 
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