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Election 2023: मेघालय, त्रिपुरा और नगालैंड चुनाव में कौन से मुद्दे होंगे हावी, राजनीतिक दलों की क्या तैयारी?

Fri, 20 Jan 2023 04:42 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Fri, 20 Jan 2023 04:42 PM IST
सार

त्रिपुरा में इस वक्त भाजपा की सरकार है। वहीं, नगालैंड में एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री हैं। मेघालय में एनपीपी के कोनराड संगमा सत्ता में हैं। दोनों राज्यों में भाजपा सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। लेकिन चुनाव नजदीक आते ही तीनों ही राज्यों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।

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Which issues will dominate the Meghalaya, Tripura and Nagaland elections, preparation of political parties?
त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के लिए विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। त्रिपुरा में 16 फरवरी और नगालैंड-मेघालय में 27 फरवरी को एक-एक चरण में मतदान होगा। तीनों ही राज्यों में 60-60 सदस्यीय विधानसभा है। शनिवार को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना भी जारी हो जाएगी। इसी के साथ नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।  




त्रिपुरा में इस वक्त भाजपा की सरकार है। वहीं, नगालैंड में एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री हैं। मेघालय में एनपीपी के कोनराड संगमा सत्ता में हैं। दोनों राज्यों में भाजपा सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। लेकिन चुनाव नजदीक आते ही तीनों ही राज्यों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। आइए जानते हैं कि तीनों ही राज्यों की सत्ता में शामिल भाजपा ने इस बार चुनाव के लिए क्या प्लान बनाया है? विपक्ष के पास कौन से मुद्दे हैं? 
 
Which issues will dominate the Meghalaya, Tripura and Nagaland elections, preparation of political parties?
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
पहले तीनों राज्यों के मौजूदा समीकरण जान लेते हैं

त्रिपुरा : यहां पिछली बार यानी 2018 चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। भाजपा ने 25 साल से शासन कर रहे लेफ्ट-कांग्रेस को बेदखल किया था। इस जीत के नायक रहे तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बिप्लब देब को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि, 2022 में भाजपा ने देब की जगह मानिक साहा को राज्य की कमान सौंप दी। अब साहा पर भाजपा को सत्ता में वापसी कराने की जिम्मेदारी है। 

हालांकि, बीते कुछ महीनों से राज्य में सियासी उथलपुथल जारी है। एक तरफ भाजपा ने 2018 में जीत दिलाने वाले बिप्लब कुमार देब को हटाकर मानिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया तो कई नेता पार्टी से अलग भी हो गए। भाजपा नेता हंगशा कुमार त्रिपुरा इस साल अगस्त में अपने 6,000 आदिवासी समर्थकों के साथ टिपरा मोथा में शामिल हो गए। वहीं, आदिवासी अधिकार पार्टी भाजपा विरोधी राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही कई नेता पार्टियां बदल रहे हैं। हमेशा एक-दूसरे की धुर विरोधी रही कांग्रेस और सीपीएम ने इस बार हाथ मिला लिया है। दोनों ही पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का एलान किया है। 
 
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मेघालय विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
मेघालय : 2018 में  राज्य में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। हालांकि, बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। चुनाव में अलग-अलग लडे़ एनपीपी-भाजपा ने गठबंधन किया। एनपीपी के कोनराड संगमा मुख्यमंत्री बने। यहां भी चुनाव से पहले राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। यहां तक की गठबंधन सरकार चला रही एनपीपी और भाजपा के बीच भी दरारें दिख रही हैं। हाल ही में दो विधायक एनपीपी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। कहा जहा रहा है कि 2018 की तरह ही इस बार भी दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने नए सिरे से मेघालय में संगठन खड़ा किया है। दूसरी पार्टियों के कई नेताओं को पार्टी में शामिल भी कराया है। 
 
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नगालैंड विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
नगालैंड: 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF)  में दो टुकड़ों में बंट गई  थी। बागियों ने नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) बनाई। पार्टी के बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे नेफ्यू रियो बागी गुट के साथ चले गए। चुनाव से पहले NPF ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। भाजपा और NDPP ने मिलकर चुनाव लड़ा। NDPP को 17 तो भाजपा को 12  सीटों पर जीत मिली। गठबंधन सत्ता में आया और नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बने। 

नेफ्यू रियो के सीएम बनने के बाद 27 सीट जीतने वाली NPF के ज्यादातर विधायक NDPP में शामिल हो गए। इससे NDPP विधायकों का आंकड़ा 42 पर पहुंच गया। वहीं, NPF के केवल चार विधायक बचे। बाद में NPF ने भी सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन दे दिया। मौजूदा समय में राज्य विधानसभा के सभी 60 विधायक सत्तापक्ष में हैं। इस बार यहां सीट बंटवारे में विवाद हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी अभी ज्यादा सीटों की डिमांड कर रही है। यही कारण है कि चुनाव से पहले गठबंधन में दरार पड़ सकती है। 
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा। - फोटो : Social Media
तीनों राज्यों में किन मुद्दों पर होगा चुनाव? 
इसे समझने के लिए हमने नॉर्थ ईस्ट राज्यों की अच्छी जानकारी रखने वाले देबाशीष रॉय से बात की। उन्होंने कहा, 'तीनों ही राज्यों में भाजपा के सामने स्थानीय राजनीतिक चुनौतियां हैं। मसलन त्रिपुरा में कांग्रेस और सीपीएम का गठबंधन हो चुका है। इसके अलावा टिपरा मोथा भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इस पार्टी में ज्यादातर नेता भाजपा से टूटकर मिल रहे हैं। नेताओं के बागी तेवर का नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ सकता है।'

 
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