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UP Politics: बार-बार केशव प्रसाद मौर्य को ही क्यों निशाने पर ले रहे अखिलेश यादव, जानें सपा की सियासत
Sun, 11 Sep 2022 06:58 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 11 Sep 2022 06:58 PM IST
सार
यूं तो दोनों के बीच राजनीतिक बयानबाजी 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान से ही हो रही है, लेकिन अब कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। इस साल मई में विधानसभा सत्र के दौरान तो दोनों नेताओं के बीच खूब तीखी बहस हुई थी। बात तू तड़ाक तक पहुंच गई थी।
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अखिलेश यादव और केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर हमलावर हैं। बार-बार केशव मौर्य को लेकर अखिलेश बयान दे रहे हैं। ऐसे में चर्चा है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर केशव प्रसाद मौर्य पर हमले शुरू कर दिए? इसके पीछे की सियासत क्या है? आइए जानते हैं...
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य।
- फोटो : amar ujala
बार-बार केशव प्रसाद मौर्य ही निशाने पर क्यों?
ये समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव से बात की। उन्होंने कहा, 'यूपी की सियासत जाति और धर्म के आधार पर काफी हद तक बंटी हुई है। केशव प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग से आते हैं और जब उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया, तब से पिछड़े वर्ग का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ आ गया। 2017, 2019 और फिर 2022 विधानसभा चुनाव के परिणाम ये बताते हैं। 2017 में उम्मीद थी कि केशव मौर्य को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केशव को डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा। पूरे पांच साल केशव और योगी के बीच अनबन की खूब खबरें सामने आईं।'
ये समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव से बात की। उन्होंने कहा, 'यूपी की सियासत जाति और धर्म के आधार पर काफी हद तक बंटी हुई है। केशव प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग से आते हैं और जब उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया, तब से पिछड़े वर्ग का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ आ गया। 2017, 2019 और फिर 2022 विधानसभा चुनाव के परिणाम ये बताते हैं। 2017 में उम्मीद थी कि केशव मौर्य को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केशव को डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा। पूरे पांच साल केशव और योगी के बीच अनबन की खूब खबरें सामने आईं।'
केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
रमाशंकर आगे कहते हैं, 'इस बार जब केशव प्रसाद मौर्य खुद चुनाव हार गए तब से कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी अहमियत पार्टी और सरकार में कम होगी। हालांकि, दोबारा उन्हें उपमुख्यमंत्री पद दे दिया गया, लेकिन इस बार विभाग उतना मजबूत नहीं मिला। अखिलेश ये बात अच्छे से जानते हैं कि केशव के चलते बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग भाजपा के साथ जुड़ा हुआ है। अगर केशव प्रसाद मौर्य को किसी तरह अपनी तरफ खींच लिया जाए तो आने वाले चुनावों में भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।'
रमाशंकर के मुताबिक, बार-बार केशव प्रसाद मौर्य को टारगेट करके अखिलेश मौर्य, कुशवाहा व अन्य पिछड़े वर्ग को ये संदेश देना चाहते हैं कि उनके नेता के साथ भाजपा गलत कर रही है। भाजपा में केशव प्रसाद मौर्य की कोई अहमियत नहीं है और सरकार में भी उनके साथ भेदभाव हो रहा है। चुनाव के दौरान भी अखिलेश और उनके समर्थक इसकी कोशिश कर चुके हैं।
रमाशंकर के मुताबिक, बार-बार केशव प्रसाद मौर्य को टारगेट करके अखिलेश मौर्य, कुशवाहा व अन्य पिछड़े वर्ग को ये संदेश देना चाहते हैं कि उनके नेता के साथ भाजपा गलत कर रही है। भाजपा में केशव प्रसाद मौर्य की कोई अहमियत नहीं है और सरकार में भी उनके साथ भेदभाव हो रहा है। चुनाव के दौरान भी अखिलेश और उनके समर्थक इसकी कोशिश कर चुके हैं।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
अखिलेश को क्या फायदा मिलेगा?
रमाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं, केशव मौर्य पर हमला करके अखिलेश दो तरह से फायदा बंटोरने की कोशिश कर रहे हैं। पहला ये कि इससे पिछड़े वर्ग के लोगों में भाजपा के प्रति दूरियां बढ़ेगी। दूसरा यह कि योगी आदित्यनाथ की सरकार भी अस्थिर हो सकती है। इसका नकारात्मक असर भी आने वाले चुनावों में भाजपा पर पड़ सकता है। ऐसे में जब भाजपा को नुकसान होगा तो अखिलेश यादव पूरी तरह से इसका फायदा उठा सकते हैं।'
रमाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं, केशव मौर्य पर हमला करके अखिलेश दो तरह से फायदा बंटोरने की कोशिश कर रहे हैं। पहला ये कि इससे पिछड़े वर्ग के लोगों में भाजपा के प्रति दूरियां बढ़ेगी। दूसरा यह कि योगी आदित्यनाथ की सरकार भी अस्थिर हो सकती है। इसका नकारात्मक असर भी आने वाले चुनावों में भाजपा पर पड़ सकता है। ऐसे में जब भाजपा को नुकसान होगा तो अखिलेश यादव पूरी तरह से इसका फायदा उठा सकते हैं।'
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अखिलेश यादव, केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
अखिलेश और केशव के बीच लड़ाई कब से शुरू हुई?
यूं तो दोनों के बीच राजनीतिक बयानबाजी 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान से ही हो रही है, लेकिन अब कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। इस साल मई में विधानसभा सत्र के दौरान तो दोनों नेताओं के बीच खूब तीखी बहस हुई थी। बात तू तड़ाक तक पहुंच गई थी। विवाद इतना बढ़ा की मुख्यमंत्री को बीच बचाव करना पड़ा था।
यूं तो दोनों के बीच राजनीतिक बयानबाजी 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान से ही हो रही है, लेकिन अब कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। इस साल मई में विधानसभा सत्र के दौरान तो दोनों नेताओं के बीच खूब तीखी बहस हुई थी। बात तू तड़ाक तक पहुंच गई थी। विवाद इतना बढ़ा की मुख्यमंत्री को बीच बचाव करना पड़ा था।