सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

इंद्र पुत्र सुदर्शन के नाम पर बने इस किले का इसलिए बदलना पड़ा था नाम

amarujala.com-presented by: योगेश सैन Updated Mon, 03 Jul 2017 04:54 PM IST
विज्ञापन
nahargarh fort jaipur history
- फोटो : file photo
धर्म ग्रंथों के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण घूमते हुए अम्बिका वन आए थे। इस दौरान उन्होंने इंद्र के पुत्र सुदर्शन का वध किया। वह यहां श्राप के कारण अजगर रूप में रह रहा था। हजारों साल बाद इस इलाके में एक किले का निर्माण हुआ और उसका नाम रखा गया सुदर्शन किला। फिर कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिसके चलते इस किले का नाम बदलना पड़ गया। आगे की स्लाइड में जानते हैं कहां है यह फेमस किला और क्या है, उसकी खासियत...
Trending Videos

जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने कराया था निर्माण

nahargarh fort jaipur history
- फोटो : File
ये किला है नाहरगढ़ किला, जो राजस्थान की राजधानी पिंकसिटी जयपुर में उत्तर-पश्चिम में अरावली की पहाड़ी पर स्थित है। बारिश में यहां का नजरा हिल स्टेशन जैसा लगता है। खिड़कियों से बादलों की आवाजाही देखते ही बनती है। रात में यहां से जयपुर की लाइटिंग भी गजब लगती है। इस किले का निर्माण 1734 में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने शुरू कराया था। पहाड़ी की चोटी पर बनवाए इस किले की स्थापत्य कला भी पर्यटकों को लुभाती है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

दिन में बनता और रात में हो जाता था धराशाही, फिर किया ये उपाय

nahargarh fort jaipur history
- फोटो : File
सवाई जयसिंह ने जब इस किले का निर्माण शुरू करवाया था, तब एक अनोखी घटना यहां रोजाना होती थी। दिन में किले के लिए जो निर्माण कार्य होता था, वह रात में धराशाही हो जाता था। ऐसा कई दिन तक हुआ। कहा जाता है कि जिस जगह यह किला बन रहा था वहां नाहरसिंह भौमिया का स्थान था। वह इसे बनने नहीं दे रहे थे। बाद में उनकी विधिवत पूजा की और उनका स्थान पहले ब्रह्मपुरी और बाद में आमागढ़ की पहाड़ी पर बनवाया गया। उसके बाद यह किला बना और इसका नाम नाहरसिंह भौमिया के नाम पर नाहरगढ़ रखा है। कुछ लोग इसे 'टाइगर फोर्ट' बताकर पर्यटकों को गुमराह भी करते हैं। दरअसल जयपुर की स्थानीय भाषा ढुंढाड़ी में टाइगर को 'नाहर' कहा जाता है।

कोई रानी नाराज नहीं हो इसलिए बनवाए नौ महल

nahargarh fort jaipur history
- फोटो : File
नाहरगढ़ किले का निर्माण वैसे तो सवाई जयसिंह द्वितीय के समय शुरू हुआ था। उसके बाद सवाई रामसिंह और सवाई माधोसिंह के समय भी यहां काम होता रहा। इस किले को अंतिम रूप माधोसिंह के समय दिया गया। इस किले की मुख्य इमारत को माधवेन्द्र महल के नाम से जाना जाता है। यहां पर इसके साथ ही नौ और महल हैं। ये सभी महल माधवेन्द्र महल से परस्पर जुड़े हुए हैं। इन महलों के नाम सूरज प्रकाश महल, चंद्र प्रकाश महल, आनन्द प्रकाश महल, जवाहर प्रकाश महल, लक्ष्मी प्रकाश महल, रत्न प्रकाश महल, ललित प्रकाश महल, बसंत प्रकाश महल और खुशाल प्रकाश महल है। इन नौ महलों के नाम रानियों के नाम से तय किए गए थे।
विज्ञापन

इस बावड़ी पर होती रही हैं, फिल्मों की शूटिंग

nahargarh fort jaipur history
- फोटो : File
नाहरगढ़ में माधवेन्द्र महल के सामने एक बावड़ी है। दरअसल ये उस वक्त का मुक्ताकाश मंच यानी ओपन थियेटर था। रियायत काल में यहां राजा अपने खास मेहमानों के लिए मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित करवाते थे। इस बावड़ी के तीन तरफ लहरदार सीढ़ियां बनी हुई हैं। इसकी खूबसूरती देखते ही बनती हैं। यहां कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है, जिसमें 'रंद दे बसंती' प्रमुख है। वर्तमान में यहां नाइट ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां कैफेटेरिया, रेस्टोरेंट आदि की सुविधा है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed