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पहलगाम हमले की पूरी साजिश बेनकाब: आतंकियों तक ऐसे पहुंचे हथियार, एक कमजोर कड़ी और गई 26 जानें; NIA का खुलासा

पीटीआई, श्रीनगर Published by: विकास कुमार Updated Sun, 21 Jun 2026 07:06 PM IST
सार

पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचों को निशाना बनाया था। अब एनआईए की चार्जशीट ने आतंकियों के नेटवर्क, उनकी तैयारियों और सुरक्षा तंत्र की चुनौतियों को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Pahalgam attack NIA chargesheet human intelligence gathering vacuum
पहलगाम हमला पर एनआईए की चार्जशीट - फोटो : अमर उजाला

पहलगाम के बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, आतंकियों को सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नकदी पहुंचाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि हमले से पहले आतंकी लंबे समय तक कश्मीर घाटी में सक्रिय रहे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचते रहे।

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पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी - फोटो : पीटीआई

ड्रोन के जरिए गिराए गए हथियार
चार्जशीट के मुताबिक, वर्ष 2024 की शुरुआत में बारामूला जिले के गोगल दारा जंगल क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से हथियारों की खेप गिराई गई थी। इसमें 20 पिस्तौल, 15 लाख रुपये नकद और त्रिकोणीय आकार के बम (चीनी ग्रेनेड) शामिल थे। जांच एजेंसी का मानना है कि आतंकियों ने इन हथियारों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को मजबूत करने और हमले की तैयारी में किया।

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पहलगाम में आतंकी हमले के बाद की तस्वीर - फोटो : ANI

हमलावर ने पहाड़ी और शहरी इलाकों में की आवाजाही
एनआईए ने अपनी जांच में आतंकियों की गतिविधियों और उनके आवागमन का विस्तृत विवरण दिया है। जांच से पता चला है कि हमलावर पहाड़ी और शहरी इलाकों से होकर लगातार आवाजाही करते रहे, लेकिन किसी भी स्तर पर उनकी मौजूदगी का समय रहते पता नहीं चल सका।

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पहलगाम हमला - फोटो : @kathiyabadiii

मानव खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच मानव खुफिया तंत्र (ह्यूमन इंटेलिजेंस) कमजोर पड़ने का आतंकियों ने फायदा उठाया। विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी निगरानी पर बढ़ती निर्भरता और स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने वाले नेटवर्क के कमजोर होने से सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया था।

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पहलगाम आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

गुर्जर और बकरवाल समुदाय से दूरी भी हमले का कारण
विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि गुर्जर और बकरवाल समुदाय लंबे समय से सुरक्षा बलों की आंख और कान की भूमिका निभाते रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों की उनकी गहरी जानकारी ने अतीत में आतंकवाद के खिलाफ अभियानों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि हाल के वर्षों में इन समुदायों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ी दूरी और भरोसे में कमी का असर जमीनी खुफिया जानकारी जुटाने पर पड़ा है।

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