पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों के चेहरे इन दिनाें एक खास वजह से खिले हुए हैं। लीक से हटकर जवानों ने इस बार खेतों में भी मोर्चा संभाला और छह साल से बंजर पड़ी भूमि पर गेहूं की बंपर फसल पैदा कर दी।
मिसाल: जब बीएसएफ ने संभाला खेतों में मोर्चा, बंजर भूमि से निकाला 'सोना'
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आरएस पुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी के पार गोलाबारी के डर से खाली पड़ी कृषि विभाग के चकरोई फार्म की भूमि पर अब फसल कटाई की तैयारी की जा रही है। अनुमान है कि इस भूमि से करीब ढाई हजार बोरी गेहूं की पैदावार निकलेगी। बीएसएफ ने 250 एकड़ भूमि पर स्थानीय ग्रामीणों और कृषि विभाग के सहयोग से बंपर पैदावार का लक्ष्य हासिल किया है।
बीएसएफ की 36वीं बटालियन के कमांडेंट अजय सूर्यवंशी ने बताया कि सुचेतगढ़ बॉर्डर की तारबंदी के पार 250 एकड़ भूमि छह साल से बंजर पड़ी हुई थी। आईजी सीमा सुरक्षा बल एनएस जम्वाल की ओर से इस फार्म के पुनरुत्थान का निर्णय लिया गया।
उन्होंने पहल की और उनके दिशा निर्देश पर चकरोई फार्म की इस भूमि में खेती के लिए कृषि विभाग से अनुमति ली गई। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों को भी सहयोग के लिए तैयार किया गया। वर्तमान में फसल तैयार है जिसकी कटाई भी शुरू हो गई है।
कमांडेंट के अनुसार इस भूमि से इस बार 2500 बोरी गेहूं की पैदावार होने का अनुमान है। ग्रामीणों और जवानों ने मिलकर इस टास्क को पूरा किया है। लिहाजा दोनों तरफ खासा उत्साह है। पैदावार का लाभ स्थानीय ग्रामीणों को मिलेगा।