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भारतीय शूरवीरों ने इन्हीं हथियारों से किया था सर्जिकल स्ट्राइक, पहली बार आए सामने

प्रांजल दीक्षित, अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 28 Sep 2018 08:02 PM IST
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surgical strike on pakistan second anniversary made by airforce station jammu
army
सर्जिकल स्ट्राइक के दो साल पूरे होने पर जहां देश के विभिन्न राज्यों में पराक्रम पर्व मनाया जा रहा है, वहीं जम्मू में भी इस दौरान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शनी जम्मू एयरफोर्स स्टेशन में लगाई गई थी। सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ पर आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय सेना और एयरफोर्स की युद्ध क्षमताओं को दिखाया गया।


सेना का कहना था कि उसके विशेष दस्ते की इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए जो भारतीय सीमा में घुसपैठ की फिराक में थे। रक्षा मंत्री ने पिछले सप्ताह कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ पर 28 से 30 सितंबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 
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surgical strike on pakistan second anniversary made by airforce station jammu
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भारतीय सेना के स्नाइपर इस हथियार का इस्तेमाल करते हैं। इसकी मारक क्षमता 800 मीटर है। यह राइफल एक मिनट में 30 राउंड तक फायर कर सकती है। कारगिल युद्ध में यह हथियार भारतीय सेना के निशानेबाजों के लिए पाकिस्तानी दुश्मनों से लोहा लेने में काफी मददगार साबित हुई थी।

भारतीय थल सेना का यह पोर्टेबल हथियार है, जिसका इस्तेमाल कंधे पर रख कर मिसाइल दागने में किया जाता है। इसकी फायरिंग रेंज 1.5 किमी से 25 किलोमीटर तक है। यह 30 सेकंड में एक मिसाइल दाग कर दुश्मन के टैंक को नष्ट करने में सक्षम है। एक बार तैयार होने के बाद हर 15 सेकेंड में इसे रीलोड किया जा सकता है।
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सेना और वायुसेना के इस एमआई-17 हेलीकॉप्टर को जवानों को मिशन पर ले जाने और माल ढोने में प्रयोग किया जाता है। अक्सर इसे पैरा ट्रूपर्स को मिशन पर उतारने में भी प्रयोग किया जाता है। सूत्रों कि माने तो इस एमआई-17 को सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी प्रयोग में लाया गया था। इसी के जरिये जवानों को पीओके में कार्रवाई के लिए उतारा गया था।
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भारतीय वायु सेना के इस रडार से दुश्मनों के विमानों और हवाई जासूसी पर पैनी नजर रखी जाती है। इसकी नजर से हवा में उड़ने वाला कोई भी विमान बच नहीं सकता है। इसके साथ ही इस रडार से खुद के विमानों पर भी पैनी नजर रखी जाती है।
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हाईटेक उपकरणों से लैस सेना और वायु सेना के जवानों के पास जीपीएस डिवाइस से लेकर सैटेलाइट फोन, कंपस सहित कई लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से युक्त उपकरण मौजूद रहते हैं। जो दुश्मनों को मार गिराने में उन्हें काफी मदद करता है।  
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