हिंदू महाकाव्यों और शास्त्रों में वर्णित महायात्रा के रूप में जम्मू संभाग में जिला कठुआ के मिनी अमरनाथ कहे जाने वाले महानाल पर श्रद्धालुओं की आपार आस्था है। महाशिवरात्रि पर प्राकृतिक शिवगुफा में दर्शन के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं शामिल होते हैं, जो भोले बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य करते हैं।
वो शिवगुफा जिसे कहते हैं मिनी अमरनाथ, एक ऐसी मान्यता जिसके लिए यहां आते हैं देश भर के शिवभक्त
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मलामन के पहाड़ों की तलहटी में स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती रही। उज्ज दरिया से सटे महानाल के लिए राजबाग से पंद्रह किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। गुफा से सटे जंगलों और झरना अलौकिक अनुभूति का आभास करवाता है।
आध्यात्मिक माहौल को बढ़ाते हुए शिव गुफा महानाल कमेटी द्वारा बीते कुछ साल में विकास करवाया गया है। गुफा के बिलकुल विपरीत महाशक्ति और मां वैष्णवी की मूर्तियां हैं। कमेटी के प्रयासों से गुफा में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित करवाई गई हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गुफा का महत्व प्रकाश में आने को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। गुफा में एक संत साधना करते थे। इसलिए ग्रामीणों का गुफा क्षेत्र में आना निषेध था। मगर एक दिन उत्सुकतावश एक महिला गुफा की ओर चली गई और साधना में लीन संत को देख कर बेहोश हो गई। बाद में जब उसे होश आया तब संत वहां नहीं थे और उस स्थान पर भगवान शिव का प्राकृतिक शिवलिंग ही मौजूद था।
एक अन्य कथा के अनुसार गुफा में पहले दुग्ध धारा बहती थी, जो शिवलिंग का अभिषेक करती थी। एक दिन एक गवालन ने लोभ में आकर दूध को एकत्रित कर पास के गांव में बेच दिया। ग्रामीणों के अुनसार तभी से दूध की धारा की जगह प्राकृतिक रूप से गुफा की छत से पानी टपकता है।

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