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Chhath 2019: महापर्व छठ पूजा का है विशेष महत्व, जानें इस पर्व से जुड़ी हर बात

Sat, 02 Nov 2019 09:44 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: नवनीत राठौर Updated Sat, 02 Nov 2019 09:44 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

पांच दिवसीय दिवाली पर्व के ठीक छठवें दिन सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा शरू होती है। इस पूजा की तैयारी जोरो-शोरो से चल रही है। पूर्वी भारत में मनाए जाने वाले इस पर्व का मुख्य केंद्र बिहार रहा है लेकिन समय के साथ-साथ यह पर्व केवल पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जाने लगा है। हिंदी कैलेण्डर के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि तक इस महापर्व को मनाया जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस त्योहार पर पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होता है और इसे धूमधाम से मनाता है। आइए आपको इस पर्व से जुड़ी हर बात बताते हैं...


 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

नहाय-खाय से व्रत की शुरुआत
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाले इस महापर्व को छठ पूजा, छठी माई, सूर्य षष्ठी पूजा छठ, छठ माई पूजा, डाला छठ, आदि कई नामों से जाना जाता है। इस बार छठ पूजा की शुरुआत 31 अक्टूबर से हो रही है। छठ पूजा के पहले दिन नहाय-खाय होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पहले तन और मन दोनों साफ होने चाहिए। नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान कर नए कपड़े पहनते हैं और शुद्ध सात्विक भोजन करते हैं। इस दिन चने की दाल और लौकी की सब्जी खाने का विशेष महत्व है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

व्रत के दूसरे दिन खरना
नहाय-खाय के बाद दूसरे दिन खरना होता है। खरना के दिन व्रती दिन भर कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। शाम में व्रत धारियों के द्वारा गुड़ वाली खीर विशेष प्रसाद के तौर पर बनाया जाता है। पूजा-पाठ करने के बाद व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं। व्रत धारियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद घर के सभी सदस्यों को यह प्रसाद दिया जाता है। इसी दिन व्रती अगले दिन की पूजा के लिए भी प्रसाद बनाते हैं। इस बार खरना 1 नवंबर को है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य
हिंदू धर्म में उगते हुए सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। लेकिन छठ पूजा के दौरान डूबते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम में पूजा की तैयारी करते हैं। नदी या तलाब में व्रती खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अगले दिन की पूजा के तैयारी में लग जाते हैं। इस बार यह अर्घ्य 2 नवंबर को दिया जाएगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

चौथे दिन पूजा का समापन
छठ पूजा के चौथे दिन यानी सप्तमी तिथि को पूजा का समापन होता है। इस दिन उगते हुए हुए सूर्य की पूजा की जाती है। 3 नवंबर को इस बार व्रत का समापन है। सूर्य के उपासना के बाद वहां मौजूद लोगों को प्रसाद दिया जाता है।

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