क्या आप भी अक्सर मोबाइल से देखकर या एआई चैटबॉट से पूछकर कोई भी दवा ले लेते हैं? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये आदत न सिर्फ गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है बल्कि कुछ स्थितियों में जानलेवा तक भी हो सकती है। एक ऐसा ही मामला दिल्ली से सामने आया है जहां 45 साल के एक व्यक्ति ने एआई चैटबॉट से सलाह लेने के बाद बिना प्रिस्क्रिप्शन के एचआईवी पोस्ट-एक्सपोजर दवा ले ली। इस दवा का उसे गंभीर रिएक्शन हो गया और व्यक्ति को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ गया।
Alert: एआई से पूछकर ली दवा, शरीर में हो गया खतरनाक रिएक्शन! जानिए बिना प्रस्क्रिप्शन दवाएं लेना कितना खतरनाक
दिल्ली का एक व्यक्ति मेडिकल सुपरविजन के बिना एआई चैटबॉट की सलाह पर दवा लेने के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न लेने की सलाह देते रहे हैं।
बिना प्रिस्क्रिप्शन एआई की सलाह पर दवा लेना पड़ा भारी
डॉक्टर्स की टीम इस बात को लेकर भी हैरान है कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के मरीज को ये दवाएं मेडिकल स्टोर से कैसे मिल गईं? जबकि इस तरह की दवाएं अब रूटीन में प्रिस्क्राइब भी नहीं की जाती हैं।
डॉक्टर ने कहा, मरीज ने जो दवाएं ली हैं, वे अब डॉक्टर नहीं दे रहे हैं क्योंकि इलाज के प्रोटोकॉल बदल गए हैं। नेशनल गाइडलाइंस के तहत, एचआईवी पोस्ट-एक्सपोजर दवाओं की खास मॉनिटरिंग की जाती है, इसे कई तरह के फॉलो-अप और विशेष जरूरत की स्थिति में ही दिया जाना चाहिए।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि एंटीरेट्रोवायरल दवाओं का बिना देखरेख के इस्तेमाल जानलेवा रिएक्शन, अंगों के फेलियर और क्रॉनिक जटिलताओं को ट्रिगर कर सकता है। लोगों की मेडिकल सलाह के लिए मोबाइल और एआई पर निर्भरता गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है, जोकि इस मामले में देखा गया है।
क्या है स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम?
दवा लेने के बाद व्यक्ति को स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम नामक समस्या हो गई है जो त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन की एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है। यह आमतौर पर दवा के रिएक्शन से होती है, जो फ्लू जैसे लक्षणों से शुरू होती है जिसके बाद दर्दनाक रैशज हो सकते हैं, कई बार छाले तक पड़ जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम को मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं जिसमें मरीजों को समय रहते अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी होता है। कई बार इस समस्या को ठीक होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय भी लग सकता है।
स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम के कारण कई मरीजों में गंभीर रूप टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलिसिस की दिक्कत भी हो जाती है, इसमें 30% से ज्यादा त्वचा की सतह और म्यूकस मेम्ब्रेन को गंभीर नुकसान हो सकता है।
एचआईवी संक्रमण वाले लोगों में, स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम होने का खतरा आम लोगों की तुलना में लगभग 100 गुना ज्यादा होता है।
बिना प्रिस्क्रिप्शन कोई भी दवा लेना खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किसी भी बीमारी में, चाहे वो हल्का सर्दी-जुकाम ही क्यों न हो बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।
डॉक्टर कहते हैं, एआई टूल या मोबाइल सामान्य जानकारी दे सकते हैं, लेकिन इसे डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं माना जा सकता है। अब समय आ गया है कि देश ऐसे स्टैंडर्ड अपनाए जाएं जो ऑनलाइन एआई प्लेटफॉर्म को सीधे स्वास्थ्य संबंधी कामों के लिए इस्तेमाल होने से रोकें।
बिना प्रिस्क्रिप्शन कोई भी दवा लेना खतरनाक होता है क्योंकि हर दवा, हर व्यक्ति के शरीर पर अलग-अलग तरह से असर करती है। यह असर उम्र, वजन, पहले से मौजूद बीमारियों और दूसरी चल रही दवाओं पर निर्भर करता है। डॉक्टर इन सभी बातों को ध्यान में रखकर दवा लिखते हैं, जबकि खुद से ली गई दवा शरीर में गलत रिएक्शन कर सकती हैं।
खुद से दवा लेना हो सकता है नुकसानदायक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेने से गलत डोज का जोखिम भी बढ़ जाता है।
- दर्द निवारक, एंटीबायोटिक, नींद की दवाएं और हार्मोनल दवाएं गलत मात्रा में लेने पर शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
- सेल्फ मेडिकेशन से कई बार बीमारियां छिप भी सकती है। कई बार दवा लक्षणों को दबा देती है, लेकिन असली बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। इससे सही समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता और बाद में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
- किसी भी बीमारी में हमेशा योग्य डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा लें। वे आपकी सेहत का पूरा फॉलो-अप करने के बाद ही जरूरत के अनुसार दवाएं देते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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