रविवार (1 फरवरी 2026) को संसद में देश का बजट पेश किया जाना है। देश के सर्वांगीण विकास के लिए होने वाली तमाम घोषणाओं में अब 24 घंटे से कम का समय बचा है। देश का हेल्थकेयर सिस्टम भी इस बजट से कई सारी आशाएं लगाए बैठा है। स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी से लेकर कुछ खास स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए फंड तक, देश के मेडिकल सिस्टम को और मजबूत करने से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज को सस्ता और आसान बनाने की योजनाओं तक, पूरे देश को इस बजट से कई उम्मीदें हैं।
Budget 2026-27: पिछले बजट में हेल्थ सेक्टर को क्या मिला, इस बार क्या उम्मीदें? यहां जानिए सबकुछ
Health Care Budget Expectations 2026: साल 2025 के बजट में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लगभग 99,858 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। अस्पतालों और कॉलेजों में सीट बढ़ाने, कई जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क हटाने का फैसला लिया गया था। अब 2026-27 के बजट से हेल्थ इंडस्ट्री को क्या उम्मीदें हैं, आइए जान लेते हैं।
पिछले साल के बजट में हेल्थ सेक्ट के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं
इस साल के बजट की उम्मीदों से पहले पिछले साल पेश बजट की महत्वपूर्ण घोषणाओं पर एक नजर डाल लेना जरूरी है।
- 1 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र को कई सौगात दी थीं।
- मखाना का उत्पादन और उसके प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड बनाने, मेडिकल स्नातक और स्नातकोत्तर सीटें बढ़ाने सहित कई घोषणाएं की गई थीं।
- वित्तमंत्री ने मेडिकल की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए साल 2025 के बजट में अस्पतालों और कॉलेजों में 10,000 अतिरिक्त सीटें जोड़ने की घोषणा की थी।
- सरकार ने अगले 3 साल में सभी जिला अस्पतालों में डेकेयर कैंसर सेंटर की स्थापना की सुविधा प्रदान करने का ऐलान किया था।
- कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित रोगियों को राहत देने के लिए 36 जीवन रक्षक दवाओं को सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई थी।
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) को ₹9,406 करोड़ का आवंटन मिला था।
- सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को ₹37,226.92 करोड़ जबकि राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को ₹79.6 करोड़ आवंटित किए थे।
इस साल के बजट से क्या उम्मीदें?
हेल्थ सेक्टर के लीडर्स को उम्मीद है कि सरकार के पिटारे से इस साल कुछ ऐसी योजनाएं आ सकती हैं जिसका दीर्घकालिक रूप से लाभ मिलेगा।
हेल्थ सेक्टर के विशेषज्ञ कहते हैं, इंडस्ट्री केंद्र सरकार की ओर देख रही है ताकि महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और मेडिकल खर्च की जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को पाटा जा सके। पिछले बजट में जरूरी दवाओं को ज्यादा किफायती बनाने और डिजिटल हेल्थ को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था। 2047 तक 'विकसित भारत' लक्ष्य के लिए यूनियन बजट 2026-27 को 'स्वस्थ भारत' बनाने के लॉन्ग-टर्म विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों की टीम ने सरकार से जरूरी मेडिकल टूल्स और सेवाओं पर जीएसटी कम करने की भी मांग की है। ज्यादा जेब खर्च को मैनेज करने के लिए मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक किट पर जीएसटी कम करने की उम्मीद जताई गई है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि इससे इलाज की लागत में सीधे कमी आएगी और हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ेगी।
प्राइमरी हेल्थकेयर और फार्मा इंडस्ट्री में सुधार
मेडिकल एक्सपर्ट्स प्राइमरी हेल्थकेयर सिस्टम के लिए अतिरिक्त फंड्स की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसा इसलिए जरूरी है यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत वादा की गई सभी सेवाएं आसानी से दी जा सकें। नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज की निगरानी, रोकथाम और कंट्रोल का मजबूत सिस्टम बनाने के लिए भी ये जरूरी है।
फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक, असरदार रेगुलेटरी उपायों को लागू करना बहुत जरूरी है। ड्रग टेस्टिंग लैब्स की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और उनकी क्वालिटी भी बेहतर की जानी चाहिए। पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर, यूनिवर्सिटी और रिसर्च इंस्टीट्यूट को मिलाकर टेस्टिंग लैब्स का एक नेशनल नेटवर्क बनाया जाना चाहिए।
क्रॉनिक बीमारियों की रोकथाम और इलाज पर ध्यान
कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए पिछले कुछ बजट में सरकार ने विशेष ध्यान दिया।
- साल 2024-25 के बजट में सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि महिलाओं को जानलेवा कैंसर से बचाया जा सके।
- वहीं अगले साल 2025-26 के बजट में कैंसर की जीवन रक्षक दवाओं की सीमा शुल्क से छूट दी गई थी।
- विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बजट में भी कैंसर के रोकथाम और इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
इसके अलावा प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी देश में बढ़ते मोटापे की समस्या को लेकर लगातार चिंता जताते रहे हैं। मोटापे की रोकथाम और इससे होने वाली बीमारियों की रोकथाम की दिशा में भी किसी फैसले की उम्मीद की जा रही है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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