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Heart Health: एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या अंतर है, कब होता है इनका इस्तेमाल? समझिए आसान तरीके से

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 28 Feb 2026 04:05 PM IST
सार

Angiography vs Angioplasty: एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी दोनों ही हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज का पता लगाने और इलाज से जुड़ी प्रक्रियाएं हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग होता है। एंजियोग्राफी एक डायग्नोस्टिक टेस्ट है, जबकि एंजियोप्लास्टी एक उपचार प्रक्रिया है। आइए इसके बारे में विस्तार से समझते हैं।

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angioplasty and angiography difference tests for heart blockage and heart attack
हार्ट से संबंधित समस्याओं का खतरा और टेस्ट - फोटो : Adobe Stock Photos

हृदय रोग वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। हृदय से संबंधित बीमारियां और जानलेवा स्थितियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। कम उम्र में हार्ट अटैक और इससे मौत के मामले आप भी अक्सर सुनते रहे होंगे।



अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने 9 वर्षीय छात्रा की खेलते-खेलते हार्ट अटैक से हुई मौत की दिल दहला देने वाली खबर बताई थी। इसने बच्चों में बढ़ती दिल की बीमारियों के जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जब भी बात हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट की आती है तो आपने भी दो शब्दों की खूब चर्चा सुनी होगी- एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी। आखिर ये हैं क्या, कब इन्हें प्रयोग में लाया जाता है और इससे क्या मदद मिलती है? अगर आपके मन में भी ये सवाल बने हुए हैं तो आइए इसके जवाब जान लेते हैं।

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हृदय से संबंधित समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के बारे में जान लीजिए

कहीं आप भी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी को एक ही तो नहीं मानते आ रहे हैं? अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान दिल्ली स्थित एक अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अनिरुद्ध परासर ने सबकुछ बहुत ही आसान भाषा में समझाया।
 

  • एंजियोग्राफी एक टेस्ट है और एंजियोप्लास्टी एक इलाज है।
  • दिल की बीमारी की स्थिति में ब्लॉकेज के खतरों को समझने के लिए एंजियोग्राफी कराई जाती है।
  • वहीं एंजियोप्लास्टी इलाज की एक प्रक्रिया है जो ब्लॉक हो चुकी दिल की आर्टरी को दोबारा से काम करने में मदद के लिए की जाती है।
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दिल की आर्टरी में ब्लॉकेज की समस्या - फोटो : Freepil.com

पहले एंजियोग्राफी को समझते हैं

डॉ. परासर कहते हैं, एंजियोग्राफी जांच का एक ऐसा तरीका है जो रक्त का संचार करने वाली वाहिकाओं में ब्लॉकेज का पता लगाने में मदद करती है। 
 

  • एंजियोग्राफी की प्रक्रिया के दौरान जो इमेज मिलती है जिसके आधार पर ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है, इसे एंजियोग्राम कहा जाता है।
  • एंजियोग्राफी में एक पतली, लचीली ट्यूब (कैथेटर) को आर्टरी में डाला जाता है। यह डॉक्टरों को कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज या सिकुड़न को ज्यादा बेहतर तरीके से देखने में मदद करती है। 


(ये भी पढ़िए- घर पर अकेले हैं और हार्ट अटैक आ जाए तो कैसे बचाएं जान? तुरंत करें ये उपाय)

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एंजियोग्राफी क्यों किया जाता है? - फोटो : Freepil.com
कब दी जाती है एंजियोग्राफी की सलाह?
 
  • मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या हार्ट अटैक की स्थिति में ये टेस्ट किया जाता है।
  • एनजाइना यानी  सीने में दर्द बने रहने की स्थिति में ये टेस्ट कराया जाता है। दिल तक रक्त का संचार कम होने का वजह से एनजाइना होता है।
  • पेरिफेरल आर्टरी डिजीज के लिए भी डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इसकी वजह से आपके पैरों की मांसपेशियों में रक्त संचार कम हो जाती है।
  • ब्रेन की रक्त वाहिकाओं में उभार (ब्रेन एन्यूरिज्म) की समस्या में भी लोगों को एंजियोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है।

एंजियोग्राफी जांच की मदद से ये समझने में मदद मिलती है कि व्यक्ति को एंजियोप्लास्टी की जरूरत है या नहीं?
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एंजियोप्लास्टी कब की जाती है? - फोटो : Freepik.com

एंजियोप्लास्टी के बारे में जान लीजिए

एंजियोप्लास्टी एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे ब्लॉक हो चुकी कोरोनरी आर्टरी को खोलने में मदद मिलती है। इसमें बैलून या स्टेंट से आर्टरी को चौड़ा करके दोबारा से खून के संचार को व्यवस्थित किया जा सकता है। हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी को सबसे असरदार और जान बचाने वाला तरीका माना जाता है।

  • इस प्रक्रिया में लोकल एनेस्थीसिया देकर आपकी कलाई या कमर के पास आर्टरी में से किसी एक पर एक छोटा चीरा लगाया जाता है।
  • इस कट की मदद से आर्टरी में एक कैथेटर डाला जाता है।
  • कैथेटर को उस जगह पर ले जाया जाता है जहां इलाज की जरूरत है।
  • कैथेटर के टिप पर एक बलून नुमा चीज लगी होती है। आर्टरी में जमा प्लाक को हटाने के लिए बलून को फुला या जाता है जिससे ब्लॉकेज हटा सकें।
  • हार्ट अटैक वाले मरीजों में डॉक्टर इसी दौरान स्टेंट में स्टेंट लगा देते हैं। स्टेंट खून की नली के डायमीटर को फैलकर रखती है जिससे रक्त का संचार दोबारा से ठीक तरीके से होता रहता है।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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