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घुटने के दर्द को हल्के में न लें नहीं तो हो सकता है गठिया, दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधान
Sat, 29 Feb 2020 09:53 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 29 Feb 2020 09:53 AM IST
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घुटने के दर्द को आप अक्सर महसूस करती होंगी। सुबह शरीर अकड़ता होगा। झुकने और बैठने में परेशानी होती होगी। इसे हल्के में न लें। यह गठिया की शुरुआत हो सकती है। दरअसल, रुमेटाइड आर्थराइटिस अब आम बीमारी हो गई है। गठिया का यह प्रकार महिलाओं में ज्यादातर देखा जा रहा है। इसके रोगियों में ऑटोइम्यून थायराइड रोग की व्यापकता होती है। आइए, जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
घुटनों का दर्द
- फोटो : pixabay
घुटने का गठिया मुख्य रूप से अपक्षयी (डिजनरेटिव) परिवर्तन के कारण होता है, लेकिन कभी-कभी यह अधिक वजन, कूल्हे की नेक्रोसिस (टेढ़ापन), घुटने में चोट लगने से भी हो जाता है। हाइपोथायराइडिज्म जैसी परिस्थिति में वजन वृद्धि की समस्या रहती है, इसलिए ये भी घुटने पर भी असर डालती हैं। इसके रोगियों में उपचार के पहले वर्ष के दौरान ऑटोइम्यून थायराइड रोग बढ़ता दिखाई देता है। वास्तव में, जीवन-शैली की बीमारियों के अलावा गर्भावस्था और स्तनपान के समय महिलाओं के शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है, जो न मिलने पर उनकी हड्डियां प्रभावित हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर महिलाओं को गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान हड्डियों की समस्या का अनुभव नहीं होता और अगर उस दौरान उनकी हड्डियां प्रभावित होती हैं, तो समस्या अक्सर आसानी से ठीक हो जाती है। फिर भी मां और उसके बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिला को हड्डियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
arthritis
कैसे करें पहचान?
इसमें लगातार घुटने में दर्द, सुबह की अकड़न, कड़कड़ाहट, झुकने और बैठने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
इसमें लगातार घुटने में दर्द, सुबह की अकड़न, कड़कड़ाहट, झुकने और बैठने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
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- फोटो : getty
शक्ति और लचीलेपन में सुधार
हालांकि खेल के दौरान कोलेटरल लिगामेंट इंजरी अक्सर होती है और इससे बचना मुश्किल होता है, लेकिन कई ऐसे कदम हैं, जिनसे आप अपने घुटनों की संपूर्ण शक्ति और लचीलेपन में सुधार कर सकती हैं। मसलन, अपने वजन को नियंत्रित करें। साथ ही व्यायाम करने से पहले स्ट्रेचिंग आपके वार्म-अप का नियमित हिस्सा होना चाहिए। हालांकि इसमें अधिक स्ट्रेचिंग न करें। स्ट्रेच करते समय कभी भी हाथों से पैर पर जोर से धक्का न दें और वार्म-अप के दौरान बैठने से बचें। इसके साथ ही गद्देदार और फिट एथलेटिक जूते घुटनों पर पड़ रहे भार के प्रभाव को कम कर देते हैं।
हालांकि खेल के दौरान कोलेटरल लिगामेंट इंजरी अक्सर होती है और इससे बचना मुश्किल होता है, लेकिन कई ऐसे कदम हैं, जिनसे आप अपने घुटनों की संपूर्ण शक्ति और लचीलेपन में सुधार कर सकती हैं। मसलन, अपने वजन को नियंत्रित करें। साथ ही व्यायाम करने से पहले स्ट्रेचिंग आपके वार्म-अप का नियमित हिस्सा होना चाहिए। हालांकि इसमें अधिक स्ट्रेचिंग न करें। स्ट्रेच करते समय कभी भी हाथों से पैर पर जोर से धक्का न दें और वार्म-अप के दौरान बैठने से बचें। इसके साथ ही गद्देदार और फिट एथलेटिक जूते घुटनों पर पड़ रहे भार के प्रभाव को कम कर देते हैं।
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अर्थराइटिस
क्या हैं कारण?
मोटापा और वजन न केवल बॉडी मास इंडेक्स को बढ़ाते हैं, बल्कि खड़े होने के दौरान यांत्रिक तनाव को भी बढ़ाता है, जो जोड़ों की सूजन का कारण होता है। गर्भावस्था के बाद ज्यादातर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है, जो घुटनों के दर्द का प्रमुख कारण है। इसके अलावा हाइपोथायराइडिज्म सीधे घुटने के गठिया से संबंधित नहीं है, लेकिन वजन में वृद्धि के कारण आम तौर पर जो हाइपोथायरायडिज्म देखा जाता है, वह गठिया का कारण है।
मोटापा और वजन न केवल बॉडी मास इंडेक्स को बढ़ाते हैं, बल्कि खड़े होने के दौरान यांत्रिक तनाव को भी बढ़ाता है, जो जोड़ों की सूजन का कारण होता है। गर्भावस्था के बाद ज्यादातर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है, जो घुटनों के दर्द का प्रमुख कारण है। इसके अलावा हाइपोथायराइडिज्म सीधे घुटने के गठिया से संबंधित नहीं है, लेकिन वजन में वृद्धि के कारण आम तौर पर जो हाइपोथायरायडिज्म देखा जाता है, वह गठिया का कारण है।