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Artificial intelligence: टेक्नोलॉजी बनेगी दिल की 'ढाल', पहले से ही हार्ट अटैक की अलर्ट दे देगा एआई

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 19 Feb 2026 02:14 PM IST
सार

Artificial Intelligence And Heart Health: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड, ईसीजी, ब्लड टेस्ट, हार्ट स्कैन और जीवनशैली से जुड़े डेटा का विश्लेषण करता है। एआई एल्गोरिदम पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक रूप से यह अनुमान लगा सकते हैं कि किसी व्यक्ति को भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा कितना है।

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हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Amarujala.com

हृदय रोग-हार्ट अटैक हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले साल 2023 में, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (सीवीडी) की वजह से दुनिया भर में लगभग 19.2 मिलियन (1.92 करोड़) लोगों की मौत हो गई, इसमें इस्केमिक हार्ट डिजीज के कारण 24 करोड़ लोग प्रभावित हुए। भारतीय आबादी में भी हृदय रोगों की समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं। 



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, यहां तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव, गड़बड़ खानपान, मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कारक हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई मामलों में हार्ट अटैक अचानक होता है और मरीज को पहले से कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिलती। 

अच्छी खबर ये है कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ऐसे मामलों में नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।  हार्ट अटैक के जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने में एआई को मददगार माना जा रहा है।

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ईसीजी टेस्ट और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Freepik.com

साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने वाला एआई टूल

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हमने बताया है कि गर्भधारण को आसान बनाने के साथ, कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने तक के लिए एआई को तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में अब विशेषज्ञों की टीम एक ऐसे एआई टूल के बारे में जानकारी दी है जो इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) के जरिए दिल के सिग्नल रिकॉर्ड करने में मदद करता है।
 

  • एआई एल्गोरिदम उन पैटर्न को एनालाइज करते हैं जिससे पता चल सकता है कि कहीं आपको पहले से कोई साइलेंट हार्ट अटैक तो नहीं हुआ है?
  • एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक पैड ईसीजी के जरिए पिछले अटैक का पता लगा सकता है, इसे मोबाइल फोन पर एआई से जोड़ा जा सकता है। 
  • इस डिवाइस और एआई टूल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी मदद से डॉक्टरों को ऐसे मरीजों का पता लगाने में मदद मिल सकती है जो पहले साइलेंट हार्ट अटैक का शिकार रहे चुके हैं।
  • ऐसे मरीजों का समय पर इलाज करके दूसरी बार हार्ट को रोकने और जान बचाने में मदद मिल सकती है।
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हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photo

साइलेंट हार्ट अटैक होता है खतरनाक

साइलेंट हार्ट अटैक या साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हृदय की गंभीर समस्या मानी जाती है। इसमें रोगी को दिल का दौरा तो पड़ता है पर उसे लक्षण महससूस नहीं होते। 
 

  • इस तरह के हार्ट अटैक में सीने में तेज, हाथों में दर्द या सांस फूलने जैसे आम चेतावनी के संकेत नहीं दिखते हैं। 
  • जिन लोगों को ये होते हैं, उनमें से अधिकतर लोग मेडिकल मदद नहीं लेते, जिससे दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान समय के साथ चुपचाप बढ़ता रहता है।
  • इससे भविष्य में हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक से जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • उम्रदराज लोगों, डायबिटीज के शिकार, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों में साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।



(आपको डायबिटीज या पेट का कैंसर तो नहीं? बस जीभ देखकर एआई बता देगा सबकुछ)

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images

कैंसर के मरीजों में हार्ट अटैक का पता लगाने वाला टूल

हृदय रोग और हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिमों के बीच एआई टेक्नोलॉजी को गेम-चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है।

एआई और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने की दिशा में एक अन्य खोज में यूके स्थित लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर मरीजों में सेकेंडरी हार्ट अटैक के खतरे का पता लगाने के लिए एक नया टूल बनाया है। 
 

  • कमजोर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की वजह से कैंसर के  मरीजों में  हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है।
  • अब तक, डॉक्टरों के पास ऐसे मरीजों के इलाज में गाइड करने के लिए कोई स्टैंडर्ड टूल नहीं था
  • अब विशेषज्ञों ने पहले से ही खतरे को बताने वाला मॉडल विकसित किया है, जो खास तौर पर उन कैंसर मरीजों के लिए मददगार हो सकता है जिनमें दिल की बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है।
  • ONCO-ACS नाम का यह टूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर से जुड़े फैक्टर्स को स्टैंडर्ड क्लिनिकल डेटा के साथ मिलाकर छह महीने के अंदर कार्डियक घटना का अनुमान लगा सकता है।
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बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos

जन्मजात हृदय रोगा वाल बच्चों के लिए एआई टूल

एक अन्य खोज में  माउंट सिनाई क्राविस चिल्ड्रन्स हार्ट सेंटर के शोधकर्ताओ ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल विकसित करने के बारे में जानकारी दी है, जो जन्मजात हृदय रोग के शिकार बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकती है।
 

  • कई अन्य संस्थानों के साथ मिलकर विशषज्ञों ने जो टूल तैयार किया है वह  टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट वाले मरीजों में हार्ट की समस्या, हार्ट डैमेज का पता लगाने में मदद कर सकती है।
  • टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट का पता अक्सर जन्म के तुरंत बाद चल जाता है। इसके कारण आपके बच्चे की त्वचा नीली या ग्रे दिख सकती है। स्टेथोस्कोप से बच्चे के दिल की धड़कन सुनते समय फुसफुसाहट जैसी आवाज (हार्ट मर्मर) आती है।
  • यह टूल स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) को एनालाइज कर सकता है ताकि जोखिमों का पता लगाया जा सके। आमतौर पर इस खतरे का पता लगाने के लिए कार्डियक एमआरआई की जरूरत होती है।





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स्रोत:
Prediction of mortality, bleeding, and ischaemic events in patients with cancer and acute coronary syndrome: a model development and validation study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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