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Union Budget 2026: ऑटोइम्यून दवाएं होंगी सस्ती, जानें किन बीमारियों में मिलेगी राहत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sun, 01 Feb 2026 11:46 AM IST
सार

Budget 2026 healthcare highlights: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के दौरान हेल्थ सेक्टर (बायोफार्मा क्षेत्र) में 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। उन्होंने कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयों को सस्ता करने और उन्हें किफायती दरों पर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है।

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Budget 2026: Finance Minister Announces Cheaper Autoimmune and Cancer Drugs; ₹10,000 Crore Fund for Bio-Pharma
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : संसद टीवी

Finance Minister Budget Speech 2026: केंद्रीय बजट 2026 के अपने भाषण में वित्त मंत्री ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य भारत को एक 'वैश्विक बायोफार्मा हब' के रूप में विकसित करना है, जिससे आम जनता को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारी खर्च न करना पड़े। बजट में विशेष रूप से कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों की दवाओं को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया है।



वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि नवाचार को बढ़ावा देकर 'गैर-संचारी रोगों'  के उपचार को सुलभ बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार अगले 10 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने की योजना बना रही है। इस निवेश से न केवल दवाओं की कीमतें कम होंगी, बल्कि 'बायो-फार्मा शक्ति' और 'बायोलॉजिक्स' के उत्पादन में भी भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा।

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Budget 2026: Finance Minister Announces Cheaper Autoimmune and Cancer Drugs; ₹10,000 Crore Fund for Bio-Pharma
दवाएं - फोटो : Freepik.com

क्या हैं ऑटोइम्यून बीमारियां और क्यों महंगी हैं इनकी दवाएं?
ऑटोइम्यून बीमारी वह स्थिति है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से स्वस्थ कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है। इसमें रूमेटाइड अर्थराइटिस, सोरायसिस, ल्यूपस और टाइप-1 डायबिटीज जैसी बीमारियां शामिल हैं। वर्तमान में इनकी दवाएं और 'बायोलॉजिक्स' इंजेक्शन काफी महंगे होते हैं क्योंकि इनके निर्माण में उच्च तकनीक और जटिल अनुसंधान की आवश्यकता होती है। बजट 2026 के बाद, इन दवाओं के घरेलू उत्पादन से मरीजों का वित्तीय बोझ काफी कम होने की उम्मीद है।

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Budget 2026: Finance Minister Announces Cheaper Autoimmune and Cancer Drugs; ₹10,000 Crore Fund for Bio-Pharma
डायबिटीज - फोटो : Freepik.com

बायोफार्मा हब और अनुसंधान के लिए 10 हजार करोड़ का फंड
भारत को वैश्विक मानक का दवा केंद्र बनाने के लिए सरकार ने 10 वर्षीय विजन पेश किया है। इस 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश से बायो-फार्मा फोकस नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस नेटवर्क में तीन राष्ट्रीय संस्थाएं फार्मास्युटिकल, शिक्षा और अनुसंधान एक साथ मिलकर काम करेंगी। इससे दवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और नई दवाओं की खोज में तेजी आएगी, जिससे भारत विदेशों से आयात होने वाली महंगी दवाओं पर निर्भरता कम कर सकेगा।

Budget 2026: Finance Minister Announces Cheaper Autoimmune and Cancer Drugs; ₹10,000 Crore Fund for Bio-Pharma
कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com

सेंट्रल ड्रग कंट्रोलर का सशक्तीकरण और वैश्विक मानक
दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्री ने सेंट्रल ड्रग कंट्रोलर को और अधिक सशक्त बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य भारतीय दवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है ताकि 'मेड इन इंडिया' दवाएं दुनिया भर में भरोसा जीत सकें। कड़े नियमों और बेहतर निगरानी से नकली दवाओं पर लगाम लगेगी और बायोफार्मा क्षेत्र में नवाचार को सही दिशा मिलेगी। यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा देगा।

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दवाएं - फोटो : Freepik.com

किफायती स्वास्थ्य सेवा की ओर बढ़ते भारत के कदम
बजट 2026 की ये घोषणाएं स्पष्ट करती हैं कि सरकार का ध्यान अब गंभीर और लंबी चलने वाली बीमारियों के उपचार को मध्यम वर्ग की पहुंच में लाना है। कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के साथ-साथ ऑटोइम्यून रोगों के लिए सस्ता इलाज लाखों परिवारों को जीवनदान देगा। नवाचार और बेहतर रिसर्च नेटवर्क के माध्यम से भारत न केवल अपनी जनता को सस्ता इलाज देगा, बल्कि पूरी दुनिया को किफायती बायोफार्मा समाधान प्रदान करने वाला अग्रणी राष्ट्र बनेगा।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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