Aryan Todi Kolkata Runner: इंदौर में रविवार सुबह आयोजित एक मैराथन के दौरान दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। कोलकाता से आए धावक आर्यन तोड़ी की फिनिश लाइन से महज 100 मीटर पहले अचानक तबीयत बिगड़ने और दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आर्यन के सीने में अचानक तेज दर्द उठा और वे नीचे बैठ गए।
Health Tips: सीपीआर देने के बाद भी नहीं बच पाई धावक की जान, एक्सपर्ट से जानें इसके पीछे का कारण
Indore Marathon Runner Death: मध्य प्रदेश के इंदौर से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है, जिसमें एक धावक को दौड़ने के दौरान ही हार्ट अटैक आ गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि उसे सीपीआर देने के बाद भी नहीं बचाया जा सका। आइए इस लेख में इसी के बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं।
क्या हो सकते हैं मूल कारण?
इस विषय पर सुझाव लेने के लिए हमने ओडिया के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर रवि कुशवाहा से बात की। उनका कहना है कि हृदय की धमनियों में 'मैसिव ब्लॉकेज' (बड़ा अवरोध) हो या दिल की मांसपेशियां बुरी तरह फट गई हों, तो सीपीआर रक्त प्रवाह को बहाल नहीं कर पाता है।
इसके अलावा, मैराथन जैसे अत्यधिक शारीरिक श्रम वाले कामों में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का गंभीर असंतुलन भी 'इरिवर्सिबल' डैमेज का कारण बन सकता है।
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मैराथन और 'सडन कार्डियक अरेस्ट' का गहरा संबंध
डॉक्टर कुशवाहा के मुतबाकि मैराथन दौड़ के दौरान शरीर पर अत्यधिक तनाव होता है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई अज्ञात हृदय रोग (जैसे हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी) हो, तो दौड़ के दौरान बढ़ी हुई हृदय गति उसे ट्रिगर कर देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिनिश लाइन के पास धावक अक्सर 'स्प्रिंट' यानी तेज गति बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जिससे हृदय पर अचानक दबाव बढ़ता है और धड़कन अनियंत्रित होकर बंद हो सकती है।
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आंतरिक चोटों का संदेह
आर्यन की मौत के सटीक कारण का पता अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही चलेगा। कई बार हृदय गति रुकने के अलावा 'पल्मोनरी एम्बोलिज्म' (फेफड़ों की धमनी में थक्का) या आंतरिक रक्तस्राव भी मौत की वजह हो सकते हैं।
मैराथन धावकों में 'साइलेंट' बीमारियां अक्सर जांच के अभाव में छिपी रहती हैं। डॉक्टर भरत रावत द्वारा दी गई त्वरित चिकित्सा सहायता के बावजूद आर्यन का न बचना यह दर्शाता है कि कुछ स्थितियां मेडिकल साइंस की तात्कालिक मदद से भी परे हो सकती हैं।
मैराथन से पहले हेल्थ स्क्रीनिंग है जरूरी
इंदौर की यह घटना एक बड़ी सीख देती है कि किसी भी हाई इंटेंशिटी वाले खेल में भाग लेने से पहले 'कार्डियक स्क्रीनिंग' बेहद जरूरी है। ईसीजी और टीएमटी जैसे टेस्ट छिपे हुए खतरों को उजागर कर सकते हैं।
धावकों को अपने शरीर के संकेतों, जैसे हल्का सीना दर्द या सांस फूलना, को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जान है तो जहान है; खेल और फिटनेस का उद्देश्य जीवन बढ़ाना होना चाहिए, उसे जोखिम में डालना नहीं। इसके साथ ही डॉक्टर रवि के मुताबिक हर 40 के बाद के लोगों को सीटी एंजियोग्राफी करा लेना चाहिए इससे उनके आर्टरीज के ब्लॉकेज के बारे में बारीकी से पता चल जाता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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