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Cervical Cancer: क्या होता है HPV वायरस जिसकी सरकार ने मुफ्त की वैक्सीन? सरल शब्दों में समझें सब कुछ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 25 Feb 2026 02:54 PM IST
सार

Prevention of Cervical Cancer: हमारे देश में महिलाओं की एक बड़ी आबादी सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने 14 वर्ष की आयु की किशोरियों को मुफ्त में एचपीवी (HPV) वैक्सीन लगाने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में उन्हें इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके।

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Cervical Cancer Risk Factors and Govt HPV Vaccination Drive for 14-Year-Old Girls
Free HPV Vaccine - फोटो : Adobe stock

HPV Vaccine For 14 Year Old Girls: भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने 14 साल की किशोरियों के लिए एचपीवी वैक्सीन अभियान शुरू किया है। इस ऐतिहासिक कदम के तहत गार्डासिल-4 वैक्सीन की एक खुराक दी जाएगी, जो सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारणों से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होने वाला घातक रोग है, जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के कारण होता है। 



सरल शब्दों में समझें तो ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक आम वायरल संक्रमण है, जो त्वचा और श्लेष्म झिल्ली को प्रभावित करता है। इसके 200 से अधिक प्रकार होते हैं। सर्वाइकल कैंसर के 99% मामलों के पीछे यही वायरस जिम्मेदार होता है। यह मुख्य रूप से शारीरिक संपर्क के जरिए फैलता है। अगर शरीर की इम्युनिटी इसे खत्म नहीं कर पाती, तो यह वायरस गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव कर उन्हें कैंसर में बदल देता है।

अमेरिका की एक स्टडी के मुताबिक शुरुआती उम्र में टीकाकरण कैंसर के जोखिम को 90% तक कम कर सकता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है, लेकिन राहत की बात यह है कि सही समय पर स्क्रीनिंग और टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। सरकार का यह अभियान किशोरियों को भविष्य की एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या से सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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Cervical Cancer Risk Factors and Govt HPV Vaccination Drive for 14-Year-Old Girls
धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com

किन्हें होता है सर्वाइकल कैंसर का सबसे अधिक खतरा?
एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम उन महिलाओं को होता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती हैं। अगर किसी महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तो जैसे ही वो एचपीवी वायरस के संपर्क में आती है उनमें सर्वाइकल कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

इसके अलावा कम उम्र में विवाह और प्रसव, लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, और धूम्रपान करने वाली महिलाओं में भी इस कैंसर का खतरा अन्य के मुकाबले काफी अधिक पाया गया है।


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Cervical Cancer Risk Factors and Govt HPV Vaccination Drive for 14-Year-Old Girls
Free HPV Vaccine for 14 year old - फोटो : Adobe stock

लक्षण और स्क्रीनिंग की भूमिका
शुरुआती दौर में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसीलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। हालांकि, असामान्य रक्तस्राव, पेल्विक हिस्से में दर्द और शारीरिक संबंध के दौरान तकलीफ महसूस होना इसके संकेत हो सकते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 30 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को नियमित रूप से पैप स्मीयर और HPV टेस्ट करवाना चाहिए ताकि किसी भी बदलाव का समय रहते पता चल सके।


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Cervical Cancer Risk Factors and Govt HPV Vaccination Drive for 14-Year-Old Girls
Free HPV Vaccine for 14 year old Girl - फोटो : Adobe stock

वैक्सीन कैसे करती है सुरक्षा?
गार्डासिल-4 जैसी एचपीवी वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करती है। केंद्र सरकार द्वारा 14 साल की लड़कियों पर ध्यान केंद्रित करने का वैज्ञानिक कारण यह है कि कम उम्र में वैक्सीन सबसे प्रभावी प्रतिक्रिया देती है। अगर संक्रमण होने से पहले ही वैक्सीन की खुराक मिल जाए, तो शरीर में कैंसर पैदा करने वाले स्ट्रेन के खिलाफ मजबूत एंटीबॉडीज बन जाती हैं, जो जीवन भर सुरक्षा प्रदान करती हैं।

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Cervical Cancer Risk Factors and Govt HPV Vaccination Drive for 14-Year-Old Girls
HPV Vaccine - फोटो : Adobe stock

जागरूकता और समय पर कदम
सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। केंद्र सरकार का टीकाकरण अभियान देश की बेटियों के सुरक्षित भविष्य का सबसे बड़ा निवेश है। कई शोधों में बताया गया है स्वच्छता, संतुलित जीवनशैली और समय पर टीकाकरण इस जानलेवा बीमारी को मात देने का सबसे कारगर तरीका है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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