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Health Tips: बच्चे को लग गई है जाती हुई ठंड? डॉक्टर ने बताया जरूर बरतें ये सावधानियां

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 25 Feb 2026 01:13 PM IST
सार

Fever in Toddlers Causes: बदलते मौसम में छोटे बच्चों में बुखार या सर्दी-जुकाम के मामले अक्सर ही देखने को मिलते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है डॉक्टर बताते हैं कि इस मौसम में बच्चों में होने ज्यादातर परेशानियां पेरेंट्स की गलतियों की वजह से होते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

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Tips for Seasonal Flu in Kids know from doctor on Dressing and Hygiene During Spring
छोटे बच्चों को बुखार होना - फोटो : Adobe Stock

Seasonal Flu In Kids: बदलते मौसम में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि बच्चों को 'जाती हुई ठंड' लग गई है। माता-पिता डर के मारे बच्चों को भारी-भरकम कपड़े पहना देते हैं, लेकिन यही सावधानी कभी-कभी बीमारी का कारण बन जाती है। फेमस पीडियाट्रिशियन डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके बताया है कि उनकी ओपीडी में आजकल ऐसे कई बच्चे आ रहे हैं जो बुखार से तप रहे हैं, फिर भी उन्हें पेरेंट्स मोटे ऊनी कपड़े और थर्मल पहनाए हुए हैं।



डॉक्टर के अनुसार, तापमान बढ़ने के साथ ही वातावरण का 'बायो-फ्लोरा' बदलता है और कई नए वायरस एक्टिव हो जाते हैं। शादियों के सीजन में यात्रा और मेलजोल के कारण इंफेक्शन तेजी से फैलता है। अक्सर संक्रमण माता-पिता से ही बच्चों में पहुंचता है। डॉक्टर भारद्वाज का कहना है कि जब तापमान बढ़ रहा हो, तब बच्चों को अत्यधिक कपड़ों में लपेटना उनके शरीर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देता, जिससे उनका चिड़चिड़ापन और बुखार कम होने के बजाय और बढ़ जाता है।

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छोटे बच्चों को बुखार होना - फोटो : Adobe Stock

इंफेक्शन का खतरा और हाइजीन की अनदेखी
डॉक्टर माधवी बताती हैं कि 10 में से 8 मामलों में वायरल इंफेक्शन पहले माता-पिता को होता है और फिर बच्चों को। बड़े अक्सर अपनी इम्यूनिटी के भरोसे सावधानी नहीं बरतते, जिससे बच्चा बीमार पड़ जाता है। इसके अलावा 'ठंड न लग जाए' इस डर से पेरेंट्स बच्चों को नहलाने या हाथ धोने से बचते हैं। हाइजीन में यह कमी इंफेक्शन के फैलने की रफ्तार को और बढ़ा देती है। ध्यान रखें जुकाम-खांसी और उल्टी-दस्त वाले वायरस इस मौसम में सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं।


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छोटे बच्चों को बुखार होना - फोटो : Adobe Stock

बुखार में भारी कपड़ों का जोखिम
इन दिनों तापमान अब 20-25 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा है, फिर भी लोग बच्चों को थर्मल पहना रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार, एक्टिव बच्चों के शरीर में पहले ही बहुत हीट पैदा होती है। जब हम उन्हें मोटे कपड़े पहनाते हैं, तो उनके सिर से पसीना निकलता है और हाथ-पैर गर्म हो जाते हैं। बुखार की स्थिति में सबसे पहले बच्चे के कपड़े हल्के करें और थर्मल हटा दें। अक्सर एक-दो लेयर कम करने मात्र से ही बच्चे का चिड़चिड़ापन और तापमान बिना दवाई के ठीक हो जाता है।


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छोटे बच्चों को बुखार होना - फोटो : Adobe Stock

हीट रैश और कपड़ों का सही चुनाव
गर्मी और ऊनी कपड़ों की वजह से बच्चों में 'हीट रैश' यानी घमौरियों की समस्या बढ़ जाती है। डॉक्टर भारद्वाज सलाह देती हैं कि अब ऊनी कपड़े और थर्मल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय कॉटन (सूती) के कपड़ों की लेयरिंग का इस्तेमाल करें। अगर तापमान में गिरावट महसूस हो, तो सूती कपड़ों की एक से ज्यादा परतें पहनाना ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो सकता है। इससे शरीर की त्वचा सांस ले पाती है और पसीना जमा नहीं होता।

 

 

 

 

 

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बच्चों की सेहत - फोटो : Freepik.com

कितने कपड़े पहनाना है सही?
अक्सर माता-पिता असमंजस में रहते हैं कि बच्चे को कितने कपड़े पहनाएं। इसके लिए डॉक्टर ने एक सरल नियम बताया है। डॉक्टर के अनुसार, "जितने कपड़े मां ने पहने हैं, बच्चे को उससे सिर्फ एक लेयर एक्स्ट्रा पहनाएं।" इस नियम का पालन करने से बच्चा न तो बीमार पड़ेगा और न ही उसे ओवरहीटिंग की समस्या होगी। इन सब के बावजूद भी अगर बच्चे को बुखार है तो आप अपने नजदीकी डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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