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Snoring In Kids: छोटे बच्चों का खर्राटा लेना सामान्य नहीं, डॉक्टर ने बताया इसके पीछे के मूल कारण

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 24 Feb 2026 05:36 PM IST
सार

Snoring In Children Causes: बच्चों या बड़ों किसी का भी खर्राटा लेना समान्य नहीं होता है। खर्राटा एक ऐसी समस्या है जो आपकी नींद के साथ आपकी पूरी दिनचर्या को प्रभावित करता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में डॉक्टर से जानते हैं।

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Why Children Snore Pediatrician Explains Causes Like Adenoids and Obesity
बच्चों का खर्राटा लेने की परेशानी - फोटो : Adobe Stock

Child Obesity And Snoring Link: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि माता-पिता बच्चों के खर्राटे लेने को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह एक स्वास्थ्य समस्या है। इसी विषय पर पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कई बार माता-पिता इसे जेनेटिक समस्या मान लेते हैं, जैसे कि "इसके पिता भी खर्राटे लेते हैं, इसलिए यह भी ले रहा है।" 



डॉक्टर ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक 35 किलो वजन का बच्चा, जो काफी मोटा था, उसके माता-पिता उसे 'स्वस्थ' समझ रहे थे और उसके खर्राटों को सामान्य मान रहे थे। डॉक्टर भारद्वाज के अनुसार, खर्राटे लेना और वजन का बढ़ना आपस में गहराई से जुड़े हो सकते हैं। अगर बच्चा नियमित रूप से खर्राटे लेता है, तो इसका सीधा मतलब है कि उसके श्वसन मार्ग में कोई रुकावट है, जिसे समय रहते पहचानना और इलाज करना जरूरी है।

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खर्राटे लेना - फोटो : Adobe Stock

क्या है खर्राटे का साइंस?
डॉक्टर माधवी के अनुसार नाक से लेकर फेफड़ों तक जाने वाले हवा के रास्ते में जब भी कोई बाधा आती है, तो हवा उसके विरुद्ध टकराती है और ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे हम खर्राटा कहते हैं। सर्दी-जुकाम के दौरान म्यूकस (बलगम) जमा होने से 2-3 हफ्ते नाक बजना सामान्य है, क्योंकि बच्चे इसे बाहर नहीं निकाल पाते। लेकिन अगर बच्चा स्वस्थ होने पर भी रोज खर्राटे लेता है, तो यह 'टॉन्सिल्स' या श्वसन तंत्र के 'सॉफ्ट टिश्यू मास' में वृद्धि का संकेत हो सकता है।

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बच्चों का खर्राटा लेने की परेशानी - फोटो : Adobe Stock

खर्राटे का असर
जब बच्चा खर्राटे लेता है, तो इसका मतलब है कि उसे सांस लेने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। इससे बच्चे की रात की नींद पूरी नहीं होती, जिसका सीधा असर उसकी दिनचर्या पर पड़ता है। डॉक्टर ने बताया कि ऐसे बच्चे दिनभर चिड़चिड़े रहते हैं, उन्हें स्कूल में पढ़ाई के दौरान ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है और खेल-कूद में भी वे जल्दी थक जाते हैं। नींद की कमी उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है।

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बच्चों का खर्राटा लेने की परेशानी - फोटो : Adobe Stock

बच्चों में खर्राटों के मुख्य कारण और मोटापे का संबंध
डॉक्टर भारद्वाज ने छोटे बच्चों में खर्राटों के कुछ सामान्य मेडिकल कारण बताए हैं, जिनमें एलर्जिक राइनाइटिस, एडिनोइड्स और टॉन्सिल हाइपरट्रॉफी प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, कुछ प्रतिशत बच्चों में मोटापा भी खर्राटों की एक बड़ी वजह बनता है। शरीर की अतिरिक्त चर्बी श्वसन मार्ग पर दबाव डालती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए बच्चे के वजन को नियंत्रित रखना भी खर्राटों के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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बच्चों का खर्राटा लेने की परेशानी - फोटो : Adobe Stock

समय पर इलाज है संभव
डॉक्टर माधवी भारद्वाज का कहना है कि खर्राटों की समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने डॉक्टर से मिलें और बच्चे के सभी लक्षणों जैसे रात में सांस लेने का तरीका, दिन की सुस्ती और वजन के बारे में खुलकर चर्चा करें। सही समय पर डायग्नोसिस होने से बच्चा न केवल चैन की नींद सो पाएगा, बल्कि उसकी एकाग्रता और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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