राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले एक महीने से वायु प्रदूषण का व्यापक प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ हफ्तों से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खराब और बेहद खराब स्तर पर बना हुआ है, जिसे सेहत के लिए गंभीर माना जा रहा है। अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के कारण ओपीडी में सांस की समस्या, सिरदर्द की शिकायत वाले मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ वायु प्रदूषण को दिल, फेफड़े की बीमारियों से पहले से पीड़ित लोगों के लिए और भी खतरनाक बताते हैं।
Air Pollution: जीन को भी नुकसान पहुंचा रही है प्रदूषित हवा, आने वाली पीढ़ियां भी खतरे में
- प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर एक अन्य अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि प्रदूषण का असर आने वाली पीढ़ियों की सेहत के लिए भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है, यानी इसके दुष्प्रभाव दीर्घकालिक हो सकते हैं।
वायु प्रदूषण के कारण होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज में प्रकाशित रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषित हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण) धातुओं का धूल और मिट्टी मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा के संपर्क में रहने वाले लोगों के जीन में भी समस्या आने के परिणाम मिले हैं।
प्रदूषित हवा, कुछ जीनों को अनुचित रूप से सक्रिय जबकि कुछ को निष्क्रिय कर सकती है, जिसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है।
डीएनए पर भी हो रहा प्रदूषण का असर
यूनिर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को समझने के लिए प्रतिभागियों के जीन में होने वाले बदलावों को लेकर अध्ययन किया।
अध्ययन के लिए प्रतिभागियों को एक पॉलीकार्बोनेट से घिरे बूथ में रखा गया, जो लगभग एक सामान्य बाथरूम के आकार का था। शोधकर्ताओं ने जांच के दौरान ये समझने की कोशिश की कि प्रदूषण के संपर्क से उस रासायनिक "कोटिंग" पर क्या प्रभाव पड़ता है जो किसी व्यक्ति के डीएनए से जुड़ी होती है।
इसमें पाया गया कि प्रदूषित हवा कार्बन-हाइड्रोजन कोटिंग (मिथाइलेशन) जीन को निष्क्रिय या मंद कर सकती है, जिससे वह प्रोटीन का उत्पादन नहीं कर पाता।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन में पाया गया कि डीजल के धुएं से लोगों के डीएनए में लगभग 2,800 अलग-अलग बिंदुओं पर मिथाइलेशन में बदलाव आया, जिससे लगभग 400 जीन प्रभावित हुए। कुछ जगहों पर इससे मिथाइलेशन बढ़ा और कुछ मामलों में इससे मिथाइलेशन कम हुआ। जीन अभिव्यक्ति में ये बदलाव स्वास्थ्य पर कैसे असर डालते हैं, यह शोधकर्ताओं के लिए अगला कदम है। लेकिन यह अध्ययन दर्शाता है कि वायु प्रदूषण के प्रति हमारी आनुवंशिक मशीनरी कितनी कमजोर हो सकती है।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्रिस कार्लस्टन कहते हैं, आमतौर पर जब हम वायु प्रदूषण के प्रभावों को देखते हैं, तो हम उन चीजों को मापते हैं जो चिकित्सकीय रूप से स्पष्ट होती हैं जैसे रक्तचाप, हृदय गति। इस अध्ययन में हमने पाया कि प्रदूषण के कारण जीन से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं, जिसका असर संभावित रूप से आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है।
प्रदूषण और इसके खतरे
अध्ययनकर्ता कहते हैं, वायु प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अगर इसकी रोकथाम के लिए व्यापक उपाय न किए गए तो भविष्य में इसके व्यापक दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। बढ़ता प्रदूषण जीन को भी प्रभावित करता है ये निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है।
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स्रोत
Air pollution and DNA methylation: effects of exposure in humans
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