High Blood Sugar Effects on Eyes: डायबिटीज यानी मधुमेह आज एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है, लेकिन सबसे गंभीर प्रहार यह हमारी आंखों पर करती है। 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' एक ऐसी स्थिति है जिसे अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी दर्द के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चुरा लेती है। जब खून में शुगर का लेवल लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो यह रेटिना (आंख के पिछले हिस्से) की सूक्ष्म ब्लड वेसेल्स को क्षतिग्रस्त कर देता है।
Diabetes Retinopathy: डायबिटीज के किन मरीजों में होता है आंखों की रोशनी जाने का खतरा, यहां जानें
- Diabetic Retinopathy: आंखों से दिखाई न देना अपने आप में एक बहुत बड़ा अभिशाप है।
- मगर बहुत कम लोगों को मालूम है कि डायबिटीज के मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का जोखिम बहुत अधिक होता है।
- इस समस्या को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
क्या होते हैं डायबिटीज रेटिनोपैथी के लक्षण?
डायबिटीज के कारण आंखों के अंदर होने वाले बदलाव काफी जटिल होते हैं, जो दृष्टि को बाधित करते हैं-
- हाई शुगर के कारण रेटिना की नसें कमजोर होकर खून या तरल पदार्थ का रिसाव करने लगती हैं।
- रेटिना के मध्य भाग (मैकुला) में सूजन आ जाती है, जिससे बारीक चीजें देखना मुश्किल हो जाता है।
- शरीर डैमेज नसों की जगह नई नसें बनाने की कोशिश करता है, जो बहुत कमजोर होती हैं और ब्लीडिंग का कारण बनती हैं।
- नजर में काले धब्बे (फ्लोटर्स) दिखना या अचानक दृष्टि का कम हो जाना।
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यह जोखिम किन मरीजों में सबसे ज्यादा है?
हर डायबिटीज रोगी को रेटिनोपैथी नहीं होती, लेकिन कुछ कारक इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं:
- जो लोग 10-15 साल से अधिक समय से शुगर के मरीज हैं, उनमें खतरा सबसे अधिक होता है।
- जिनका HbA1c लेवल लगातार अधिक रहता है, उनकी आंखों की नसें जल्दी डैमेज होती हैं।
- ये दोनों स्थितियां आंखों की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
- गर्भकालीन मधुमेह या पहले से शुगर होने पर गर्भावस्था के दौरान रेटिनोपैथी तेजी से बढ़ सकती है।
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अकर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम काफी गंभीर और स्थायी हो सकते हैं-
- रेटिना के पूरी तरह डैमेज होने या डिटैच होने पर रोशनी वापस लाना असंभव हो जाता है।
- आंखों के अंदर दबाव बढ़ने से काला मोतियाबिंद हो सकता है, जो ऑप्टिक नर्व को नष्ट कर देता है।
- बाद के चरणों में लेजर सर्जरी या आंखों में महंगे इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है जो आर्थिक बोझ बढ़ाते हैं।
- दृष्टि खोने से व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता खो देता है और दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है।
डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है 'निवारण'। डायबिटीज के मरीजों को साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच करानी चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक शुगर कंट्रोल करना केवल अंगों को बचाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को देखने की क्षमता को बचाए रखने के लिए जरूरी है। डायबिटिक रेटिनोपैथी को हल्के में न लें, वर्तमान का एक छोटा सा चेकअप आपके भविष्य को रोशन रख सकता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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