डॉक्टर मुकुल कुमार सिंह
एनएमसीएच, पटना
कोरोना वायरस की दूसरी लहर की शुरुआत से ही लोगों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वायरस की दूसरी लहर में लक्षणों में बदलाव के साथ लोगों को सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में संक्रमण की समस्या भी हो रही है। इसके अलावा रोगियों में कम होते ऑक्सीजन के मामले सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाले हैं। डर आलम यह है कि हल्के से बुखार होने पर भी लोग अस्पतालों का तरफ भाग रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इस परिस्थिति में आपको बिल्कुल भी पैनिक नहीं होना चाहिए, हर किसी को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, इसलिए सबसे पहले लक्षणों को पहचानिए और स्थिति को देखते हुए ही अस्पतालों में भर्ती होने के बारे में सोचिए।
आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानते हैं कि आइसोलेशन में रह रहे कोरोना के मरीजों को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए साथ ही कौन से लक्षण दिखने पर उन्हें अस्पताल में जाने की जरूरत हो सकती है?
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लक्षणों और स्वास्थ्य की करें निगरानी
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर कोरोना जागरूकता कार्यक्रम के दौरान एनएमसीएच पटना के डॉक्टर मुकुल कुमार सिंह कहते हैं कि देश में इस समय सामान्य फ्लू, टायफाइड और मलेरिया का भी दौर चल रहा है, ऐसे में लोगों की थोड़ी सी तबियत बिगड़ते ही उन्हें कोरोना का डर सताने लगता है। अस्पताल पहले से ही भरे हुए हैं, ऐसे में सबसे पहले आपको अपने लक्षणों और स्वास्थ्य की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। आइसोलेशन में कोरोना के रोगी किसी भी तरह की लापरवाही बरतने की गलती न करें।
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लोगों को दस्त और उल्टी की भी हो रही है शिकायत
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किन लक्षणों पर सावधान होने की जरूरत
डॉक्टर मुकुल कहते हैं कि फ्लू और कोरोना में अंतर ऐसे समझा जा सकता है कि फ्लू और सामान्य सर्दी-खांसी में लोगों को स्वाद और गंध जाने की दिक्कत नहीं होती है, वहीं यदि आपको कोरोना है तो फ्लू वाले लक्षणों के साथ स्वाद और गंध न आने की समस्या हो सकती है। इसके अलवा कोविड के नए स्ट्रेनों के कारण लोगों को दस्त और उल्टी होने की भी शिकायतें मिल रही हैं। जिन लोगों में ये सभी लक्षण चार से पांच दिनों तक बना रहता है उन्हें टेस्ट कराने के बाद आइसोलेट होकर लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए।
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ऑक्सीजन सेचुरेशन की मॉनीटरिंग करते रहें
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कब तक अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है?
डॉक्टर मुकुल कहते हैं कि घर पर ही कोरोना के जो रोगी आइसोलेशन में रह रहें हैं उन्हें अपने अन्य लक्षणों के साथ ऑक्सीजन के सेचुरेशन पर भी नजर बनाए रखना चाहिए। यदि आपमें कोरोना के लक्षण हैं लेकिन सेचुरेशन 95 से ऊपर का है तो ऐसे में आपको अस्पताल जाने की कोई जरूरत नहीं है। घर पर ही आप दवाइयों और कोरोना रोकथान के उपायों को प्रयोग में लाकर ठीक हो सकते हैं।
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मास्क है बचाव की प्रभावी तरीका
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कोरोना के रोगी घर में भी पहनें मास्क
डॉक्टर मुकुल कहते हैं कि आइसोलेशन में रह रहे रोगियों को घर में भी मास्क और दस्ताने पहन कर रखना चाहिए। आपको अपने साथ घर के दूसरे लोगों का भी ख्याल रखना है ऐसे में अन्य लोगों के इस्तेमाल वाली किसी चीज को छूने से पहले दस्ताने जरूर पहन लें।