Kam Sone ke Side Effects: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते चलन के दौर लोग अक्सर नींद से समझौता कर लेते हैं। अक्सर देखने को मिलता है कि लोग अन्य गैर जरूरी चीजों पर समय देते हैं और उसके बदले में अपने सोने का समय घटा देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक कम सोने से न सिर्फ थकान होता है, बल्कि शरीर में अन्य भी कई गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। अक्सर जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का 'ग्लाइम्फैटिक सिस्टम' शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल पाता है।
Sleep Disorder Effect: कम सोने से क्या होता है? कम से कम कितने घंटे की नींद लेना है जरूरी
Importance of Deep Sleep: कुछ लोगों को कम सोने की आदत होती है, ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मगर ध्यान देने वाली बात यह है कि कम सोने के कई नुकसान होते हैं जिसके बारे में बहुत कम लोग समझने की कोशिश करते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
कम सोने का हमारे मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
नींद की कमी मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' को सुस्त कर देती है, बता दें कि दिमाग का ये हिस्सा तर्क और सेल्फ कंट्रोल में बड़ी भूमिका निभाता है। इससे व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त महसूस करता है। शोध बताते हैं कि लगातार कम सोने से अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि मस्तिष्क में 'बीटा-एमाइलॉयड' नामक हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगता है। बता दें कि यह आपकी याददाश्त को स्थायी रूप से कमजोर कर सकता है।
ये भी पढ़ें- Health Tips: जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी पीने की आदत से परेशान हैं? आदत सुधारने के लिए अपनाएं ये उपाय
नींद से मोटापे और मेटाबॉलिज्म का क्या संबंध है?
नींद की कमी शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाले दो प्रमुख हार्मोन लेप्टिन और घ्रेलिन के संतुलन को बिगाड़ देती है। घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हमें देर रात जंक फूड और मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। इसके अलावा, कम नींद शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम कर देती है, जिससे वजन बढ़ना और डायबिटीज का खतरा पैदा हो जाता है।
ये भी पढ़ें- Diabetes: आपको कभी टाइप-2 डायबिटीज होगा या नहीं? लक्षण दिखने से कई साल पहले ही चल जाएगा इसका पता
उम्र के हिसाब से कम से कम कितने घंटे की नींद लेना है जरूरी?
नींद की जरूरत उम्र के साथ बदलती रहती है। एक स्वस्थ वयस्क (18-64 वर्ष) के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है। किशोरों को 8-10 घंटे और स्कूल जाने वाले बच्चों को 9-11 घंटे की नींद लेनी चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि महत्वपूर्ण केवल घंटों की संख्या नहीं, बल्कि नींद की 'गुणवत्ता' भी है। अगर आप 8 घंटे सोकर भी सुबह थकान महसूस करते हैं, तो आपकी नींद गहरी नहीं है।
बेहतर नींद के लिए क्या करें?
नींद की कमी को नजरअंदाज करना अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। शरीर को रिचार्ज करने के लिए आराम करना बहुत जरूरी है। सोने से एक घंटा पहले मोबाइल से दूरी बनाएं, कमरे में अंधेरा रखें और कैफीन के सेवन से बचें। ध्यान रखें एक अच्छी नींद न निरोगी रखेगी बल्की आपके उम्र को भी बढ़ा देगी।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।