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Health Tips: महिलाओं की सेहत के लिए खतरे की घंटी, आपकी ये छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबतों का कारण

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 27 Jan 2026 04:08 PM IST
सार

नींद पूरी न होना या देर रात तक जागना महिलाओं की सेहत पर गहरा असर डाल सकता है। लगातार खराब स्लीप पैटर्न से हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है, जिससे पीरियड्स अनियमित होना, पीसीओएस का खतरा बढ़ना और फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है।

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महिलाओं को होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Freepik.com

अच्छी सेहत पाना मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत भी है और चुनौती भी। हालांकि दुनियाभर में जिस तेजी से डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर हो या डायबिटीज-किडनी की बीमारियां, बढ़ती जा रही हैं, इसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। जब बात महिलाओं की सेहत की आती है तो ये चिंता और भी बढ़ जाती है।



मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि महिलाओं की सेहत लगातार चुनौतियों से जूझ रही है। करियर, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पातीं। इसके अलावा खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों में और बढ़ते मानसिक तनाव ने समस्याों को और भी गंभीर बना दिया है। पर्याप्त पोषण की कमी महिलाओं में एनीमिया का खतरा बढ़ाती जा रही है, भारत में 57% से अधिक महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं।

इन समस्याओं के अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक छोटी सी लापरवाही को लेकर भी सभी महिलाओं को सावधान करते हैं, जो धीरे-धीरे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को खराब करती जा रही है।

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नींद पूरी न होने की समस्या - फोटो : Freepik.com

नींद की कमी महिलाओं की सेहत का दुश्मन

महिलाओं में नींद की समस्या या रात में देर से सोने की आदत को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए बहुत हानिकारक मानते हैं। नींद की कमी एक साइलेंट खतरे के रूप में उभर रही है। देर रात तक जागना, मोबाइल और स्क्रीन टाइम बढ़ना और स्ट्रेस के कारण महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पाती।

अध्ययनों से पता चलता है कि रात में 8 घंटे से कम की नींद हार्मोनल असंतुलन के साथ महिलाओं की शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों को प्रभावित कर सकती है। कम उम्र में ही  पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) मोटापा, डायबिटीज, थायरॉइड और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के लिए सीधे तौर पर नींद विकारों या देर से सोने की आदत को जिम्मेदार पाया गया है।

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पीसीओएस और प्रजनन से संबंधित समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

हार्मोनल असंतुलन और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं

नींद पूरी न होना महिलाओं के हार्मोन सिस्टम को सबसे पहले प्रभावित करता है। नींद के दौरान शरीर एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और मेलाटोनिन जैसे जरूरी हार्मोन को संतुलत करता है। 

  • जब महिलाएं देर रात तक जागती हैं या 7-8 घंटे की नींद नहीं ले पातीं, तो इससे हार्मोनल साइकिल बिगड़ जाती है। 
  • इसका सीधा असर पीरियड्स पर पड़ता है, जिससे अनियमित माहवारी, ज्यादा दर्द, हैवी ब्लीडिंग या पीरियड्स का देर से आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • लगातार नींद की कमी पीसीओएस के खतरे को भी बढ़ाती है, जिसके कारण प्रजनन स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लग जाता है। इससे गर्भधारण में परेशानी और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं।
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महिलाओं में वजन बढ़ने की समस्या का खतरा - फोटो : Adobe stock

मेटाबॉलिज्म की समस्या

नींद कम आने या फिर देर रात से सोने की आदत मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। इसका सीधा असर वजन पर पड़ता है। 

  • नींद पूरी न होने के कारण भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन लेप्टिन और घ्रेलिन में असंतुलन हो जाता है।
  • इस वजह से भूख ज्यादा लगती है और हाई-कैलोरी, मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है, जो बढ़ाने बढ़ाने वाले माने जाते हैं।
  • जो महिलाएं रोजाना 6 घंटे से कम सोती हैं, उनमें मोटापा और पेट की चर्बी बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है। 
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तनाव और स्ट्रेस का खतरा - फोटो : Freepik.com

मेंटल हेल्थ की भी हो सकती है दिक्कत

देर रात तक जागना और नींद की कमी महिलाओं की मानसिक सेहत के लिए भी बहुत नुकसानदायक मानी जाती है। 

  • नींद के दौरान दिमाग खुद को रिलैक्स करता है और स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को कंट्रोल करता है। नींद पूरी न होने पर कोर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है।
  • बढ़ा हुआ कोर्टिसोल एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स और डिप्रेशन का कारण बन सकता है। 
  • महिलाएं लगातार नींद की कमी से जूझती हैं, उनमें डिप्रेशन का खतरा लगभग दोगुना हो सकता है। 
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