क्या आपका बच्चा भी अक्सर मोबाइल फोन से चिपका रहता है, बिना मोबाइल के थोड़ी देर भी नहीं रह पाता है? ये आदत इतनी खतरनाक हो सकती है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी।
Health Alert: मोबाइल से चिपका रहता है आपका भी बच्चा तो हो जाएं अलर्ट, ये खतरनाक बीमारियां दे रही हैं दस्तक
बचपन वो समय होता है जब दिमाग तेजी से विकसित हो रहा होता है, शरीर मजबूत बनता है और सामाजिक कौशल सीखता है। लेकिन जब बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहता है तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं।
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बच्चों के लिए नुकसानदायक है ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बचपन वह समय होता है जब दिमाग तेजी से विकसित हो रहा होता है, शरीर मजबूत बनता है और सामाजिक कौशल सीखता है। लेकिन जब बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहते हैं, तो उनकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और लोगों से मेल-जोल बनाने का कौशल विकसित नहीं हो पाता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है।
आइए ज्यादा मोबाइल चलाने वाले बच्चों में होने वाली समस्याओं के बारे में जान लेते हैं।
कमजोर हो जाती हैं आंखें
लंबे समय तक मोबाइल देखने का सबसे ज्यादा असर आंखों पर पड़ता है।
- लगातार स्क्रीन पर देखने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
- छोटे बच्चों की आंखें पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, इसलिए वे स्क्रीन की ब्लू लाइट के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
- कई मामलों में बच्चों को कम उम्र में ही चश्मा लगाना पड़ जाता है।
दिमाग का रुक जाता है विकास
बचपन दिमाग के विकास का भी समय होता है, ज्यादा मोबाइल देखते रहने का दिमाग की सेहत पर भी असर देखा जा सकता है।
- मोबाइल पर लगातार वीडियो देखने या गेम खेलने से बच्चों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो सकती है।
- वे जल्दी बोर होने लगते हैं और पढ़ाई में मन नहीं लगता।
- अध्ययनों में पाया गया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के आईक्यू और भाषा विकास पर भी असर डाल सकता है।
इन खतरों को लेकर भी रहिए सावधान
- मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल आंखों और दिमाग के साथ बच्चों की सेहत को और भी कई तरह से प्रभावित करने वाला हो सकता है।
- मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की नींद पर गहरा असर डालता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम कर देती है, जिससे नींद की दिक्कत बढ़ जाती है।
- जब बच्चे ज्यादा समय मोबाइल पर बिताते हैं, तो उनका खेलकूद में बीतने वाला समय कम हो जाता है। इससे मोटापा बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
- मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के व्यवहार और सामाजिक जीवन पर भी असर डालता है। ऐसे बच्चे अकेले रहना पसंद करने लगते हैं और दूसरों के साथ घुलने-मिलने में परेशानी महसूस करते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस, न्यूज एजेंसी पीटीआई इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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