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Health Tips: इयरफोन का अधिक इस्तेमाल बना सकता है बहरा, जान लें हेडफोन लगाने का ये नियम

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sun, 15 Feb 2026 08:20 PM IST
सार

How Headphones Cause Hearing Loss: आज के समय अधिकतर लोग इयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। मगर इसका प्रयोग करते समय हमेशा कुछ नियमों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, अगर ऐसा न हो बहरे होने की क्षमता भी बढ़ जाती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Excessive Use of Earphones Can Cause Deafness: Health Risks and the 60/60 Rule for Safe Listening
इयरफोन - फोटो : Freepik.com

Side Effects Of Wearing Earphones: आज की डिजिटल जीवनशैली में इयरफोन और हेडफोन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। चाहे ऑफिस की मीटिंग हो, ऑनलाइन क्लास या फिर सफर के दौरान संगीत सुनना हो हम घंटों इन ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपको हमेशा के लिए बहरा बना सकती है? 



चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इयरफोन से निकलने वाली तेज आवाज सीधे हमारे कान के पर्दों और आंतरिक कान की नाजुक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। जब हम 85 डेसिबल से अधिक की आवाज को लंबे समय तक सुनते हैं, तो ये कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसे 'नॉइज-इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस' कहा जाता है। 

चौंकाने वाली बात यह है कि बहरापन अचानक नहीं आता, बल्कि इसकी शुरुआत कान में भारीपन या सीटी जैसी आवाज सुनाई देने से होती है। अगर समय रहते हेडफोन के इस्तेमाल के नियमों को नहीं समझा गया, तो 30 से 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते आप गंभीर श्रवण दोष के शिकार हो सकते हैं।

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Excessive Use of Earphones Can Cause Deafness: Health Risks and the 60/60 Rule for Safe Listening
इयरफोन - फोटो : Freepik.com

कानों पर कैसे होता है सीधा हमला?
इयरफोन सीधे कान की नली के अंदर फिट होते हैं, जिससे ध्वनि तरंगों और कान के पर्दे के बीच की दूरी न्यूनतम हो जाती है। तेज आवाज का दबाव कान के अंदर मौजूद सूक्ष्म तरल पदार्थ को तेजी से हिलाता है, जो सुनने वाली नसों को सुन्न कर देता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर कान की नसें कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति को सामान्य आवाजें भी सुनाई देना बंद हो जाती हैं।


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Excessive Use of Earphones Can Cause Deafness: Health Risks and the 60/60 Rule for Safe Listening
इयरफोन - फोटो : Freepik.com

क्या है हेडफोन लगाने का '60/60 नियम'?
डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कानों की सुरक्षा के लिए '60/60 नियम' का पालन करने की सलाह दी है। इस नियम के अनुसार, आपको अपने डिवाइस की आवाज को कुल वॉल्यूम के 60 प्रतिशत से अधिक नहीं रखना चाहिए। साथ ही दिन भर में लगातार 60 मिनट से ज्यादा इयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हर एक घंटे के बाद कानों को कम से कम 10 से 15 मिनट का विश्राम देना बहुत जरूरी है ताकि कान की कोशिकाएं रिकवर हो सकें।


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Excessive Use of Earphones Can Cause Deafness: Health Risks and the 60/60 Rule for Safe Listening
इयरफोन - फोटो : Freepik.com

इयरफोन बनाम हेडफोन: क्या है बेहतर?
सेहत के नजरिए से 'ओवर-द-इयर' हेडफोन, इयरबड्स की तुलना में थोड़े बेहतर माने जाते हैं। इयरबड्स सीधे कान के अंदर जाकर हवा का रास्ता बंद कर देते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ता है। ओवर-द-इयर हेडफोन कान के पर्दे से थोड़ी दूरी पर होते हैं और बाहर के शोर को बेहतर तरीके से रोकते हैं, जिससे हमें वॉल्यूम बहुत ज्यादा बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, नियम दोनों पर समान रूप से लागू होते हैं।

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इयरफोन - फोटो : Freepik.com

संकेतों को न करें नजरअंदाज
अगर आपको कान में झनझनाहट, दर्द या किसी से बात करते समय आवाजें साफ सुनाई न देने जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत इयरफोन का लगाना छोड़ दें और ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें। ध्यान रखें, सुनने की शक्ति एक बार चली गई तो इसे वापस पाना लगभग असंभव होता है। कानों को थोड़ा आराम दें और शोर-शराबे वाली इस दुनिया में अपनी 'सुनने की अनमोल शक्ति' को सुरक्षित रखें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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