अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए हर महीने आप भी ब्यूटी पार्लर जरूर जाती होंगी। पार्लर में आइब्रो प्लकिंग और थ्रेडिंग सबसे आम प्रक्रिया है, पर कहीं इससे आपकी लिवर के लिए दिक्कतें न बढ़ जाए?
Health Alert: आईब्रो ठीक कराने जाती हैं पार्लर तो हो जाएं सावधान, डैमेज हो सकता है आपका लिवर
पार्लर में आईब्रो ठीक कराने जाती हैं तो थोड़ी सी असावधानी जानलेवा हेपेटाइटिस संक्रमण का कारण बन सकती है। इससे लिवर में सूजन और फेलियर होने तक का खतरा बढ़ जाता है। पर ये दिक्कत होती क्यों है, आइए इस बारे में विस्तार से समझ लेते हैं।
थ्रेडिंग के धागे से फैल सकता है हेपेटाइटिस संक्रमण
आइब्रो थ्रेडिंग और लिवर में इंफेक्शन का ऐसा ही मामला पिछले साल काफी सुर्खियों में रहा था। इसमें 28 साल की एक महिला को हेपेटाइटिस हो गया था। डॉक्टरों ने जब इसके कारणों का पता लगाने की कोशिश की तो सामने आया कि वह एक ब्यूटी पार्लर में अपनी आइब्रो बनवाने गई थी, वहीं से महिला को हेपेटाइटिस का संक्रमण हुआ। संभवत: जिस धागे से महिला की थ्रेडिंग बनाई गई थी, उसी धागे से पहले किसी ऐसी महिला की थ्रेडिंग बनाई गई थी जिसे हेपेटाइटिस था।
गौरतलब है कि हेपेटाइटिस लिवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाला संक्रमण है। ये संक्रमित व्यक्ति के शरीर के फ्लूइड (जैसे खून, वार्य, लार) के संपर्क में आने से फैलता है।
धागे या ब्लेड का दोबारा इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक
रिपोर्ट में सामने आया था कि कुछ पार्लरों में आइब्रो बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले धागे को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।
- साफ-सफाई का ध्यान न रखना, एक ही धागे या ब्लेड का दोबारा इस्तेमाल या संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल के संपर्क में आने से हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
- इससे लिवर संक्रमण का तो डर होता है ही साथ ही एचआईवी संक्रमण भी फैल सकता है।
- अगर थ्रेडिंग का धागा इस्तेमाल करते समय संक्रमित के खून उसमें लग जाता है और दोबारा उसी धागे का इस्तेमाल किसी स्वस्थ व्यक्ति के लिए किया जाता है तो इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
हेपेटाइटिस और इसके संक्रमण का खतरा
गौरतलब है कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार (ए,बी, सी, डी और ई) का होता है।
- हेपेटाइटिस ए और ई मुख्यरूप से दूषित भोजन और पानी से फैलता है।
- हेपेटाइटिस बी, सी और डी दूषित भोजन और पानी से नहीं, ब्लकि शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है।
यदि सैलून में इस्तेमाल की जाने वाली सुई, पिन, ब्लेड या धागे का दोबारा या फिर बिना ठीक से सेनेटाइज किए इस्तेमाल किया जाता है तो इससे संक्रमण का जोखिम रहता है। विशेष रूप से हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे सिरोसिस या लिवर कैंसर तक की स्थिति बन सकती है। इसलिए ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते समय सावधानी बेहद जरूरी है।
फिर सैलून या ब्यूटी पार्लर में क्या सावधानी बरतें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हेपेटाइटिस बी हो या एचआईवी का संक्रमण, इनसे बचने के लिए सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि सैलून या ब्यूटी पार्लर में इस्तेमाल होने वाले उपकरण एकदम नए हैं या फिर सही से साफ किए गए हैं।
- डिस्पोजेबल धागे, तैलिए और ग्लव्स का उपयोग संक्रमण के जोखिम को कम करता है।
- यदि स्किन पर कट, रैशेज या पिंपल हो तो थ्रेडिंग न कराएं क्योंकि इसके कट से वायरस प्रवेश कर सकता है।
- प्रक्रिया के दौरान यदि खून निकलता है तो तुरंत एंटीसेप्टिक से साफ कराएं।
- इसके अलावा, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण उपलब्ध है, इसलिए वैक्सीनेशन करवाना सुरक्षा का मजबूत तरीका है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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