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Health Alert: आईब्रो ठीक कराने जाती हैं पार्लर तो हो जाएं सावधान, डैमेज हो सकता है आपका लिवर

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 20 Mar 2026 01:19 PM IST
सार

पार्लर में आईब्रो ठीक कराने जाती हैं तो थोड़ी सी असावधानी जानलेवा हेपेटाइटिस संक्रमण का कारण बन सकती है। इससे लिवर में सूजन और फेलियर होने तक का खतरा बढ़ जाता है। पर ये दिक्कत होती क्यों है, आइए इस बारे में विस्तार से समझ लेते हैं।

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Eyebrow plucking and threading linked to risk of hepatitis liver infection what precautions should be taken
पार्लर से फैल सकता है लिवर इंफेक्शन - फोटो : Amarujala.com

अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए हर महीने आप भी ब्यूटी पार्लर जरूर जाती होंगी। पार्लर में आइब्रो प्लकिंग और थ्रेडिंग सबसे आम प्रक्रिया है, पर कहीं इससे आपकी लिवर के लिए दिक्कतें न बढ़ जाए?



जी हां, स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, ब्यूटी पार्लर और सैलून में बरती गई लापरवाही आपकी सेहत के लिए काफी भारी पड़ सकती है। इससे लिवर संक्रमण का खतरा और लिवर फेलियर तक का खतरा भी बढ़ जाता है। ब्यूटी प्रक्रियाओं के दौरान अगर हाइजीन में जरा सी भी चूक हुई तो ये आपके लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बन सकता है।

हाल के वर्षों ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं जिसमें लिवर संक्रमण होने की असली वजह का पता लगाया गया तो पता चला कि पार्लर और सैलून की लापरवाही ने इस बड़ी समस्या का जन्म दिया है। अब आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि आखिर आइब्रो ठीक कराने का लिवर इंफेक्शन से क्या कनेक्शन हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते है।

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थ्रेडिंग के धागे से फैल सकता है हेपेटाइटिस - फोटो : Freepik.com

थ्रेडिंग के धागे से फैल सकता है हेपेटाइटिस संक्रमण

आइब्रो थ्रेडिंग और लिवर में इंफेक्शन का ऐसा ही मामला पिछले साल काफी सुर्खियों में रहा था। इसमें 28 साल की एक महिला को हेपेटाइटिस हो गया था। डॉक्टरों ने जब इसके कारणों का पता लगाने की कोशिश की तो सामने आया कि  वह एक ब्यूटी पार्लर में अपनी आइब्रो बनवाने गई थी, वहीं से महिला को हेपेटाइटिस का संक्रमण हुआ। संभवत: जिस धागे से महिला की थ्रेडिंग बनाई गई थी, उसी धागे से पहले किसी ऐसी महिला की थ्रेडिंग बनाई गई थी जिसे हेपेटाइटिस था।

गौरतलब है कि हेपेटाइटिस लिवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाला संक्रमण है। ये संक्रमित व्यक्ति के शरीर के फ्लूइड (जैसे खून, वार्य, लार) के संपर्क में आने से फैलता है।

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हेपेटाइटिस और लिवर संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe Stock

धागे या ब्लेड का दोबारा इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक

रिपोर्ट में सामने आया था कि कुछ पार्लरों में आइब्रो बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले धागे को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। 
 

  • साफ-सफाई का ध्यान न रखना, एक ही धागे या ब्लेड का दोबारा इस्तेमाल या संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल के संपर्क में आने से हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
  • इससे लिवर संक्रमण का तो डर होता है ही साथ ही एचआईवी संक्रमण भी फैल सकता है।
  • अगर थ्रेडिंग का धागा इस्तेमाल करते समय संक्रमित के खून उसमें लग जाता है और दोबारा उसी धागे का इस्तेमाल किसी स्वस्थ व्यक्ति के लिए किया जाता है तो इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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हेपेटाइटिस बी के संक्रमण का खतरा - फोटो : Freepik.com

हेपेटाइटिस और इसके संक्रमण का खतरा

गौरतलब है कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार (ए,बी, सी, डी और ई) का होता है। 

  • हेपेटाइटिस ए और ई मुख्यरूप से दूषित भोजन और पानी से फैलता है।
  • हेपेटाइटिस बी, सी और डी दूषित भोजन और पानी से नहीं, ब्लकि शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है।


यदि सैलून में इस्तेमाल की जाने वाली सुई, पिन, ब्लेड या धागे का दोबारा या फिर बिना ठीक से सेनेटाइज किए इस्तेमाल किया जाता है तो इससे संक्रमण का जोखिम रहता है। विशेष रूप से हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी  लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे सिरोसिस या लिवर कैंसर तक की स्थिति बन सकती है। इसलिए ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते समय सावधानी बेहद जरूरी है।

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सैलून या ब्यूटी पार्लर में हाइजीन का रखें ध्यान - फोटो : Freepik

फिर सैलून या ब्यूटी पार्लर में क्या सावधानी बरतें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हेपेटाइटिस बी हो या एचआईवी का संक्रमण, इनसे बचने के लिए सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि सैलून या ब्यूटी पार्लर में इस्तेमाल होने वाले उपकरण एकदम नए हैं या फिर सही से साफ किए गए हैं। 

  • डिस्पोजेबल धागे, तैलिए और ग्लव्स का उपयोग संक्रमण के जोखिम को कम करता है। 
  • यदि स्किन पर कट, रैशेज या पिंपल हो तो थ्रेडिंग न कराएं क्योंकि इसके कट से वायरस प्रवेश कर सकता है। 
  • प्रक्रिया के दौरान यदि खून निकलता है तो तुरंत एंटीसेप्टिक से साफ कराएं।
  • इसके अलावा, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण उपलब्ध है, इसलिए वैक्सीनेशन करवाना सुरक्षा का मजबूत तरीका है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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