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Health tips: हर तीन में से एक भारतीय को है फैटी लिवर की समस्या, आखिर क्या है इसके पीछे की मूल वजह

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 10 Feb 2026 01:32 PM IST
सार

Fatty Liver Main Reason: फैटी लिवर एक गंभीर समस्या है, जिससे हमारे देश की एक बड़ी आबादी परेशान है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया, तो जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि किन गलतियों की वजह से ये परेशानी होती है।

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Fatty Liver Crisis in India: Understanding the Root Causes and Lifestyle Links Behind the Silent Epidemic
Liver - फोटो : Freepik.com

Fatty Liver Causes In India: भारत में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं, कई अध्ययन में ये पता चला है कि देशभर में लगभग 35 % आबादी फैटी लिवर की समस्या से परेशान है। यानी देश का हर तीसरा व्यक्ति इस समस्या से जूझ रहा है। फैटी लिवर का अर्थ है लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक फैट या चर्बी का जमा हो जाना। शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। इसके पीछे की मूल वजह हमारी बदली हुई जीवनशैली और खान-पान है।



जब हम अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कैलोरी, विशेष रूप से रिफाइंड शुगर और सैचुरेटेड फैट का सेवन करते हैं, तो लिवर उस अतिरिक्त ऊर्जा को फैट के रूप में स्टोर करने लगता है। अगर हम अपने देश के सापेक्ष में देखें तो अधिक कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन और शारीरिक सक्रियता की कमी इस समस्या को और अधिक ट्रिगर कर रही है।

अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह साधारण दिखने वाली स्थिति लिवर में सूजन और अंत में लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति में बदल सकती है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि कौन सी गलतियां इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा देती है।

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Fatty Liver Crisis in India: Understanding the Root Causes and Lifestyle Links Behind the Silent Epidemic
लिवर - फोटो : adobe stock images

इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम
फैटी लिवर का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो खून में शुगर का लेवल बढ़ जाता है और लिवर इस अतिरिक्त शुगर को फैट में बदलने के लिए मजबूर हो जाता है। यह स्थिति अक्सर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पेट के आसपास बढ़ती चर्बी के साथ जुड़ी होती है।


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प्रोसेस्ड फूड - फोटो : Adobe Stock

जंक फूड और फ्रुक्टोज का अत्यधिक सेवन
आज के दौर में प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों का चलन बढ़ गया है। इनमें मौजूद 'हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप' लिवर के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। चीनी की अधिकता लिवर में 'डिनोवो लिपोजेनेसिस' की प्रक्रिया को तेज कर देती है, जिससे लिवर खुद फैट बनाने लगता है। इसके साथ ही, बाहर के खाने में इस्तेमाल होने वाला खराब क्वालिटी का तेल लिवर की कोशिकाओं को डैमेज करता है।


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Fatty Liver Crisis in India: Understanding the Root Causes and Lifestyle Links Behind the Silent Epidemic
सेडेंटरी लाइफस्टाइल - फोटो : Adobe Stock

शारीरिक सक्रियता की कमी और सेडेंटरी लाइफस्टाइल
भारत में बढ़ता शहरीकरण लोगों को शारीरिक रूप से निष्क्रिय बना रहा है। व्यायाम की कमी के कारण शरीर में जमा कैलोरी बर्न नहीं हो पाती, जो सीधे तौर पर लिवर की चर्बी बढ़ाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर व्यक्ति सप्ताह में 150 मिनट भी वर्कआउट करता है, तो लिवर से फैट कम होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। निष्क्रियता न केवल वजन बढ़ाती है, बल्कि लिवर के मेटाबॉलिज्म को भी धीमा कर देती है।

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लिवर - फोटो : Adobe Stock
बचाव ही एकमात्र उपचार है
फैटी लिवर को रिवर्स करने का सबसे प्रभावी तरीका जीवनशैली में सुधार है। अपने आहार में फाइबर, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें और चीनी व शराब से पूरी तरह दूरी बना लें। नियमित रूप से योगाभ्यास और मध्यम व्यायाम लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। ध्यान रखें लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जो खुद को ठीक कर सकता है, बस उसे आपके सहयोग की जरूरत है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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