मानसिक सेहत का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना शरीर को स्वस्थ रखना। अगर तनाव और चिंता जैसी समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो आगे चलकर यह अवसाद और दूसरी मानसिक परेशानियों का खतरा बढ़ा सकती हैं। हमारी मानसिक सेहत पर हमारी रोजमर्रा की आदतों का भी असर पड़ता है और इनमें खानपान की अहम भूमिका है।
Mental Health: दिमाग को भी बीमार कर सकता है आपका गलत खान-पान, तनाव-डिप्रेशन से बचने के लिए कैसी रखें डाइट?
मानसिक स्वास्थ्य पर खानपान का भी असर पड़ता है। बहुत ज्यादा मीठा, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, कैफीन और शराब का सेवन तनाव, चिंता और नींद से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती है।
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खानपान का मानसिक सेहत पर पड़ता है असर
हम क्या खाते हैं, इसका असर सिर्फ वजन, ब्लड शुगर या दिल की सेहत पर ही नहीं पड़ता, बल्कि मूड और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। संतुलित और पौष्टिक आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व देता है, जो दिमाग के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं।
- फल-सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा से भरपूर खाना नियमित रूप से लेने से शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल और दूसरे पोषक तत्व मिलते हैं।
- वहीं बहुत ज्यादा मीठा, तला-भुना और पैकेज्ड खाना खाने की आदत वजन बढ़ने, मेटाबॉलिक समस्याओं और दूसरी स्वास्थ्य परेशानियों का खतरा बढ़ा सकती है।
- अगर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना चाहते हैं, तो खाने में सुधार करना जरूरी हो जाता है।
बहुत ज्यादा मीठा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम से कम खाएं
मीठी चीजें, मिठाई, बिस्किट और रिफाइंड आटे से बनी चीजें ज्यादा खाने की आदत शरीर के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। इनसे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे उतार-चढ़ाव के कारण कुछ लोगों को थकान, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस हो सकती है।
- अगर आपको पहले से तनाव या चिंता रहती है, तो बहुत ज्यादा मीठा खाना आपकी परेशानी को और बढ़ा सकता है। इसलिए मीठा पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं, लेकिन इसकी मात्रा पर नजर रखना जरूरी है।
ज्यादा कैफीन से रहें सावधान
चाय और कॉफी ज्यादातर लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा हैं। सीमित मात्रा में कैफीन लेना आमतौर पर समस्या नहीं माना जाता, लेकिन बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या दूसरे कैफीन वाले पेय लेने से बेचैनी, घबराहट और नींद खराब होने जैसी दिक्कत हो सकती है।
- शाम या रात में ज्यादा कैफीन लेने से नींद प्रभावित हो सकती है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव ज्यादा महसूस हो सकता है।
- इसलिए अगर आपको पहले से चिंता या नींद की परेशानी है, तो कैफीन की मात्रा कम रखें।
शराब से दूरी बनाना बेहतर
शराब पीने के बाद कुछ लोगों को थोड़ी देर के लिए तनाव कम महसूस हो सकता है, लेकिन ये तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता चलने में बाधा बन सकती है। नियमित या ज्यादा शराब पीने से नींद खराब होती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
- लंबे समय तक ज्यादा शराब का सेवन याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
- इसलिए तनाव या चिंता से राहत पाने के लिए शराब का सहारा लेने के बजाय व्यायाम, अच्छी नींद और डॉक्टर की सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।