पिछले कुछ वर्षों का डेटा उठाकर देखें तो पता चलता है कि हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों ने न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा दिया बल्कि इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौतें भी हुईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु के लोगों में हार्ट अटैक और इससे सबंधित जटिलताएं देखी गईं। सोशल मीडिया पर नाचते-गाते, हंसते-खेलते अचानक हार्ट अटैक आने से मौत के आपने भी तमाम मामले देखे-सुने होंगे।
Heart Attack: दुकान में बैठे-बैठे हार्ट अटैक से व्यापारी की मौत; जानिए इन जानलेवा समस्या से बचने का 'मंत्र'
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट अटैक आने के कई कारण हो सकते हैं। जिम जाने वाले और फिटनेस के शौकीन लोगों में भी इसका जोखिम देखा गया है। पर अब भी अगर आप हार्ट को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो नियमित व्यायाम की आदत बनाना बहुत आवश्यक है।
20 से कम उम्र वालों में हार्ट अटैक का खतरा
इससे पहले अप्रैल के महीने में इंदौर में आईआईटी की तैयारी कर रहे 18 वर्षीय छात्र की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। वह रात में पढ़ाई कर रहा था, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे हार्ट अटैक का शिकार पाया था। इसी तरह आपने भी जिम में हार्ट अटैक से मौत के तमाम खबरें सुनी होंगी।
आखिर इसके पीछे क्या वजह है? क्यों लोगों में इसका खतरा बढ़ता जा रहा है और इससे खुद को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?
(ये भी पढ़िए- बच्चे हों या वयस्क किसी को भी हो सकता है हार्ट अटैक)
व्यायाम से हृदयाघात का जोखिम हो सकता है आधा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट अटैक आने के कई कारण हो सकते हैं, ये हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। जिम जाने वाले और फिटनेस के शौकीन लोगों में भी इसका जोखिम देखा गया है। अगर आप हार्ट को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो नियमित व्यायाम की आदत बनाना बहुत आवश्यक है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि नियमित रूप से मात्र 30 मिनट का व्यायाम हृदयाघात के जोखिम को आधा कर सकता है, विशेषकर उन लोगों में जो पहले ही हृदय संबंधी किसी घटना का अनुभव कर चुके हों।
गतिहीन जीवनशैली ने बढ़ा दिया है खतरा
एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने में शारीरिक गतिविधि (व्यायाम-योग) के महत्व पर प्रकाश डाला है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गतिहीन जीवनशैली (दिनभर बैठे रहना, व्यायाम न करना या पैदल कम चलना) हृदय रोग के जोखिमों का एक बड़ा कारण है।
- इससे शरीर में रक्त का परिसंचरण बाधित होने लगता है।
सर्कुलेशन जर्नल में प्रकाशित शोध में पाया गया कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर आप दिल के दौरे के जोखिमों को कम हो सकते हैं। अध्ययन में न्यूयॉर्क शहर के अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती 600 से अधिक रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कुछ वर्षों तक उनके गतिविधियों पर नजर रखी गई।
एक वर्ष के भीतर, 8.2% रोगियों ने दोबार हृदय संबंधित घटनाओं का अनुभव किया या उनकी मृत्यु हो गई। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग दिन में 10 घंटे से अधिक समय तक बैठे रहते थे या लंबे समय तक स्थिर रहते थे, उनमें हार्ट अटैक या इससे संबंधित जटिलताओं के दोबारा होने का खतरा अधिक था।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
न्यूयॉर्क मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन और कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर श्रीहरि नायडू बताते हैं कि इस शोध से सबसे बड़ी सीख और मंत्र ये है कि "गतिहीन रहने के अलावा कुछ भी करने से दिल को बहुत फायदा हो सकता है।" जिन लोगों को पहले से हार्ट की समस्या रही है उन्हें इसपर और भी ध्यान देना चाहिए।
अगर हम सभी कम उम्र से ही व्यायाम (हल्के स्तर के जिससे शरीर फिट रहे और रक्त परिसंचरण ठीक रहे) की आदत बना लें तो भविष्य में हार्ट की बीमारियों से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं।
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स्रोत
Scientists Find Just 30 Minutes of Exercise Cuts Heart Attack Risk in Half for Some Groups
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