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Covid-19 Study: युवाओं में गंभीर रोग और मृत्यु का जोखिम अधिक, लॉन्ग कोविड में देखी जा रही है यह गंभीर दिक्कत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 27 Jun 2022 02:20 PM IST
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higher risk of covid and mortality in young comorbidities women, neurodegenerative disorders in long covid
युवाओं में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : Pixabay

भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले चिंता का कारण बने हुए हैं। पिछले एक महीने से संक्रमण के दैनिक मामलों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को जहां देश में 11739 लोगों को संक्रमित पाया गया, वहीं पिछले 24 घंटे में एक बार फिर से केस 17 हजार के पार हो गए। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि देश में संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स BA.2 के साथ मुख्यरूप से BA.4 और BA.5 जिम्मेदार हैं। अध्ययनों में बताया जा रहा है कि इन वैरिएंट्स के कारण गंभीर रोग और संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने का आशंका कम है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैरिएंट्स काफी संक्रामक हैं और इससे उन लोगों के लिए भी खतरा बना हुआ है जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है।



इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली मृत्युदर को लेकर शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने बड़ा खुलासा किया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि महामारी के पहले चरण के दौरान क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी), मधुमेह, और उच्च रक्तचाप जैसी कोमारबिडीटी वाली युवा महिलाओं में मृत्यु का खतरा अधिक देखा गया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों को पहले से ही कोमोरबिडिटी की समस्या रही है ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, यह संक्रमण की स्थिति में मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकती है।

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कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : iStock

कोमोरबिडिटी बढ़ा देती है संक्रमण की गंभीरता का खतरा

राजधानी दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के शोधकर्ताओं की टीम ने संक्रमण के कारण मृत्यु के खतरे को जानने के लिए अध्ययन किया। इसके लिए 8 अप्रैल से 4 अक्टूबर, 2020 तक अस्पताल में भर्ती रहे 2,586 संक्रमितों के डेटा का अध्ययन किया गया।

जर्नल मॉलिक्यूलर एंड सेल्यूलर बायोकैमिस्ट्री में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने निष्कर्ष निकाला कि जो लोग पहले से ही क्रोनिक किडनी डिजीज की समस्या के शिकार हैं, अगर उन्हें संक्रमण हो जाता है तो यह गंभीर रोग और मृत्यु के जोखिम को बढ़ाने वाला हो सकता है। 

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कोमोरबिडिटी बढ़ा देती है रोग की गंभीरता - फोटो : istock

अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 2,586 संक्रमितों के डेटा को आयु के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था। पहले ग्रुप में 18-59 वर्ष जबकि दूसरा 60 साल से ऊपर वाले लोगों का रखा गया । टीम ने अस्पताल में भर्ती इन मरीजों में पहले से किसी बीमारी के बारे में जानकारी प्राप्त की और इस आधार पर संक्रमण की गंभीरता के जोखिम का अवलोकन किया।

वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि कोमोरबिडिटी, संक्रमण के दौरान गंभीर रोग और ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड, दोनों के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा देती है। 

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महिलाओं में गंभीर रोग का जोखिम - फोटो : iStock

महिलाओं में गंभीर रोगों का जोखिम अधिक

2,586 रोगियों में से, 779 (30.1 प्रतिशत) को आईसीयू में भर्ती होने की आवश्यकता थी, जबकि 1,807 (69.9 प्रतिशत) का सामान्य तौर पर इलाज किया गया। इनमें से करीब 2,269 (87.7 फीसदी) रोगी इलाज के बाद ठीक हुए जबकि 317 (12.3 फीसदी) मरीजों की मौत हो गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं (30.4 प्रतिशत) की तुलना में कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती पुरुष रोगियों (69.6 प्रतिशत) की संख्या दो गुना से अधिक थी, हालांकि संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु दर का जोखिम महिलाओं में अधिक पाया गया।

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कोरोना के खतरे को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : PTI

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के निष्कर्ष के बारे में सर गंगा राम अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन के प्रमुख और अध्ययन के सह-लेखक डॉ विवेक रंजन ने कहते हैं, हमारे अध्ययन से पता चला है कि कोमोरबिडिटी वाले उम्रदराज लोगों की तुलना में इसी तरह की समस्याओं के शिकार युवाओं में कोविड-19 संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु दर का जोखिम अधिक पाया गया। ऐसे लोगों के आईसीयू में भर्ती होने का जोखिम भी अधिक होता है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि जिन लोगों को पहले से ही किसी भी तरह की बीमारी है उन्हें कोरोना संक्रमण से विशेषरूप से बचाव करते रहने की आवश्यकता होती है। ओमिक्रॉन जैसे नए वैरिएंट्स भी आपके लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

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