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HIV Alert: देश का ये राज्य बना एचआईवी हॉटस्पॉट, नेशनल एवरेज से 13 गुना ज्यादा मामले; क्यों बदतर हो रहे हालात?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 15 Feb 2026 07:11 PM IST
सार

HIV Infection In India: एचआईवी संक्रमण के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण रहे हैं। मिजोरम में एचआईवी के बढ़ते मामलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने कहा कि राज्य में एचआईवी के मामले नेशनल एवरेज से 13 गुना ज्यादा हैं। ये बड़ा खतरा है, जिसे लेकर सभी लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए।

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HIV alert in india cases in Mizoram are 13 times higher than the national average
एचआईवी संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe Stock

ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) संक्रमण के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय रहे हैं। ये हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण भी बन रहा है। 



ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) संक्रमण के कारण एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम का खतरा होता है। साल 2024 के आखिर तक दुनियाभर में लगभग 40.8 मिलियन (4 करोड़ से अधिक) लोग एचआईवी के साथ जी रहे थे। इस साल 13 लाख नए मामले भी सामने आए जबकि 6.30 लाख लोगों की इस संक्रमण से मौत भी हो गई।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जिस तरह से इस रोग का खतरा बढ़ रहा है और अमेरिका ने एचआईवी रोकथाम और उपचार कार्यक्रमों के लिए विदेशी सहायता निधि रोकने का फैसला लिया था, इसके कारण एचआईवी का जोखिम और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि साल 2029 तक 40 लाख से ज्यादा एड्स से संबंधित मौतें और 60 लाख से ज्यादा एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं।

भारत में भी एचआईवी-एड्स को बड़े संकट के तौर पर देखा जाता रहा है। विशेषतौर पर मिजोरम से सामने आ रही जानकारियां और भी चिंता बढ़ा रही हैं।

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एचआईवी-एड्स के मामले - फोटो : Freepik.com

मिजोरम में एचआईवी का बढ़ता खतरा

मिजोरम की स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने राज्य में एचआईवी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है। डेटा से पता चलता है कि मिजोरम में एचआईवी के मामले नेशनल एवरेज से 13 गुना ज्यादा हैं। 
 

  • स्वास्थ्य मंत्री ने इसे "सबका अपमान" बताते हुए लोगों से संक्रमण की रोकथाम को लेकर अपील की है। 
  • गौरतलब है कि एचआईवी की नेशनल प्रिवेलेंस रेट 0.2 प्रतिशत है, मिजोरम में ये बढ़कर 2.74 प्रतिशत हो गया है।
  • प्रिवेलेंस किसी खास समय पर किसी खास आबादी में बीमारी के मौजूदा मामलों (पुराने और नए दोनों) की कुल संख्या को मापता है।
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एचआईवी से बचाव जरूरी - फोटो : freepik.com

थोड़ी सी सावधानी 70% तक कम कर सकती है संक्रमण का खतरा 

मिजोरम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने कहा, ये मिजो समाज के लिए शर्म की बात है। राज्य में एचआईवी संक्रमण के ज्यादातर मामले असुरक्षित यौन संबंधों के कारण बढ़ रहे हैं, जो सभी मामलों का 70% है जिसे सावधानी बरतकर आसानी से रोका जा सकता था।
 

  • स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, राज्य में बढ़ते एचआईवी के मामले स्वास्थ्य के लिए तो संकट का विषय हैं ही साथ ही ये मिजो समाज के नैतिक और धार्मिक मूल्यों के भी खिलाफ है। मिजोरम के भविष्य को बचाने के लिए हमारे युवाओं को सतर्क रहना होगा।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, कंडोम के इस्तेमाल जैसे तरीके इस यौन संचारित रोग को रोकने का सबसे सुरक्षित तरीका है। 
  • राज्य में कंडोम के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लव ब्रिगेड 2.0 कैंपेन का भी जिक्र किया। 
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एचआईवी संक्रमण और इसका जोखिम - फोटो : Adobe Stock

एचआईवी संक्रमण और इसका खतरा

एचआईवी/एड्स को लेकर सामाजिक टैबू और इसपर बातचीत को लेकर लोगों में शर्म के कारण ये बीमारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।

अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि महिला या पुरुष किसे एचआईवी संक्रमण का खतरा अधिक होता है? इस बारे में यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस संक्रमण और एड्स रोग का अधिक शिकार होती हैं।

साल 2022 में इस वायरस से पीड़ित 39 मिलियन लोगों में से 53% महिलाएं थीं। हालांकि, ट्रेंड इलाके के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। सब-सहारा अफ्रीका के बाहर ज्यादातर इलाकों में सामने आने वाले नए मामलों में 70% से ज्यादा पुरुष होते हैं।

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एचआईवी का संभव है इलाज - फोटो : Amarujala.com

ठीक हो सकता है एचआईवी का संक्रमण?

एचआईवी संक्रमण को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल ये भी रहा है कि क्या ये बीमारी लाइलाज है?

कुछ दशकों पहले तक एड्स को लाइलाज बीमारी माना जाता था, हालांकि वैज्ञानिक शोध और कारगर दवाओं ने इसके इलाज को आसान बना दिया है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए भी व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप इस संक्रमण के फैलने की गति को भी नियंत्रित करने में मदद मिली है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हम इसके कई प्रभावी दवाओं और उपचार विधियों के बारे में जानकारी देते रहे हैं। यहां क्लिक करके पा सकते हैं जानकारी





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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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