हमारे घर में अक्सर दादी-नानी कहती रही हैं कि खाना ठीक से पचेगा तो बीमारी नहीं होगी। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर आपका पेट दुरुस्त रहता है तो कई सारी बीमारियां आपसे दूर रह सकती हैं। यही कारण है कि हर बीमारी, हर सर्जरी के साथ विशेष डाइट की सलाह भी दी जाती है, ताकि शरीर को सही और संतुलित पोषण मिल सके। भारतीय रसोईघर इस मामले में बहुत महत्व रखते हैं। एक सामान्य शाकाहारी भारतीय भोजन में कई सारे गुण होते हैं और हमारे किचन में रखा मसाले का डब्बा तो इस मामले में किसी मेडिसिन बॉक्स से कम नहीं होता। हमारी सब्जियों और खासकर छौंक में जो चीजें पारंपरिक रूप से डाली जाती हैं, उनमें पेट को राहत पहुंचाने वाले कई गुण भी होते हैं। जानिए इनमें से तीन ऐसी महत्वपूर्ण चीजों के बारे में जिनका उपयोग सालों से भारतीय भोजन में हो रहा है और ये हमारे स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा रहे हैं।
जानना जरूरी: पाचन को मजबूती देने में यह तीन चीजें हैं रामबाण, दूर होंगी कई बीमारियां
गुणकारी भारतीय भोजन
एक सामान्य शाकाहारी भारतीय भोजन की थाली में सबकुछ संतुलित और पौष्टिक होता है, बशर्ते उसे सही समय पर, सही तरीके से और संतुलन के साथ खाया जाए। बड़े बड़े डायटीशियन भी इस बात का समर्थन करते हैं कि दाल-चावल, सब्जी-रोटी, दही, सलाद, अचार, थोड़ा सा घी, मौसमी फल आदि से बनी एक थाली, सम्पूर्ण पोषण का आधार होती है। इसके अलावा भारत के हर भाग के भोजन की अपनी खासियत और महत्व होता है। ऐसी ही तीन चीजें हैं मेथी, हींग और अजवायन। ये बहुत ही आम दिखने वाली चीजें पेट की सेहत के लिए कमाल का काम करती हैं।
इसकी पत्तियों की सब्जी बनाकर खाएं या फिर इसके दानों से छौंक लगाएं, हर तरह से ये भोजन का स्वाद और पोषण दोनों बढ़ाती है। हरी पत्तियों में जहां कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स, आदि का भंडार होता है। वहीं इसके दानों में आयरन के साथ साथ फाइबर, प्रोटीन, मैगनीज़, कॉपर, मैग्नीशियम, विटामिन-बी 6 तथा फॉस्फोरस, आदि होता है। इन बीजों का प्रयोग पाउडर रूप में या साबुत भी किया जाता है। मेथी के बीजों को पेट के लिए अच्छा माना जाता है। इनसे कोलेस्ट्रॉल और शुगर का स्तर संतुलित बना रहता है, इसलिए डायबिटिक लोगों को इन बीजों का सेवन करने के किए कहा जाता है। स्वाद में कड़वे होने के बावजूद मेथी दाने को पेट की अंदरूनी सूजन (गैस्ट्राइटिस) को ठीक करने, कब्ज मिटाने, एसिडिटी को ठीक करने, मोटापा ठीक करने, मासिक धर्म के दर्द में कमी लाने, मुंह के छालों से राहत पाने आदि में उपयोग में लाया जाता है।
इस तरह करें उपयोग: दानों को आप साधारण छौंक में डालकर, रात में पानी में भिगोकर रखने और सुबह काम में लेकर, दानों का पाउडर बनाकर रोज सुबह खाकर या तवे पर सेककर भी इसका सेवन कर सकते हैं।
छोटे बच्चों के पेट में गैस बनने या दर्द होने पर अक्सर थोड़े से पानी में चुटकी भर हींग घोलकर, बिल्कुल जरा सी मात्रा में बच्चे के पेट पर लगाना भारतीय दादी-नानी का पसंदीदा नुस्खा रहा है। हमेशा से हींग को पेट की समस्याओं से राहत पाने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। भोजन में भी इसका प्रयोग इसलिए ही किया जाता है ताकि भोजन को पचाने में मदद मिल सके। शोध बताते हैं कि असल में हींग का सेवन डाइजेस्टिव एंजाइम्स को सक्रिय बनाता है। यह लिवर को सपोर्ट करते हुए विशेषतौर पर फैट्स को पचाने में मदद करती है। इसके साथ ही टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट डिसीज से बचाव में भी सक्षम होती है। यह आईबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षणों जैसे पेटदर्द, गैस, ब्लॉटिंग, कब्ज, डायरिया आदि में भी राहत दे सकती है।
ऐसे करें उपयोग: हींग की बहुत ही अल्प मात्रा का उपयोग करना उचित होता है। इसलिए खाने में चुटकी भर से भी कम हींग पाउडर या हींग के पिसे हुए टुकड़े डालना काफी होता है। अगर पानी में घोलकर उपयोग में ला रहे हैं तो भी 2-3 छोटे चम्मच पानी में चुटकी भर हींग काफी होती है।
बदहजमी होने या जी घबराने पर नींबू और नमक मिलाकर अजवायन का सेवन करना हमारे देश में एक आम उपाय है। कई बार सौंफ के साथ मिलाकर भी इसे खाया जाता है। पेट की कई समस्याओं में इससे तुरन्त राहत मिलती है। इन नन्हे से दानों में फाइबर से लेकर एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स भी होते हैं। ये एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी रखते हैं और इसलिए ई- कोलाई जैसे बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों से बचाव में सक्षम होते हैं जो कि अक्सर फ़ूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। साथ ही अजवायन के दाने बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को घटाने में मदद करते हैं। पेट या छोटी आंत में होने वाले अल्सर (छालों) में राहत देने का काम भी अजवायन के दाने कर सकते हैं।
इस तरह करें उपयोग: एक छोटी चम्मच अजवायन के दानों को सेक कर इसमें थोड़ा सी मात्रा काले नमक की डालकर इसे खाया जा सकता है। इसे चबाने की बजाय धीरे-धीरे इसके रस को पेट मे जाने दें। इसके अलावा इसके पाउडर को सौंफ पाउडर के साथ मिलाकर रख लें और भोजन के बाद इसके एक छोटे चम्मच की मात्रा में सेवन करें।
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