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Gallbladder stone: गॉलब्लैडर स्टोन से बचना है तो इन गड़बड़ आदतों में कर लें सुधार, वरना सर्जरी तय

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 12 Oct 2025 08:20 PM IST
सार

  • गड़बड़ दिनचर्या और खानपान की दिक्कतों ने कम उम्र के लोगों में भी गॉलब्लैडर स्टोन का जोखिम बढ़ा दिया है। 
  • अध्ययनों से पता चलता है कि दुनियाभर में हर 10 में से 2 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित हैं। भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

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गॉलब्लैडर स्टोन की समस्या - फोटो : Adobe Stock

Gallbladder Stone: पेट में पथरी होने की समस्या आज के समय में बहुत आम हो चुकी है। ये मुख्य रूप से दो अंगों पित्ताशय और किडनी में होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, गॉलब्लैडर स्टोन यानी पित्त की पथरी सबसे चिंताजनक होती है क्योंकि इसके इलाज में पित्ताशय को ही निकालना पड़ता है। गड़बड़ दिनचर्या और खानपान की दिक्कतों ने कम उम्र के लोगों में भी गॉलब्लैडर स्टोन का जोखिम बढ़ा दिया है। 



अध्ययनों से पता चलता है कि दुनियाभर में हर 10 में से 2 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित हैं। भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जंक फूड, तली-भुनी चीजें, शारीरिक गतिविधि की कमी, वजन बढ़ना और पानी कम पीने जैसी आदतें पित्त के संतुलन को बिगाड़ देती हैं। वहीं, महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, गर्भनिरोधक गोलियां और गर्भावस्था भी पथरी बनने का खतरा बढ़ाती है।

आइए जानते हैं कि गॉलब्लैडर स्टोन की समस्या किन कारणों से होती है और इससे बचाव के लिए किन आदतों में सुधार करना जरूरी है?

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गॉलब्लैडर स्टोन की समस्या - फोटो : Freepik.com

पहले जान लीजिए गॉलब्लैडर शरीर में क्या काम करता है?

गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय लिवर के नीचे स्थित एक छोटा सा अंग होता है, जो फैट को पचाने के लिए जरूरी पित्त को संग्रहित करता है। जब इस पित्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल या बिलीरूबिन का स्तर असंतुलित हो जाता है, तो यह ठोस कणों के रूप में जमने लगता है और गॉलब्लैडर स्टोन का कारण बन सकता है।

पेट में अक्सर तेज दर्द, उल्टी, पाचन में गड़बड़ी और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं इसका शुरुआती संकेत हो सकती हैं जिसपर ध्यान देना जरूरी है।

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खान-पान में गड़बड़ी से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe stock photos

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या में सुधार कर लिया जाए तो पथरी की इस समस्या से बचा जा सकता है। सभी लोगों के लिए जरूरी है कि कम उम्र से ही संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करे और पानी की पर्याप्त मात्रा पीएं।

सही जीवनशैली अपनाकर न केवल गॉलब्लैडर स्टोन से बचा जा सकता है, बल्कि शरीर के अन्य पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। आइए जानते हैं किन आदतों के कारण गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा अधिक हो सकता है?

ज्यादा तला भुना खाने से बचें

तले-भुने और ज्यादा तेल वाले भोजन का अत्यधिक सेवन गॉलब्लैडर पर दबाव डालता है। जब शरीर में फैट की मात्रा बढ़ती है, तो लिवर अधिक पित्त रस बनाता है ताकि फैट पच सके। लेकिन जब पित्त का संतुलन बिगड़ जाता है, तो उसमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है, जिससे पथरी बनने लगती है।

लंबे समय तक जंक फूड, मक्खन, चीज़, या मीट का अधिक सेवन करने से यह खतरा और बढ़ जाता है।

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पथरी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

वजन बढ़ने के साथ पथरी का भी बढ़ने लगता है खतरा

मोटापा गॉलब्लैडर स्टोन का एक प्रमुख जोखिम कारक है। वजन ज्यादा होने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है, जो पित्त में घुल नहीं पाता और धीरे-धीरे जमने लगता है। वहीं, अचानक वजन बढ़ना या घटाना भी पित्त के संतुलन को बिगाड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 से ऊपर होने पर पथरी का खतरा तीन गुना तक बढ़ सकता है।

पानी और फाइबर की कमी

जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो पित्त अधिक गाढ़ा हो जाता है, जिससे उसमें ठोस पदार्थ बनने लगते हैं। वहीं फाइबर की कमी के कारण फैट मेटाबॉलिज्म गड़बड़ा जाता है। पानी की पर्याप्त मात्रा और हरी सब्जियां, फल, और साबुत अनाज का सेवन पित्त के संतुलन को बनाए रखता है। दिनभर में कम से कम तीन लीटर पानी पीना जरूरी है ताकि पित्त पतला रहे।

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पित्त की थैली में पथरी होने का खतरा - फोटो : Freepik.com

हार्मोनल असंतुलन की स्थिति

महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों या हार्मोनल बदलावों के कारण भी गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा अधिक रहता है। एस्ट्रोजन हार्मोन की अधिकता पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देती है। वहीं, लंबे समय तक स्टेरॉयड या कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन भी पित्त के संतुलन को बिगाड़ता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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