Gallbladder Stone: पेट में पथरी होने की समस्या आज के समय में बहुत आम हो चुकी है। ये मुख्य रूप से दो अंगों पित्ताशय और किडनी में होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, गॉलब्लैडर स्टोन यानी पित्त की पथरी सबसे चिंताजनक होती है क्योंकि इसके इलाज में पित्ताशय को ही निकालना पड़ता है। गड़बड़ दिनचर्या और खानपान की दिक्कतों ने कम उम्र के लोगों में भी गॉलब्लैडर स्टोन का जोखिम बढ़ा दिया है।
Gallbladder stone: गॉलब्लैडर स्टोन से बचना है तो इन गड़बड़ आदतों में कर लें सुधार, वरना सर्जरी तय
- गड़बड़ दिनचर्या और खानपान की दिक्कतों ने कम उम्र के लोगों में भी गॉलब्लैडर स्टोन का जोखिम बढ़ा दिया है।
- अध्ययनों से पता चलता है कि दुनियाभर में हर 10 में से 2 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित हैं। भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
पहले जान लीजिए गॉलब्लैडर शरीर में क्या काम करता है?
गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय लिवर के नीचे स्थित एक छोटा सा अंग होता है, जो फैट को पचाने के लिए जरूरी पित्त को संग्रहित करता है। जब इस पित्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल या बिलीरूबिन का स्तर असंतुलित हो जाता है, तो यह ठोस कणों के रूप में जमने लगता है और गॉलब्लैडर स्टोन का कारण बन सकता है।
पेट में अक्सर तेज दर्द, उल्टी, पाचन में गड़बड़ी और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं इसका शुरुआती संकेत हो सकती हैं जिसपर ध्यान देना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या में सुधार कर लिया जाए तो पथरी की इस समस्या से बचा जा सकता है। सभी लोगों के लिए जरूरी है कि कम उम्र से ही संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करे और पानी की पर्याप्त मात्रा पीएं।
सही जीवनशैली अपनाकर न केवल गॉलब्लैडर स्टोन से बचा जा सकता है, बल्कि शरीर के अन्य पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। आइए जानते हैं किन आदतों के कारण गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा अधिक हो सकता है?
ज्यादा तला भुना खाने से बचें
तले-भुने और ज्यादा तेल वाले भोजन का अत्यधिक सेवन गॉलब्लैडर पर दबाव डालता है। जब शरीर में फैट की मात्रा बढ़ती है, तो लिवर अधिक पित्त रस बनाता है ताकि फैट पच सके। लेकिन जब पित्त का संतुलन बिगड़ जाता है, तो उसमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है, जिससे पथरी बनने लगती है।
लंबे समय तक जंक फूड, मक्खन, चीज़, या मीट का अधिक सेवन करने से यह खतरा और बढ़ जाता है।
वजन बढ़ने के साथ पथरी का भी बढ़ने लगता है खतरा
मोटापा गॉलब्लैडर स्टोन का एक प्रमुख जोखिम कारक है। वजन ज्यादा होने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है, जो पित्त में घुल नहीं पाता और धीरे-धीरे जमने लगता है। वहीं, अचानक वजन बढ़ना या घटाना भी पित्त के संतुलन को बिगाड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 से ऊपर होने पर पथरी का खतरा तीन गुना तक बढ़ सकता है।
पानी और फाइबर की कमी
जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो पित्त अधिक गाढ़ा हो जाता है, जिससे उसमें ठोस पदार्थ बनने लगते हैं। वहीं फाइबर की कमी के कारण फैट मेटाबॉलिज्म गड़बड़ा जाता है। पानी की पर्याप्त मात्रा और हरी सब्जियां, फल, और साबुत अनाज का सेवन पित्त के संतुलन को बनाए रखता है। दिनभर में कम से कम तीन लीटर पानी पीना जरूरी है ताकि पित्त पतला रहे।
हार्मोनल असंतुलन की स्थिति
महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों या हार्मोनल बदलावों के कारण भी गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा अधिक रहता है। एस्ट्रोजन हार्मोन की अधिकता पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देती है। वहीं, लंबे समय तक स्टेरॉयड या कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन भी पित्त के संतुलन को बिगाड़ता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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