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Cervical Cancer: भारत की इस पहल से सालाना 50 हजार महिलाओं की बच सकती है जान, WHO की वैज्ञानिक ने की तारीफ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 27 Feb 2026 06:38 PM IST
सार

भारत में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू करने की डब्ल्यूएचओ की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने तारीफ की। उन्होंने कहा यह महिलाओं के हक में एक पहल है।
 

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HPV vaccination programme in india to fight against cervical cancer why early vaccination is important
सर्वाइकल कैंसर का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : Freepik.com

सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती घातक बीमारियों में से एक है। महिलाओं में होने वाले इस कैंसर के कारण हर साल लाखों मौंतें हो जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में इस कैंसर के लगभग 6.60 लाख नए मामले सामने आए और 3.50 लाख से अधिक मौतें हुईं। इनमें से ज्यादातर मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में रिपोर्ट की गईं। 



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं में होने वाला तीसरा सबसे आम कैंसर (18.3% मामले) और मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसके लगभग सभी मामले हाई-रिस्क एचपीवी संक्रमण की वजह से होते हैं। इस कैंसर को लेकर अच्छी बात ये है कि समय रहते अगर इससे बचाव के लिए टीके लगवा लिए जाएं तो इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है।

भारत में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने के लिए हाल ही में सरकार ने 14 साल और उससे अधिक उम्र की लड़कियों के लिए पूरे देश में फ्री एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की थी। भारत के इस पहल की स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी सराहना कर रहे हैं।

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सौम्या स्वामीनाथन, पूर्व डब्ल्यूएचओ पूर्व चीफ साइंटिस्ट - फोटो : ANI

डब्ल्यूएचओ की पूर्व चीफ साइंटिस्ट ने की तारीफ

डब्ल्यूएचओ की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने भारत के एचपीवी वैक्सीनेशन कैंपेन की सराहना करते हुए इसे जरूरी कदम बताया। डॉ. स्वामीनाथन ने कहा, वैक्सीनेशन ड्राइव भविष्य में इस घातक कैंसर के बोझ को कम करने में विशेष भूमिका निभा सकती है।

 




क्या कहती हैं डॉ स्वामीनाथन-

  • सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले शीर्ष तीन कैंसर में से एक है। भारतीय महिलाओं में हर साल 40-50 हजार मौतें इसी वजह से होती हैं।
  • सर्वाइकल कैंसर को वैक्सीन से रोका जा सकता है। आज किए गए वैक्सीनेशन का असर 15 से 20 साल बाद दिखेगा। 
  • भारत का यह बहुत अच्छा कदम है। इसे एक पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तौर पर शुरू करने से सर्वाइकल कैंसर से मुकाबला आसान हो सकता है।
  •  हम सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के अपने लक्ष्य में दूसरे देशों के साथ जुड़ रहे हैं। यह महिलाओं के हक में एक पहल है।
  • एचपीवी बहुत ही सुरक्षित वैक्सीन है और यह एक बहुत ही सस्ता पब्लिक हेल्थ इंटरवेंशन है। मुझे खुशी है कि भारत सरकार इसे शुरू कर रही है।
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वैक्सीनेशन से हारेगा सर्वाइकल कैंसर - फोटो : ANI

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ भारत की जंग
 

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ जंग में भारत ने 14 साल और अधिक उम्र की लड़कियों-महिलाओं को फ्री में टीके देने की योजना बनाई है। क्वाड्रीवैलेंट एचपीवी वैक्सीन एचपीवी टाइप 16 और 18 से बचाती है, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस एक वैक्सीन से टाइप 6 और 11 से भी महिलाओं को सुरक्षित किया जा सकता है। 
 

  • गौरतलब है कि तमाम वैज्ञानिक सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि रिकमेंडेड एज ग्रुप की लड़कियों को दी जाने वाली वैक्सीन उन्हें संक्रमण के खिलाफ मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा देती है।
  • नेशनल प्रोग्राम के तहत वैक्सीनेशन वॉलंटरी और फ्री होगा, जिससे सभी सोशियो-इकोनॉमिक ग्रुप्स को बराबर का लाभ मिल सकेगा।
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एचपीवी वैक्सीनेशन - फोटो : Adobe stock

एम्स में की गई थी फ्री स्क्रीनिंग

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ जंग में भारत लगातार प्रयासरत है। इससे पहले पूरी जनवरी ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली ने फ्री सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग सुविधा दी थी। जनवरी को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, इसके तहत 31 जनवरी तक महिलाओं की फ्री में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग कराई गई। 



किस उम्र तक महिलाएं लगवा सकती हैं टीके?

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए सभी महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह पर टीका जरूर लगवाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन लगवाने की सबसे सही उम्र 9 से 14 वर्ष के बीच मानी जाती है। इस उम्र में वैक्सीन सबसे ज्यादा प्रभावी होती है। 26 साल तक के उम्र के महिलाएं भी टीके लगवा सकती हैं। हालांकि किसी भी उम्र में टीके लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 





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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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