दिल की बीमारियां और बढ़ते हार्ट अटैक के मामले दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। सोशल मीडिया, न्यूज के माध्यम से हम सभी अक्सर हार्ट अटैक से मौत की खबरें सुनते-देखते रहते हैं। ऐसी ही एक दिल दहला देने वाला मामला राजस्थान के नागौर जिले से सामने आया है, जहां 5वीं कक्षा की छात्रा की मौत हो गई। वह स्कूल में खेल रही थी, अचानक सीने में दर्द हुआ और गिर पड़ी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है।
Heart Attack: बच्चे क्यों हो रहे हार्ट अटैक का शिकार? 9 वर्षीय छात्रा की खेलते-खेलते चली गई जान
राजस्थान के नागौर जिले के एक स्कूल में 5वीं कक्षा की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्ची स्कूल में खेल रही थी, तभी उसे अचानक सीने में दर्द हुआ और वह गिर पड़ी। करीब चार महीने पहले उसके बड़े भाई की भी कथित तौर पर हार्ट अटैक से इसी तरह मौत हो चुकी है।
बच्ची की मौत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
5वीं कक्षा की छात्रा की मौत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार बच्ची अपने दोस्तों के साथ स्कूल के बास्केटबॉल कोर्ट में खेल रही थी, तभी वह अचानक लड़खड़ाकर जमीन पर गिर गई। उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार के मुताबिक, बच्ची ठीक थी और उसे पहले कोई गंभीर बीमारी भी नहीं थी। इससे करीब 5 महीने पहले सितंबर 2025 में दिव्या का भाई अभिषेक घर पर खेलते समय गिर गया, जब उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अब सवाल है कि बच्चों में हार्ट अटैक और इससे मौत के मामले क्यों बढ़ते जा रहे हैं?
बच्चों में क्यों बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा?
कम उम्र में, विशेषतौर पर बच्चों को हार्ट अटैक क्यों आते हैं, ये सवाल अक्सर लोगों के मन में बना रहता है। अमर उजाला से एक बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवि प्रकाश बताते हैं, हार्ट अटैक को अक्सर अनहेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों के कारण होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता है।
- बच्चे चूंकि दौड़-भाग खेलकूद अधिक करते हैं ऐसे में इनमें शारीरिक निष्क्रियता के कारण होने वाला खतरा नहीं होता है।
- खान-पान की गड़बड़ी दिल की बीमारियों के खतरे को जरूर बढ़ा देती है। जब बच्चे जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाली चीजों का सेवन शुरू करने लगते हैं तो इससे मोटापे का खतरा बढ़ता है।
- मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है जिससे दिल से संबंधित समस्याओं के मामले बढ़ सकते हैं।
दिल की बीमारियों के जोखिम
कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग बहुत ज्यादा जंक फूड खाते हैं, फिजिकल एक्टिविटी कम करते हैं, हर समय स्क्रीन से चिपके रहते हैं उनमें दिल की बीमारियों का जोखिम अधिक हो सकता है।
- बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम उनकी शारीरिक गतिविधियों को कम कर देता है। इससे मोटापा, शरीर में इंफ्लेमेशन और दिल से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
- बच्चों में बढ़ती हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी को लेकर विशेषज्ञ पहले से चिंता जताते रहे हैं, इससे दिल के साथ किडनी और आंखों को भी नुकसान हो सकता है।
क्या टॉडलर और प्री-स्कूलर बच्चे भी हो सकते हैं दिल की बीमारियों का शिकार?
बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ आरती सिन्हा बताती हैं, आमतौर पर टॉडलर (1 से 3 साल) बच्चों में हार्ट अटैक का जोखिम बहुत कम होता है, इस तरह के मामले काफी दुर्लभ माने जाते हैं। ये उम्र चलने-फिरने, दौड़ने वाला होता है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण टॉडलर या प्री-स्कूलर (3-5 साल) बच्चों में दिल का दौरा पड़ना बहुत दुर्लभ है।
कुछ बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, हार्ट की खराबी, आनुवांशिक हार्ट से संबंधित समस्याओं या कावासाकी बीमारी जैसी दुर्लभ बीमारियों के कारण दिल से संबंधित रोगों और जटिलताओं का खतरा हो सकता है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।