Benefits of Dietary Fiber: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग अपने खाने पीने पर ध्यान नहीं दे पाते हैं और ऐसे डाइट का पालन करते हैं जिसमें रिफाइंड फूड (मैदा, चीनी) की मात्रा अधिक होती है। हाल ही में डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर सचेत किया है कि फाइबर की कमी केवल कब्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के सुरक्षा तंत्र को बूरी तरह प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर शालिनी के अनुसार फाइबर हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है।
Health Tips: डॉक्टर से जानें पांच कारण, क्यों जरूरी है फाइबर का सेवन?
Fiber and Gut Lining Damage: एक स्वस्थ शरीर के लिए फाइबर सबसे जरूरी तत्वों में से एक है। मगर बहुत से लोग अपने आहार पर इतना ध्यान नहीं देते हैं। आज के आधुनिक जीवनशैली में इसकी कमी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
आंतों की सुरक्षा और शुगर स्पाइक पर नियंत्रण
फाइबर की कमी सीधे तौर पर हमारी गट लाइनिंग (आंत की परत) को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है। डॉक्टर शालिनी बताती हैं कि फाइबर की कमी से शुगर स्पाइक की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। जब भोजन में फाइबर होता है, तो वह शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है। इसकी कमी होने पर खून में ग्लूकोज का लेवल अचानक बढ़ता है, जो सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज को जन्म देता है।
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फाइबर शरीर में झाड़ू की तरह काम करता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकालता है। अगर आहार में फाइबर कम होगा, तो यह गंदा फैट धमनियों में जमा होने लगेगा, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
फाइबर की कमी न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है, बल्कि यह फैटी लिवर का जोखिम भी की गुना बढ़ जाता है, जिससे शरीर का मुख्य फिल्टर (लिवर) भी सुस्त पड़ने लगता है। डॉक्टर सोलंकी के मुताबिक एक स्वस्थ्य व्यक्ति को दिनभर में 25-30 ग्राम फाइबर जरूर खाना चाहिए।
कैंसर का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर की कमी शरीर में ब्यूटिरेट नामक एक आवश्यक शॉर्ट-चेन फैटी एसिड के उत्पादन को कम कर देती है। ब्यूटिरेट आंतों की कोशिकाओं को ऊर्जा देता है और उन्हें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाता है। शोध बताते हैं कि फाइबर युक्त आहार का सेवन न करने से कोलन कैंसर और अन्य इन्फ्लेमेटरी बीमारियों का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
हार्मोनल असंतुलन और समय से पहले बुढ़ापा
फाइबर की कमी केवल आंतरिक अंगों को ही नहीं, बल्कि आपके एजिंग(समय से पहले बुढ़ापा) को भी प्रभावित करती है। यह हार्मोनल असंतुलन का कारण बनती है और प्रिमेच्योर एजिंग की प्रक्रिया को तेज कर देती है। पर्याप्त फाइबर न लेने से चेहरे पर झुर्रियां और शरीर में एनर्जी की कमी जल्दी दिखने लगती है। इसलिए अपनी डाइट में साबुत अनाज, दालें और मौसमी सब्जियों को शामिल करना बहुत जरूरी है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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