सब्सक्राइब करें

Study Alert: बच्चों के लिए 'स्लो-पॉइजन' जैसी है ये आदत, चौंकाने वाली रिपोर्ट हर माता-पिता की बढ़ा देगी टेंशन

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 03 Feb 2026 01:14 PM IST
सार

Screen Time Side Effects In Kids: एक हालिया अध्ययन में बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है। इसमें पाया गया है कि छोटे भाई-बहन अपने बड़े भाई-बहनों की तुलना में स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं। इससे उनमें दिमागी विकास सहित कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।

विज्ञापन
younger siblings spend more time on screens than Bigger ones baccho ka screen time badhna
बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम खतरनाक - फोटो : Freepik.com

लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को इतना नुकसान पहुंचाया है कि जो बीमारियां पहले सिर्फ उम्र बढ़ने पर हुआ करती थीं, वह अब युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही हैं। कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर, मोटापा, स्ट्रेस और हार्मोनल असंतलन की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं।



हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं, लोग अब शारीरिक मेहनत कम करते हैं, लाइफस्टाइल सेंडेंटरी हो गई है मतलब दिन का अधिकतर समय बैठे-बैठे ये फिर आराम करते हुए बीत रहा है जो असल में कई जानलेवा बीमारियों की मुख्य वजह है। मोबाइल-कंप्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल को इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

मोबाइल-कंप्यूटर जैसे स्क्रीन पर बीतने वाले समय यानी बढ़ते स्क्रीन टाइम को पहले से अध्ययनों में सेहत का दुश्मन और 'स्लो-पॉइजन' बताया जाता रहा है। बच्चों का स्क्रीन टाइम और भी ज्यादा देखा जा रहा है जिसकी वजह से कम उम्र में ही क्रॉनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

स्क्रीन टाइम को लेकर हालिया अध्ययन में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जो हर माता-पिता की टेंशन बढ़ाने वाली हो सकती है।

Trending Videos
younger siblings spend more time on screens than Bigger ones baccho ka screen time badhna
स्क्रीन टाइम बढ़ने के कई सारे नुकसान - फोटो : Adobe Stock

स्क्रीन टाइम बढ़ने को क्यों माना जाता है खतरनाक?

हाई स्क्रीन टाइम को लेकर अध्ययन की इस रिपोर्ट के बारे में जानने से पहले आइए जान लेते हैं कि बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम क्यों खतरनाक माना जाता है और इससे क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
 

  • अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है। बच्चों में इसका खतरा कहीं ज्यादा है।
  • स्क्रीन टाइम बढ़ने से डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे आंखों में जलन, धुंधला दिखने, सिरदर्द और ड्राई आई जैसी दिक्कतें हो सकती है।
  • स्क्रीन टाइम बढ़ने का सीधा असर नींद पर भी पड़ता है जिससे अनिद्रा का खतरा बढ़ता है। नींद पूरी न होने से मोटापा, डायबिटीज, तनाव और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। 
  • ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और भाषा व सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है। 


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 5 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल-कंप्यूटर या किसी भी प्रकार के स्क्रीन के अधिक संपर्क से बचाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
younger siblings spend more time on screens than Bigger ones baccho ka screen time badhna
घर के छोटे बच्चों का स्क्रीन टाइम होता है अधिक - फोटो : Freepik.com

स्क्रीन टाइम को लेकर चौंकाने वाला खुलासा 

हेल्थ एक्सपर्ट्स पहले से ही बढ़ते स्क्रीन टाइम को स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताते रहे हैं।

इससे संबंधित हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े भाई-बहनों की तुलना में छोटे भाई-बहन मोबाइल-कंप्यूटर या टीवी जैसे स्क्रीन पर अधिक समय बिताते हैं। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण छोटे भाई-बहन अपने बौद्धिक विकास को बेहतर बनाने वाली गतिविधियों के लिए भी कम समय निकाल पाते हैं जिसका असर उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी पड़ सकता है।

बड़े भाई-बहनों की तुलना में छोटों का आईक्यू लेवल (मानसिक क्षमता, तर्कशक्ति) की कम हो सकती है।

younger siblings spend more time on screens than Bigger ones baccho ka screen time badhna
मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला?

इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ ऑस्ट्रेलियन चिल्ड्रन के डेटा का इस्तेमाल किया। इसमें 2-15 साल के लगभग 5,500 ऑस्ट्रेलियाई बच्चों का डेटा था। इसमें 24 घंटे की पूरी दिनचर्या शामिल थी, जिसमें बच्चे के जागने से लेकर सोने तक वो अपना समय कैसे बिताते हैं, इसकी सारी जानकारी थी।
 

  • शोधकर्ताओं ने एक ही साल में पैदा हुए, एक ही घर-पड़ोस में रहने वाले बच्चों की लाइफस्टाइल की तुलना बाद में पैदा हुए बच्चों से की।
  • इसमें पाया गया कि घर के छोटे बच्चों का स्क्रीन टाइम बड़े बच्चों की तुलना में कहीं ज्यादा था।
  • पहले पैदा हुए बच्चों की तुलना में, बाद के बच्चे हर दिन स्क्रीन टाइम पर 9-14 मिनट ज्यादा बिताते हैं। 
  • हालांकि यह मामूली लग सकता है, लेकिन यह स्क्रीन टाइम 7–10% की वृद्धि है। ये एक हफ्ते में लगभग एक से 1.5 घंटे के बीच होता है।
विज्ञापन
younger siblings spend more time on screens than Bigger ones baccho ka screen time badhna
बढ़ता स्क्रीन टाइम सेहत के लिए नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी माता-पिता को किया सावधान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते हैं कि यह एक्स्ट्रा स्क्रीन टाइम, दूसरी शारीरिक गतिविधियों जैसे बाहर खेल-कूद, दोस्तों से मिलते-जुलने की कीमत पर भी आता है। जब स्कूल, फिजिकल एक्टिविटी या नींद जैसी दूसरी चीजों में कमी आती तो इसका असर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर पड़ता है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले और बाद के बच्चों के बीच स्क्रीन टाइम का बढ़ते अंतर का एक आम कारण माता-पिता का समय भी है। जैसे-जैसे परिवार बढ़ते हैं, माता-पिता के पास बाद के बच्चों के विकास पर ध्यान देने के लिए कम समय होता है।

एक्सपर्ट्स कहते हैं, स्क्रीन टाइम में जो अंतर हमें मिला है, वे किसी भी दिन के लिए कम लग सकते हैं लेकिन दीर्घकालिक रूप से ये बहुत बड़े नुकसान का कारण हैं। बाद में पैदा हुए बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ना उन्हें ऑनलाइन गलत कंटेंट के संपर्क में ला सकता है, जिससे उनके बौद्दिक विकास में भी फर्क देखने को मिल सकता है।



---------------------------
स्रोत:
The effect of birth order on children’s time use

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed