लाइफस्टाइल, आहार में गड़बड़ी और पर्यावरणीय परिस्थितियों के चलते डायबिटीज, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां काफी आम होती जा रही हैं। देश में एक और बड़ी समस्या तेजी से उभर रही है, वह है इंफर्टिलिटी की दिक्कत।
Health Risk: भारत में हर 6 में से 1 कपल इंफर्टिलिटी से परेशान, क्या डाइट में सुधार करके पा सकते हैं लाभ?
बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, तनाव और हार्मोनल असंतुलन इंफर्टिलिटी के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डाइट में सुधार करके इंफर्टिलिटी में लाभ पाया जा सकता है?
देश में बढ़ती इंफर्टिलिटी की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इंफर्टिलिटी वह स्थिति है जब एक साल तक नियमित यौन संबंध के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता।
- मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि लगभग 40% मामलों में पुरुष कारण होते हैं, 40% में महिलाएं और बाकी मामलों में दोनों या अज्ञात कारण जिम्मेदार होते हैं।
- समय पर जांच और सही जानकारी के अभाव में यह समस्या मानसिक तनाव, वैवाहिक संबंधों में दिक्कत और सामाजिक कलंक का कारण भी बनती है।
तेजी से बदलती जीवनशैली इंफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण है। जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी वाली चीजें और ट्रांस फैट से हार्मोनल संतुलन बिगाड़ता है, जो इंफर्टिलिटी का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
क्या डाइट से ठीक होती है इंफर्टिलिटी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इनफर्टिलिटी की समस्या को डाइट से ठीक नहीं किया जा सकता है, हालांकि कुछ खास खाद्य पदार्थ प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद जरूर कर सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिनस-माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे पोषक तत्व हैं जो ओव्यूलेशन को बढ़ाते हैं या स्पर्म की क्वालिटी में सुधार करते हैं। हालांकि ये बांझपन का इलाज नहीं है।
डाइट उन कारकों को ठीक करने में जरूर मददगार हो सकती है, जो बांझपन को बढ़ाने वाले होते हैं।
अखरोट खाना फायदेमंद
कई अध्ययनों से पता चलता है कि अखरोट में मौजूद पोषक तत्वों में ऐसे गुण हो सकते हैं जो ओव्यूलेशन को बढ़ाते हैं और स्पर्म को स्वस्थ रखते है। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आपके गर्भधारण की संभावना को बढ़ाते हैं। अखरोट में विटामिन-ई भी होता है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट है जो स्पर्म काउंट और मोटिलिटी (गति) बढ़ाने में मदद करता है।
अखरोट और पुरुषों की फर्टिलिटी पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि तीन महीने तक रोजाना एक मुट्ठी (लगभग 42 ग्राम) अखरोट खाने से स्पर्म क्वालिटी में सुधार हुआ।
टमाटर को भी करिए डाइट में शामिल
टमाटर विटामिन ए और सी का अच्छा स्रोत है। इनमें लाइकोपीन भी होता है, जो एक फाइटोकेमिकल है जो कई लाल फलों और सब्जियों को उनका रंग देता है। लाइकोपीन स्पर्म काउंट और मूवमेंट को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है।
खट्टे फल भी खाएं
खट्टे फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं, जो एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट है। ये स्पर्म पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इनमें पॉलीमाइन भी अधिक मात्रा में होते हैं, ये ऐसे कंपाउंड हैं जो पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए प्रजनन प्रक्रिया के लिए जरूरी हैं।नींबू, संतरे, कीनू को डाइट में शामिल करके आप बेहतर स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं।
डेयरी उत्पाद आपके लिए लाभकारी
अगर आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं तो डेयरी उत्पादों को भी आहार का हिस्सा बनाएं। इनमें विटामिन ए, ई और डी की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो अच्छी सेहत और प्रजनन स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है। इससे आपको जरूर कैल्शियम और प्रोटीन भी मिलता है जो शरीर को फिट और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
---------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
