डायबिटीज, वैश्विक स्तर पर बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों में से एक है। भारत के नजरिए से बात करें तो यहां यह खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओ की टीम ने देश में टाइप-1डायबिटीज के बढ़ते जोखिम को लेकर लोगों को अलर्ट किया है।द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक मॉडलिंग अध्ययन के मुताबिक साल 2021 में दुनियाभर में अनुमानित 84 लाख लोग इस प्रकार के डायबिटीज के शिकार हैं, 2040 तक यह संख्या बढ़कर 1.50 करोड़ से अधिक होने की आशंका है। भारत इस डायबिटीज के बढ़ते खतरे वाले शीर्ष 10 देशों में से एक है।
Health Tips: भारत में बढ़ रहा है टाइप-1 डायबिटीज का खतरा, इन लक्षणों से करिए समय रहते समस्या की पहचान
टाइप-1 डायबिटीज के बारे में जानिए?
टाइप-1 डायबिटीज, एक क्रोनिक समस्या है जिसमें अग्न्याशय बहुत कम या फिर बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता है। इंसुलिन एक हार्मोन है जिसका उपयोग शरीर, ग्लूकोज से ऊर्जा पैदा करने के लिए कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए करता है। टाइप-1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है। इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए उपचार के तौर पर इंसुलिन शॉट्स देने, आहार और जीवनशैली को ठीक रखने पर जोर दिया जाता है। आनुवंशिकता जैसे विभिन्न कारक टाइप 1 मधुमेह का कारण हो सकते हैं। टाइप-1 मधुमेह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान प्रकट होता है।
डायबिटीज में क्या किया जाना चाहिए?
टाइप-1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है। इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता होती है। समय के साथ मधुमेह की जटिलताएं शरीर के प्रमुख अंगों को प्रभावित कर सकती हैं। इन अंगों में हृदय, रक्त वाहिकाएं, तंत्रिकाएं, आंखे और गुर्दे शामिल हैं। रक्त शर्करा का स्तर सामान्य होने से इस तरह की कई जटिलताओं का खतरा कम हो सकता है। इंसुलिन के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव के आधार पर इसके लक्षणों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
टाइप-1 डायबिटीज की पहचान
टाइप-1 डायबिटीज आमतौर पर किशोरावस्था के दौरान नजर आती है, हालांकि, यह वयस्कों को भी प्रभावित कर सकती है। इसके भी ज्यादातर लक्षण टाइप-2 डायबिटीज से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इनकी समय रहते पहचान कर उचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करनी आवश्यक हो जाती है। ऐसे लक्षणों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
- सामान्य से अधिक प्यास या भूख लगना।
- बार-बार पेशाब जाना।
- बिना किसी बीमारी के वजन घटना।
- चिड़चिड़ापन महसूस होना या मूड में अन्य बदलाव।
- थका हुआ और कमजोर महसूस करना।
- धुंधला नजर आना।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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