Obesity in Children: भारत में बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, और ये एक गंभीर समस्या बन रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विश्वभर में 124 मिलियन बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित हैं। भारत में भी शहरी क्षेत्रों में बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है, जिसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें मुख्य कारणों की बात की जाए तो अनहेल्दी खानपान, सेडेंटरी जीवनशैली और स्क्रीन टाइम का अधिक उपयोग प्रमुख कारण हैं।
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आज के समय में भारत में छोटे बच्चों में मोटापे की समयस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। कई बार ये मोटापा गंभीर बीमारियों का कारण भी बनता है, इसलिए इसे कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। बच्चों के मोटापे को नियंत्रित करने के दौरान माता-पिता को कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
संतुलित और पौष्टिक आहार
बच्चों के खानपान में संतुलित आहार शामिल करना बेहद जरूरी है। जंक फूड, शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। इसके बजाय, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन जैसे अंडे, दालें और कम फैट वाले डेयरी उत्पादों को प्राथमिकता दें।
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नियमित शारीरिक गतिविधि
बच्चों में मोटापे का एक बड़ा कारण है शारीरिक गतिविधि की कमी। सीडीसी के अनुसार, 6-17 वर्ष के बच्चों को रोजाना कम से कम 60 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसके लिए बच्चों को खेल, साइकिलिंग, डांस या पार्क में दौड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। परिवार के साथ सैर या आउटडोर गेम्स जैसे बैडमिंटन खेलें।
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स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण
टीवी, मोबाइल और वीडियो गेम्स पर ज्यादा समय बिताना मोटापे का एक कारण ये भी हो सकता है, क्योंकि यह सेडेंटरी जीवनशैली को बढ़ावा देता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक 2-5 साल के बच्चों के लिए 1-2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम की सलाह नहीं देता।
नींद की कमी मोटापे का एक बड़ा कारण है। अपर्याप्त नींद हार्मोन्स को प्रभावित करती है, जिससे भूख बढ़ती है और बच्चे ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं। बच्चों के नियमित सोने का समय निर्धारित करें और सोने से 2 घंटे पहले स्क्रीन टाइम बंद करें। बच्चों में मोटापा एक जटिल और गंभीर समस्या है, लेकिन माता-पिता छोटे-छोटे बदलावों से इसे काफी हद तक रोक सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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