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कामयाबी: पार्किंसंस रोग से जंग में बड़ी सफलता, दुनिया में पहली बार इस खास तरीके के इलाज को मिली मंजूरी

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 06 Mar 2026 07:56 PM IST
सार

जापान ने पार्किंसंस और गंभीर हार्ट फेलियर के लिए नए स्टेम-सेल थेरेपी को मंजूरी दे दी है। ये इलाज कुछ ही महीनों में मरीजों तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। आइए इस थेरेपी के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

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Japan approved stem-cell treatments for Parkinson and severe heart failure for the first time in world
पार्किंसंस के इलाज के लिए स्टेम-सेल थेरेपी को मंजूरी - फोटो : Adobe Stock Photo

दुनियाभर की स्वास्थ्य सेवाओं पर जिन बीमारियों के कारण साल-दर-साल अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां उनमें से एक हैं। पार्किंसन ऐसी ही एक बीमारी है, जो मुख्य रूप से डोपामाइन बनाने वाले ब्रेन सेल्स के डेड होने से होती है। इस रोग में मूवमेंट से जुड़े लक्षण जैसे कंपकंपी, बहुत धीरे चल पाने और शरीर में अक्सर अकड़न बने रहने की दिक्कत होती है। अभी तक पार्किंसन रोग का कोई इलाज उपलब्ध नहीं था, इसके लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए दवाइयां और उपचार दिए जाते थे।


 

  • हालांकि अब इस दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। जापान ने दुनिया में पहली बार पार्किंसंस रोगियों के इलाज के लिए नए स्टेम-सेल थेरेपी को मंजूरी दे दी है। ये रीजेनरेटिव मेडिसिन में एक बड़ी उपलब्धि है।
  • इसके साथ ही  जापानी सरकार ने गंभीर हार्ट फेलियर के लिए भी ऐसे ही इलाज को मंजूरी दी है। 
  • ये इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम (iPS) सेल पर आधारित दुनिया के पहली कमर्शियली उपलब्ध मेडिकल प्रोडेक्ट बन सकते हैं।


विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि ये थेरेपी कुछ ही महीनों में मरीजों तक पहुंच जाएंगी। एडवांस्ड बायोमेडिकल इनोवेशन के क्षेत्र में ये जापान की बढ़ती लीडरशिप को भी दिखाता है।

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पार्किंसन रोग का बढ़ता जा रहा है खतरा - फोटो : Amarujala.com

पार्किंसंस बीमारी के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी

जापान की दवा बनाने वाली कंपनी सुमितोमो फार्मा को पार्किंसंस के इलाज के लिए एमचेप्री नाम की दवा बनाने और बेचने की मंजूरी मिल गई है। इस थेरेपी में लैब में तैयार किए गए स्टेम सेल को सीधे मरीज के दिमाग में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। ये स्टेम सेल डोपामाइन बनाने वाले न्यूरॉन्स को ठीक करने में मददगार हो सकते हैं। 
 

  • पार्किंसंस बीमारी में, ये न्यूरॉन्स धीरे-धीरे खराब होते जाते हैं जिसकी वजह से कंपकंपी, अकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत जैसे लक्षण होते हैं।
  • इलाज का मकसद इन खराब सेल्स को बदलकर डोपामाइन का प्रोडक्शन ठीक करना और मोटर फंक्शन को बेहतर बनाना है।
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पार्किंसन रोगियों के इलाज के लिए स्टेम-सेल थेरेपी - फोटो : adobe stock images

क्लिनिकल ट्रायल में देखे गए अच्छे परिणाम

जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में इसका क्लिनिकल टेस्ट किया गया था। इस ट्रायल में 50 से 69 साल के सात पार्किंसंस रोगी शामिल थे। हर मरीज के दिमाग में  इस नए स्टेम-सेल से बने न्यूरॉन्स लगाए गए।
 

  • इस प्रक्रिया के बाद दो साल तक प्रतिभागियों पर नजर रखी गई। सात में से चार प्रतिभागियों के लक्षणों में काफी सुधार दिखा। 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, क्लिनिकल टेस्ट से पता चलता है स्टेम-सेल-बेस्ड इंटरवेंशन न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को मैनेज करने का एक अच्छा तरीका बन सकता है।
  • हालांकि अध्ययन का सैंपल साइज अभी बहुत छोटा है, इसका विस्तृत तरीके से ट्रायल किया जाना बाकी है।


यह थेरेपी इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल्स (iPS) पर आधारित है, इसकी खोज जापानी साइंटिस्ट शिन्या यामानाका ने की थी जिसके लिए उन्हें  2012 में नोबेल प्राइज मिला था। 

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हार्ट फेलियर के मरीजों का इलाज - फोटो : Adobe Stock Photos

हार्ट फेलियर के इलाज को भी मंज़ूरी मिली

पार्किंसंस बीमारी के लिए स्टेम-सेल ट्रीटमेंट को मंजूरी के साथ हार्ट फेलियर के लिए भी ऐसी ही थेरेपी को मंजूर किया गया है।
 

  • जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल स्टार्टअप क्यूओरिप्स द्वारा बनाई दूसरी रीजेनरेटिव थेरेपी रीहार्ट को भी मंजूरी दी है। 
  • इसमें स्टेम सेल से बनी हार्ट मसल सेल्स का इस्तेमाल होता है, जिन्हें हृदय की सतह पर लगाया जाता है।
  • ये सेल्स नई ब्लड वेसल बनाने और गंभीर हार्ट फेलियर वाले मरीजों में कार्डियक फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। 



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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