जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर शुक्रवार को जानलेवा हमला हुआ, जिससे उनकी मृत्यु हो गई है। नारा शहर में वह एक सभा को संबोधित कर रहे थे इसी दौरान हमलावरों ने उनपर गोली चला दी। दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक माने जाने वाले जापान में ऐसा हमला हैरान करने वाला है। गोली लगने के बाद उन्हें हार्ट अटैक भी आया था। पूर्व प्रधानमंत्री पर इस तरह के हमले ने कई तरह के सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिंजो आबे जापान में सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री रहे। अगस्त 2020 में उन्होंने स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।
Shinzo Abe: इस गंभीर बीमारी से भी पीड़ित थे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री, इसी वजह से पद से दे दिया था इस्तीफा
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अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है?
अल्सरेटिव कोलाइटिस, क्रोनिक इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) की स्थिति है जिसमें पाचन तंत्र में सूजन और अल्सर (घाव) बन जाती है। अल्सरेटिव कोलाइटिस आपकी बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय की अंदरूनी परत को प्रभावित करता है। अल्सरेटिव कोलाइटिस के कुछ मामले गंभीर और जानलेवा भी हो सकते हैं। समय पर इसके लक्षणों की पहचान कर इलाज करना आवश्यक हो जाता है।
किस तरह के होते हैं लक्षण?
अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण इसकी गंभीरता के आधार पर अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं। सामान्यतौर पर इसमें दस्त और दस्त के साथ रक्त या मवाद आने की समस्या, पेट में दर्द और ऐंठन, बार-बार शौच की आवश्यकता, वजन घटना, थकान और अक्सर बुखार बने रहने की दिक्कत देखी जाती है। अधिकांश लोगों में हल्के से मध्यम लक्षण होते हैं। कुछ लोगों में यह लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या भी हो सकती है।
किन्हें होता है इसका अधिक खतरा?
अल्सरेटिव कोलाइटिस क्यों होता है, इसका सटीक कारण विशेषज्ञों को नहीं पता है, हालांकि माना जाता रहा है कि प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी के कारण इसका खतरा हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की स्थिति में वायरस या जीवाणु पाचन तंत्र में कोशिकाओं पर भी हमला कर देते हैं जो इस तरह की समस्याओं का कारण बनती है। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इसमें आनुवंशिकता की भी भूमिका हो सकती है, ऐसे जोखिम कारकों से बचाव करते रहना आवश्यक माना जाता है।
अल्सरेटिव कोलाइटिस का क्या इलाज है?
अल्सरेटिव कोलाइटिस के इलाज में रोग की स्थिति और लक्षणों के आधार पर उपचार माध्यमों को प्रयोग में लाया जाता है। सामान्यतौर पर दवाइयों के माध्यम से इसे ठीक करने का प्रयास किया जाता है, हालांकि गंभीर स्थितियों में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है। दवाइयां बीमारी को बढ़ने से रोकने और लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। विशेषज्ञ सभी लोगों को इस बीमारी के जोखिमों को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।