ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी वैश्विक स्तर पर एक गंभीर बीमारी बनी हुई है। ये किसी भी उम्र में यानी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक टीबी अभी भी संक्रामक बीमारियों से मौत का शीर्ष कारण बनी हुई है।
World TB Day 2026: खांसी-कमजोरी नहीं है फिर भी हो सकती है टीबी? जानिए फिर कैसे करें बीमारी की पहचान
World TB Day 2026: ट्यूबरकुलोसिस के बैक्टीरिया आपको बीमार किए बिना, लंबे समय तक आपके शरीर में रह सकते हैं। इसे इनएक्टिव टीबी या लेटेंट टीबी इन्फेक्शन' कहा जाता है। जिन लोगों को इनएक्टिव टीबी होता है, उनमें कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। फिर ऐसे लोगों में बीमारी की पहचान कैसे की जाए?
टीबी की बीमारी और इसका खतरा
टीबी रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने, टीबी की वैश्विक महामारी और इस बीमारी को खत्म करने के प्रयासों को और तेज करने के उद्देश्य से हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है।
टीबी में आमतौर पर तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी, बलगम या खून के साथ खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होने और थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कई लोग इन संकेतों को सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। चिंता की बात यह है कि कई मामलों में टीबी बिना लक्षणों के भी हो सकती है।
कुछ मामलों में टीबी का बैक्टीरिया शरीर में मौजूद तो रहता है, लेकिन आप बीमार महसूस नहीं करते। इस तरह की टीबी को लेटेंट या इनएक्टिव टीबी कहा जाता है।
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लेटेंट टीबी का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया की लगभग 25-30% आबादी लेटेंट टीबी से प्रभावित है, ऐसे लोगों में भविष्य में बैक्टीरिया के सक्रिय होने और टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है।
भले ही यह इन्फेक्शन निष्क्रिय हो, लेकिन10% मामलों में यह आगे चलकर संक्रामक टीबी रोग का कारण बन सकता है। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है ऐसे लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
लेटेंट टीबी वाले मरीजों के शरीर में टीबी के बैक्टीरिया बहुत हल्की मात्रा में होते हैं। ये जीवित तो होते हैं, लेकिन निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं।
- ऐसे लोगों में टीबी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और वे बीमार महसूस नहीं करते।
- अच्छी बात ये है कि ऐसे लोगों से टीबी फैलने का खतरा भी नहीं होता है।
- आमतौर ऐसे लोगों में ब्लड टेस्ट से टीबी का पता चलता है।
बिना लक्षणों वाली टीबी क्यों होती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लेटेंट टीबी भी सामान्य टीबी की ही तरह होती है।
जब हम किसी संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आते हैं और माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है तो संक्रमण का खतरा रहता है।
बैक्टीरिया फेफड़ों में प्रवेश तो कर जाते हैं, लेकिन हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें नियंत्रित कर लेती है जिससे संक्रमण निष्क्रिय हो जाता है। यही कारण है कि ऐसे लोगों में टीबी के लक्षण नहीं दिखते और ये संक्रामक भी नहीं होता है।
फिर कैसे जानें कहीं आपको लेटेंट टीबी तो नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां टीबी के मामले ज्यादा हैं या फिर घर में किसी को टीबी है तो एहतियातन जांच करा लें।
- लेटेंट टीबी के मामलों में आमतौर पर चेस्ट एक्स-रे नेगेटिव या सामान्य होता है।
- हालांकि ऐसे लोगों का TST पॉजिटिव या टीबी का ब्लड टेस्ट पॉजिटिव आता है।
जिन लोगों में लेटेंट टीबी का पता चलता है उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, इसका कोर्स 9-10 महीनों तक चलता है। लेटेंट टीबी को एक्टिव टीबी बनने से रोकने के लिए समय रहते इलाज शुरू करना जरूरी है।
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स्रोत:
Clinical Overview of Latent Tuberculosis Infection
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