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World TB Day 2026: खांसी-कमजोरी नहीं है फिर भी हो सकती है टीबी? जानिए फिर कैसे करें बीमारी की पहचान

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 24 Mar 2026 04:41 PM IST
सार

World TB Day 2026: ट्यूबरकुलोसिस के बैक्टीरिया आपको बीमार किए बिना, लंबे समय तक आपके शरीर में रह सकते हैं। इसे इनएक्टिव टीबी या लेटेंट टीबी इन्फेक्शन' कहा जाता है। जिन लोगों को इनएक्टिव टीबी होता है, उनमें कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। फिर ऐसे लोगों में बीमारी की पहचान कैसे की जाए?

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ट्यूबरक्लोसिस की बीमारी - फोटो : Amarujala.com

ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी वैश्विक स्तर पर एक गंभीर बीमारी बनी हुई है। ये किसी भी उम्र में यानी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक टीबी अभी भी संक्रामक बीमारियों से मौत का शीर्ष कारण बनी हुई है।



टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, हालांकि यह शरीर के अन्य हिस्सों जैसे किडनी, लिम्फ नोड्स और दिमाग को भी प्रभावित कर सकती है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से टीबी की बीमारी आपकी हड्डियों को भी प्रभावित कर सकती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, टीबी के लक्षणों की अगर समय रहते पहचान कर ली जाए और इसका इलाज शुरू हो जाए तो इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि कई लोगों में टीबी बिना लक्षणों के भी होती है, फिर इसकी पहचान कैसे की जाए? 

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विश्व टीबी दिवस 2026 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

टीबी की बीमारी और इसका खतरा

टीबी रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने, टीबी की वैश्विक महामारी और इस बीमारी को खत्म करने के प्रयासों को और तेज करने के उद्देश्य से हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। 
 

टीबी में आमतौर पर तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी, बलगम या खून के साथ खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होने और थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कई लोग इन संकेतों को सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। चिंता की बात यह है कि कई मामलों में टीबी बिना लक्षणों के भी हो सकती है।


कुछ मामलों में टीबी का बैक्टीरिया शरीर में मौजूद तो रहता है, लेकिन आप बीमार महसूस नहीं करते। इस तरह की टीबी को लेटेंट या इनएक्टिव टीबी कहा जाता है। 


ये भी पढ़िए-  (दवा और इलाज मौजूद फिर भी क्यों नहीं रुक रही टीबी? टीबी मुक्त भारत में कहां आ रही बाधा)

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बिना लक्षणों के भी हो सकती है टीबी - फोटो : Adobe Stock

लेटेंट टीबी का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया की लगभग 25-30% आबादी लेटेंट टीबी से प्रभावित है, ऐसे लोगों में भविष्य में बैक्टीरिया के सक्रिय होने और टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है।

भले ही यह इन्फेक्शन निष्क्रिय हो, लेकिन10% मामलों में यह आगे चलकर संक्रामक टीबी रोग का कारण बन सकता है। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है ऐसे लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

लेटेंट टीबी वाले मरीजों के शरीर में टीबी के बैक्टीरिया बहुत हल्की मात्रा में होते हैं। ये जीवित तो होते हैं, लेकिन निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं।
 

  • ऐसे लोगों में टीबी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और वे बीमार महसूस नहीं करते।
  • अच्छी बात ये है कि ऐसे लोगों से टीबी फैलने का खतरा भी नहीं होता है।
  • आमतौर ऐसे लोगों में ब्लड टेस्ट से टीबी का पता चलता है।
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फेफड़ों की बीमारी का जोखिम - फोटो : Adobe Stock

बिना लक्षणों वाली टीबी क्यों होती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लेटेंट टीबी भी सामान्य टीबी की ही तरह होती है।  

जब हम किसी संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आते हैं और माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है तो संक्रमण का खतरा रहता है।

बैक्टीरिया फेफड़ों में प्रवेश तो कर जाते हैं, लेकिन हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें नियंत्रित कर लेती है जिससे संक्रमण निष्क्रिय हो जाता है। यही कारण है कि ऐसे लोगों में टीबी के लक्षण नहीं दिखते और ये संक्रामक भी नहीं होता है।

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फेफड़े की बीमारी के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

फिर कैसे जानें कहीं आपको लेटेंट टीबी तो नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां टीबी के मामले ज्यादा हैं या फिर घर में किसी को टीबी है तो एहतियातन जांच करा लें।
 

  • लेटेंट टीबी के मामलों में आमतौर पर चेस्ट एक्स-रे नेगेटिव या सामान्य होता है।
  • हालांकि ऐसे लोगों का TST पॉजिटिव या टीबी का ब्लड टेस्ट पॉजिटिव आता है।


जिन लोगों में लेटेंट टीबी का पता चलता है उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, इसका कोर्स 9-10 महीनों तक चलता है। लेटेंट टीबी को एक्टिव टीबी बनने से रोकने के लिए समय रहते इलाज शुरू करना जरूरी है।



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स्रोत: 
Clinical Overview of Latent Tuberculosis Infection

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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