ऑफिस में घंटों बैठकर काम करते रहना बहुत आम है, पर क्या आप जानते हैं कि ये लंबे समय में आपके लिए ऐसी मुसीबतें खड़ी करने वाली हो सकती है जिसका अंदाजा भी नहीं होगा। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से लंबे समय तक बैठे रहना आपके दिल की सेहत से लेकर मेटाबॉलिज्म और नसों को नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है?
Health Alert: ऑफिस में घंटों बैठने वालों के लिए बड़ी चेतावनी, आप भी न हो जाएं स्लिप डिस्क का शिकार?
स्लिप डिस्क रीढ़ की दो हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति है। डिस्क का बाहरी रेशेदार हिस्सा फटने या कमजोर होने पर अंदर का जैली जैसा पदार्थ बाहर निकल सकता है।
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पहले जानिए स्लिप डिस्क होती क्या है?
रीढ़ की दो हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क में होने वाले डैमेज को स्लिप डिस्क या प्रोलैप्स्ड डिस्क कहा जाता है।
- रीढ़ की हड्डियों के बीच गद्दीनुमा डिस्क होती है जो अगर अपनी जगह से खिसक जाए या फट जाए तो पास की नसों पर दबाव बढ़ने लगता है।
- नसों पर पड़ने वाले दबाव के कारण तेज दर्द और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।
क्यों होती है स्लिप डिस्क की समस्या?
डिस्क के घिसने को इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इसके अलावा गलत मुद्रा में बैठना, अचानक भारी वजन उठाना, लंबे समय तक झुककर काम करना भी स्लिप डिस्क को बढ़ा सकता है।
मोटापा, धूम्रपान करने वालों और शारीरिक रूप से कम मेहनत करने वालों में भी ये दिक्कत ज्यादा देखी जाती है। बार-बार रीढ़ पर दबाव पड़ने से डिस्क कमजोर हो जाती है। खेलों या सड़क दुर्घटनाओं जैसी चोटें भी स्लिप डिस्क का कारण बन सकती हैं।
- स्लिप डिस्क के कारण कमर में तेज दर्द होता है। कई बार ये दर्द नितंब, जांघ और पैर तक फैल सकता है।
- कई मरीजों को पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है।
- लंबे समय तक बैठने, खांसने या छींकने पर दर्द बढ़ सकता है।
स्लिप डिस्क हो जाए तो क्या करें?
फिजियोथेरेपिस्ट कहते हैं, स्लिप डिस्क को अगर शुरुआत में ही समझ लिया जाए तो दवा और थेरेपी के जरिए इस समस्या को कम किया जा सकता है।
- डॉक्टर दर्द और सूजन घटाने वाली दवाएं दे सकते हैं।
- फिजियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी लाभ पहुंचा सकते हैं।
- कुछ मरीजों में एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।
डॉक्टर कहते हैं सही मुद्रा में बैठना, भारी वजन उठाते समय सावधानी और नियमित व्यायाम करना स्लिप डिस्क से बचाव के लिए जरूरी हैं। लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें और हर 30-45 मिनट वॉक करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।