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Laughing Epilepsy: दिमाग की ऐसी बीमारी जिसमें ज्यादा हंसी भी बन जाती है मुसीबत, आखिर क्या है जेलास्टिक सीजर

Sun, 26 Jul 2026 01:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 26 Jul 2026 01:40 PM IST
सार

क्या बिना वजह हंसना भी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है? जानिए जेलास्टिक सीजर के बारे में जिसमें मरीज को हंसी आती रहती है, पर लोग इसे समझ ही नहीं पाते।

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बिना वजह हंसी आने की समस्या- एपिलेप्सी - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

मिर्गी का दौरा यानी एपिलेप्सी को दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्या के रूप में जाना जाता है, आपने अपने आस-पास किसी में कभी न कभी ये समस्या जरूर देखी होगी। मिर्गी की दौरे में मरीज अचानक गिर जाता है, शरीर कांपने लगता है और हाथ-पैरों में झटके आने लगते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि एपिलेप्सी कई और तरह की भी हो सकती है। बिना किसी वजह के अचानक हंसी आना और फिर हंसते ही रहना भी ऐसी ही एक स्थिति है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते रहे हैं।

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सुनने में यह अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन जेलास्टिक सीजर या लाफिंग सीजर नाम की बीमारी में ऐसा ही होता है। इस बीमारी में व्यक्ति अचानक जोर-जोर से हंसने लगता है, जबकि न तो उसके सामने कोई जोक कर रहा होता है और न ही वह वास्तव में खुश होता है। कई बार आसपास मौजूद लोग इसे मजाक, शरारत या अजीब आदत समझ लेते हैं, जबकि असलियत इससे बिल्कुल अलग होती है।
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मेडिकल साइंस के अनुसार जेलास्टिक सीजर दरअसल एक दुर्लभ प्रकार का सीजर है, जो दिमाग के एक हिस्से में होने वाली असामान्य इलेक्ट्रिकल गतिविधि के कारण होता है। यह हंसी कुछ सेकंड तक रह सकती है और कई बार भी हो सकती है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान मरीज को खुद भी समझ नहीं आता कि वह क्यों हंस रहा है?
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तो अगर आपके आसपास भी किसी व्यक्ति को ये दिक्कत हो रही है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। 

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लास्टिक सीजर में हंसने की समस्या - फोटो : Freepik.com

हंसने वाली मिर्गी की समस्या

इसी साल अप्रैल के महीने में एम्स जोधपुर में लाफिंग सीजर के चार लोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया था। डॉक्टरों ने हंसने वाली मिर्गी की इस बीमारी से पीड़ित चार बच्चों का मिनिमली इनवेसिव ब्रेन प्रोसीजर से सफलतापूर्वक इलाज करके उन्हें ठीक किया था।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ये एक बहुत ही दुर्लभ स्थिति है।
 

  • आंकड़ों के अनुसार, यह मिर्गी से पीड़ित 0.8% से भी कम लोगों में होती है।
  • इसमें आमतौर पर बिना किसी खास वजह के, कुछ मिनट तक हंसी आती रहती है।
  • कई लोगों को दौरे के समय डर, बेचैनी या सीने और पेट में अजीब-सा एहसास होता है, लेकिन बाहर से देखने वाले लोगों को लगता है कि वह खुशी से हंस रहा है।
  • यही वजह है कि इस बीमारी की पहचान अक्सर देर से हो पाती है।

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बिना वजह के हंसने की समस्या - फोटो : Freepik.com

जेलास्टिक सीजर के कारण होने वाली समस्याएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर कोई व्यक्ति अचानक बिना किसी वजह के जोर-जोर से हंसने लगे तो आसपास मौजूद लोग शायद इसे उसकी मस्ती, अच्छा मूड या मजाक समझेंगे। लेकिन हर हंसी खुशी की निशानी नहीं होती। कई बार यह दिमाग में होने वाली गंभीर गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है।

जेलास्टिक सीजर एक दुर्लभ प्रकार का फोकल सीजर है। फोकल सीजर का मतलब है कि दौरा पूरे दिमाग में नहीं बल्कि दिमाग के किसी एक हिस्से से शुरू होता है। इसके उलट सामान्य दौरे पूरे मस्तिष्क को एक साथ प्रभावित करते हैं।
 

  • इस दौरान व्यक्ति अचानक हंसने या खिलखिलाने लगता है, जबकि उसके मन में खुशी जैसी कोई भावना नहीं होती। 
  • कई बार यह हंसी बनावटी या अजीब लगती है और ऐसे समय भी आ सकती है, जब हंसने की कोई वजह नहीं होती। 
  • आमतौर पर यह दौरा 30-60 सेकंड तक रहता है, लेकिन कुछ लोगों को दिनभर में कई बार ऐसे दौरे पड़ सकते हैं।

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ब्रेन में गड़बड़ी की समस्या - फोटो : Adobe Stock

आखिर क्यों होती है ये दिक्कत?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दौरे पड़ने का सबसे आम कारण मिर्गी है।
 

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब एक-तिहाई मामलों में इसकी वजह हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा होती है। यह दिमाग के हाइपोथैलेमस नाम के हिस्से के पास मौजूद जन्मजात गैर-कैंसर वाली गांठ होती है।
  • हाइपोथैलेमस शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों को नियंत्रित करता है, जैसे शरीर का तापमान, भूख-प्यास, हार्मोन का संतुलन और नींद। जब इस हिस्से में समस्या होती है, तो असामान्य इलेक्ट्रिकल गतिविधि शुरू हो सकती है, जिससे जेलास्टिक सीजर आने लगते हैं।


करीब एक-तिहाई मरीजों में यह समस्या दिमाग के फ्रंटल या टेम्पोरल लोब में हुई किसी गड़बड़ी की वजह से भी हो सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में ब्रेन इंफेक्शन जैसे दिमाग में संक्रमण भी इसका कारण बन सकता है।

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लाफिंग सीजर की दिक्कत कैसे ठीक करें? - फोटो : Adobe Stock

किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

यह बीमारी बेहद दुर्लभ है और अधिकतर मामलों की पहचान बचपन में होती है। चूंकि हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा जन्म से मौजूद होता है, इसलिए इससे जुड़े जेलास्टिक सीजर अक्सर शिशु या छोटे बच्चों में दिखाई देने लगते हैं। अगर इसकी वजह दिमाग के किसी दूसरे हिस्से की समस्या हो, तो यह किशोरावस्था या वयस्क उम्र में भी शुरू हो सकता है। 

शिशु और छोटे बच्चों में इस बीमारी को पहचानना आसान नहीं होता, क्योंकि उनकी हंसी सामान्य व्यवहार का हिस्सा होती है। लेकिन यदि बच्चा बार-बार बिना वजह हंसने लगे, अजीब तरीके से शरीर मरोड़े  दौरे के बाद थका और भ्रमित दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
 

  • ये समस्या  करीब 60 से 65 प्रतिशत मरीजों में सीखने-समझने की क्षमता प्रभावित कर सकती है। कई लोगों में चिंता, गुस्सा, मूड से जुड़ी समस्याएं और व्यवहार में बदलाव भी देखने को मिलते हैं।
  • बच्चों में यह बीमारी समय से पहले यौवन का कारण भी बन सकती है, क्योंकि हाइपोथैलेमस जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाना शुरू कर देता है। 



किसी को जेलास्टिक सीजर आए तो क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति को जेलास्टिक सीजर आए तो घबराने की जरूरत नहीं है। दौरे को बीच में रोका नहीं जा सकता। ऐसे में मरीज को सुरक्षित जगह पर रखें, उसे चोट लगने से बचाएं और दौरा खत्म होने तक उसके साथ रहें।
 

  • यदि पहली बार ऐसा दौरा पड़ा है या बार-बार बिना वजह हंसने की घटना हो रही है, तो जल्द से जल्द न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
  • शोध बताते हैं कि यदि हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा को सर्जरी से हटा दिया जाए, तो कई मरीजों में दौरे कम हो जाते हैं और व्यवहार संबंधी समस्याओं में भी सुधार देखने को मिलता है। इसलिए समय रहते डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए।




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स्रोत:
Gelastic and Dacrystic Seizures


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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