सांस को जीवन का आधार माना जाता है। हर सांस के साथ हमें प्राणवायु ऑक्सीजन मिलती है जो शरीर के सभी अंगों के ठीक तरीके से काम करते रहने के लिए जरूरी है। पर क्या हो अगर आपको सांस लेने में ही दिक्कत होने लगे? अस्थमा जैसी बीमारियों में लोगों को इसी तरह की दिक्कतें होती हैं।
Asthma Risk: छाती में जकड़न और सांस फूल रहा है तो सावधान, जानिए अस्थमा अटैक होने पर तुरंत क्या करें
अस्थमा एक गंभीर श्वसन रोग है जिसमें फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली नलियां यानी एयरवे सूज जाती हैं और उनमें संकुचन होने लगता है। इससे सांस लेना कठिन होने लगता है।
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अस्थमा की समस्याएं
डॉक्टर कहते हैं, कुछ लोगों को मौसम बदलने पर और व्यायाम के दौरान, जबकि कुछ मरीजों में रात और सुबह के समय सांस की दिक्कतें ज्यादा महसूस हो सकती हैं।
अस्थमा होने का कोई एक कारण नहीं होता। आनुवंशिकता के अलावा पर्यावरणीय स्थितयां आपको इसका शिकार बना सकती हैं। यदि परिवार में अस्थमा, एलर्जी, एक्जिमा या एलर्जिक राइनाइटिस का इतिहास हो, तो जोखिम बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अस्थमा के मरीजों को अपने ट्रिगर को पहचानना जरूरी है। यदि पता चल जाए कि किन परिस्थितियों में सांस की समस्या बढ़ जाती है, तो उन कारकों से बचकर अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है।
कैसे जानें अस्थमा का अटैक तो नहीं?
अस्थमा की समस्या कई बार सूखी खांसी, सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने, छाती में भारीपन जैसे संकतों के साथ हो सकती है।
अस्थमा अटैक अचानक भी हो सकता है और धीरे-धीरे भी बढ़ सकता है। कुछ संकेत बताते हैं कि स्थिति बिगड़ रही है। इनमें बोलते समय सांस टूटना, बहुत तेज सांस चलना, छाती का अधिक जकड़ना, बार-बार रेस्क्यू इनहेलर की जरूरत पड़ना, और सामान्य काम करते समय भी सांस फूलना शामिल हैं।
ऐसे संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है। जितनी जल्दी उचित उपचार शुरू किया जाए, उतनी बेहतर रिकवरी की संभावना रहती है।
अस्थमा अटैक हो जाए तो तुरंत क्या करें
अगर किसी को अस्थमा अटैक है तो कुछ बातों का गंभीरता से ध्यान दें।
- सबसे पहले मरीज को सीधा बैठाएं। लेटाने से सांस लेना और मुश्किल हो सकता है। उसे धीरे-धीरे लंबी सांस लेने के लिए कहें।
- डॉक्टर द्वारा दिए गए इनहेलर का तुरंत इस्तेमाल करें । ये दवा को फेफड़ों तक बेहतर पहुंचाने में मदद करता है।
- इसके बाद मरीज की स्थिति पर नजर रखें।
- यदि कुछ मिनटों में आराम न मिले, सांस तेजी से बिगड़ रही हो या होंठ नीले पड़ने लगें तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लें।
कौन सी सावधानियां जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्थमा के मरीजों को मौसम बदलने पर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ठंडी-शुष्क हवा से बचाव लक्षण कम कर सकता है। इसके अलावा नियमित व्यायाम करते रहें इससे फेफड़ों को मजबूती मिलती है।
- अच्छी नींद, संतुलित आहार और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का नियमित उपयोग लंबे समय तक बीमारी को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।