मानसून के दिनों में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बारिश और मौसम में बढ़ी नमी, मच्छरों और कई अन्य कीट-पतंगों को बढ़ा देती है, जिनसे संक्रामक बीमारियों का जोखिम हो सकता है। जून-जुलाई के महीने में गुजरात में चांदीपुरा वायरस के प्रकोप देखा गया। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने 12 जुलाई तक तीन बच्चों की मौत के बारे में जानकारी दी थी। गुजरात के बाद अब राजस्थान में भी चांदीपुरा वायरस दस्तक दे रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां दो बच्चों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट पर है।
Chandipura virus: गुजरात के बाद अब राजस्थान में चांदीपुरा वायरस की दस्तक, बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा
चांदीपुरा वायरस रैब्डोविरिडी फैमिली का वायरस है। इसकी पहचान 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। हाल के दिनों में गुजरात में इसके मामले तेजी से बढ़ते रिपोर्ट किए गए थे। अब राजस्थान में भी इसका खतरा देखा जा रहा है।
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पहले राजस्थान के हालात जान लेते हैं
राजस्थान-गुजरात सीमा पर चांदीपुरा वायरस का खौफ देखा जा रहा है।
- डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा उपखंड स्थित रतनपुरा गांव की एक बच्ची की 15 जुलाई को मौत हो गई थी। उसकी मौत का कारण चांदीपुरा वायरस संक्रमण बताया गया।
- इसके बाग सिरोही जिले में भी एक बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।
- इससे पहले गुजरात के गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहल जिलों में भी इस वायरस के मामले सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञ सैंड फ्लाई को संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण मानते हैं। बरसात के दिनों में नमी, गंदगी और कीड़ों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों, मिट्टी के घरों और कम स्वच्छता वाले इलाकों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है।
चांदीपुरा वायरस पहली बार महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में पहचाना गया था, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया। यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है और तेज बुखार के साथ मस्तिष्क में सूजन जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। यही वजह है कि इसे अक्सर सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इस वायरस के लिए अब तक कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन नहीं है, जिसके कारण इसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
चांदीपुरा वायरस का संक्रमण हो सकता है खतरनाक
चांदीपुरा को रैब्डोविरिडी फैमिली का वायरस माना जाता है। संक्रमण होने पर वायरस तेजी से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि इससे एन्सेफलाइटिस का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई के काटने से फैलता माना जाता है।
- संक्रमित कीट के काटने के बाद वायरस शरीर में प्रवेश करता है और तेजी से बढ़ सकता है।
- संक्रमण के कारण दिमाग में सूजन आने से सांस लेने और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
- यदि समय पर इलाज न मिले तो मौत का जोखिम भी बढ़ सकता है, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
कैसे करें इससे बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो यह संक्रमण सबसे ज्यादा छोटे बच्चों में देखा गया है, पर इससे सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। जिन क्षेत्रों में सैंडफ्लाई अधिक होती हैं, वहां रहने वाले बच्चों को ज्यादा खतरा हो सकता है। कुपोषण, कमजोर इम्युनिटी वाले और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चों में जोखिम अधिक माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चांदीपुरा से बचने के लिए सैंडफ्लाई और मच्छरों से बचाव की सलाह देते हैं। पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छरदानी का उपयोग करें और घर के आसपास पानी जमा न होने देना कीटों और मच्छरों के खतरे को कम कर सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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