स्वस्थ जीवन के लिए बचपन को आधार माना जाता है, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी माता-पिता को बच्चों को स्वस्थ और पौष्टिक आहार देने की अपील करते हैं। हालांकि भारत की स्थिति इस संदर्भ में अब भी काफी चिंताजनक बनी हुई है। देश में ज्यादातर बच्चों को शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं जिसके कारण उनमें कई प्रकार के रोगों के विकसित होने का खतरा बना रहता है। हाल ही में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक सर्वेक्षण में काफी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
बड़ी चिंता: 40 फीसदी बच्चों को नहीं मिल पाता है यह आवश्यक विटामिन, बढ़ सकती है बौद्धिक विकास-आंखों की समस्याएं
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क्या हैं सर्वे के आंकड़े?
राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 (एनएफएचएस -4) के चौथे दौर में जनवरी 2015 और दिसंबर 2016 के बीच 204,645 बच्चों पर सर्वे किया गया। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 640 जिलों में जनसंख्या स्तर पर एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन किया गया। अधिकारियों ने पाया कि इनमें से 9 महीने से 5 साल की उम्र के 123,836 बच्चों (60.5%) को विटामिन की खुराक मिली। यानि कि करीब 40 फीसदी बच्चे पोषक तत्वों से वंचित रह जाते हैं।
नागालैंड में स्थिति सबसे खराब
इस सर्वेक्षण के दौरान अधिकारियों ने माता-पिता से जानने की कोशिश की कि उनके बच्चों को सर्वेक्षण के 6 महीने के भीतर विटामिन-ए पूरक (वीएएस) मिला है या नहीं? अध्ययन के लेखक, डॉ कौस्तुभ बोरा (हेमटोलॉजी डिवीजन, आईसीएमआर के असम स्थित क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र) ने बताया कि अध्ययन से पता चला है कि गोवा इस मामले में सबसे टॉप पर रहा जहां बच्चों को आवश्यक पोषक तत्व मिल रहा है। मणिपुर (32.1%), उत्तराखंड (36.9%) और उत्तर प्रदेश (40.0%) का प्रदर्शन काफी निराश करने वाला है, कवरेज सबसे कम नागालैंड (29.5%) में था। गौरतलब है कि साल 2006 से केंद्र सरकार ने 9 से 59 महीने के सभी बच्चों के लिए विटामिन-ए के खुराक की सिफारिश की है।
बच्चों में विटामिन-ए की कमी गंभीर
बच्चों के लिए विटामिन-ए कितना जरूरी है इसे जानने के लिए हमने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ दृष्टि निगम से संपर्क किया। डॉ दृष्टि बताती हैं, बच्चों में विटामिन ए की कमी आम है, कइयों में इसका पता भी नहीं चल पाता है। 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 35% बच्चों में विटामिन-ए की कमी देखी जाती है। इसपर ध्यान न देना भविष्य के लिए गभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। सभी माता-पिता को बच्चों के लिए आहार में इन विटामिन्स को जरूर शामिल किए जाने की सलाह दी जाती है।
विटामिन-ए की कमी से क्या खतरा होता है?
डॉ दृष्टि बताती हैं, विटामिन-ए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए आवश्यक है। एक से तीन साल तक की उम्र के बच्चों को प्रतिदिन 300 एमसीजी की मात्रा में इस अति आवश्यक पोषक तत्व की आवश्यकता होती है। जिन बच्चों में इसकी कमी बनी रहती है उनमें विकास से संबंधित समस्या, संक्रमण और रतौंधी जैसे रोगों का खतरा अधिक होता है। यह बच्चों के बौद्धिक विकास को भी प्रभावित करता है। बच्चों में चश्मे लगने के लिए इस विटामिन की कमी को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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